Monday, 9 August 2021

Goal Attainment | लक्ष्य की प्राप्ति

नमस्कार दोस्तों, यह बात उस समय की है जब स्वामी विवेकानंद अमेरिका के प्रवास पर थे। वहां भ्रमण के दौरान उन्होंने देखा कि एक पुल के पास कुछ लड़के नदी में तैर रहे अंडो पर निशाना लगाना लगा रहे थे, लेकिन किसी का निशाना सही नही लग रहा था। यह देखकर स्वामी जी ने एक लड़के से बंदूक ली और खुद निशाना लगाने लगे।
उन्होने पहला निशाना सही लगाया, निशाना एकदम सटीक लगा। उसके बाद स्वामी विवेकानंद जी ने एक के बाद एक बारह निशाने लगाये। सभी एकदम सही लक्ष्य पर लगे।
यह सब देखकर लड़कों ने उत्सुकतावश पूछा, आपने यह सब कैसे किया?



इस पर स्वामी जी ने बड़े ही विनम्रतापूर्वक  उत्तर दिया कि यह सब ध्यान कि शक्ति से संभव हुआ है।
उन्होंने लड़कों को सीख दी कि हमेशा एकाग्रचित होकर केवल लक्ष्य पर ध्यान दो, तभी लक्ष्यभेद संभव है।
ठीक यही बात हमारे जीवन में भी लागू  होती है, प्रत्येक मनुष्य के जीवन का प्रायः एक निश्चित लक्ष्य होता है। फिर भी संसार में ऐसे लोगों की कोई कमी नहीं, जिनका कोई लक्ष्य नहीं होता।
ऐसे मनुष्य ऐसे गेंदबाज की तरह होते हैं, जो गेंद तो लगातार फेकते रहते हैं, लेकिन वह कभी लक्ष्य यानि विकेट पर नहीं लगती।
इस प्रकार वास्तव में लक्ष्य से विहिन होना उस बिना पता लिखे उस लिफाफे के समान है, जो कभी भी कहीं भी नहीं पहुंच पाता। इसलिए यदि लक्ष्य निर्धारित नहीं होता तो परिणाम विपरीत होता है।
इसलिए आपको अपने जीवन में अपना लक्ष्य चुनकर उसे पाने के संकल्प के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
इसप्रकार अपने लक्ष्य प्राप्ति की दिशा में असफलताओं का आप पर कोई नकारात्मक असर भी नहीं होना चाहिए। लक्ष्य प्राप्ति की दिशा में कितना समय लग रहा है, उससे विचलित होने की भी आवश्यकता नहीं है। क्योंकि याद रहे कि अच्छा भोजन भी वही होता है जो धीमी आँच पर देर तक पके।
इसलिए हमें लगातार प्रयास करते रहना चाहिए। प्रयास जितना प्रभावी होगा, परिणाम उतना ही आपकी अपेक्षा के अनुरूप होगा। ऐसे में लक्ष्य जितनी शीघ्रता से तय कर लिया जाय उतना ही अच्छा होता है, क्योंकि इससे उसकी प्राप्ति के प्रयास भी उतनी ही शीघ्रता से प्राप्त हो पायेंगे।

दोस्तों  यह आर्टिकल आपको कैसी लगी , अपने कमेंट के माध्यम से हमें जरुर बताएं. 

धन्यवाद.  

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