Thursday, 21 January 2021

महान एथलीट टेरी फॉक्स का जीवन परिचय हिंदी में | Terry Fox Biography in Hindi

नमस्कार दोस्तों, कनाडा के महान व्यक्तित्व  टेरी फॉक्स को दुनिया एक एथलीट एवं  कैंसर अनुसंधान कार्यकर्ता के रूप में उनके नि:स्वार्थ समर्पण के लिए जानती है.
टेरेंस स्टेनली फॉक्स का जन्म 28 जुलाई, 1958 को विन्निपेग, मैनिटोबा रोलैंड फॉक्स में हुआ था। फॉक्स  अपने परिवार में तीन भाई-बहनों के साथ बड़े हुए और उनके अन्दर बचपन से ही  सदाचार एवं शिष्टाचार जैसे गुण विद्यमान थे.

टेरी फॉक्स को बचपन से ही खेलो से गहरा लगाव पैदा हो गया था, विशेषकर बास्केटबॉल के प्रति उनके अन्दर जबर्दस्त  जुनून था। शुरू - शुरू में जब वे बास्केटबाल खेलने के लिए मैदान में जाते लेकिन उनके कोच उन्हें ज्यादातर  बास्केटबॉल खेलने के स्थान पर मैदान में दौड़ने के लिए कहते और इस पर टेरी कुछ नहीं बोलते और फॉक्स अपने कोच के आज्ञा का पालन किया करते थे. 

Image Source- Instagram 
इस प्रकार वे घंटों मैदान का तब तक चक्कर लगाते रहते थे जब तक की वह पूरी तरह थक न जाते. उनके जीवन की एक और बात यह है की  टेरी फॉक्स अपनी पूरी गर्मियों की छुट्टियों को खेलों और अभ्यास करने में बिताते, इस तरह वो खेल की दुनिया के प्रति पुरे तन - मन से लग जाते .

टेरी के बारे में एक बात यह भी था की  फॉक्स की  ऊंचाई मात्र पांच फुट थी, जो की एक अच्छा बास्केटबाल खिलाड़ी बनने के लिए पर्याप्त नहीं था लेकिन टेरी के ऊपर तो बास्केटबाल का जूनून सवार था. क्योकि उन्होंने स्वयं से संकल्प कर लिया था की उसे एक दिन दुनिया को अपने कर्मो से महान बनकर दिखाना है. इस तरह  उनके इस सपने की शुरुवात अपने  हाई स्कूल बास्केटबॉल की टीम में जगह पाकर हुआ.
 
10 वीं  के बाद, उन्होंने  साइमन फ्रेजर यूनिवर्सिटी में एडमिशन  लिया, जहाँ पर जाकर उन्होंने 'कैनेियोलॉजी' की पढ़ाई की और यहाँ पर आकार उनकी चाहत एक  शारीरिक शिक्षा का  शिक्षक बनने की होने लगी।
अपने कॉलेज के दिनों यानि की  बारहवीं कक्षा में "सर्वश्रेष्ठ एथलीट" का खिताब  अपने नाम कर लिया। 


लेकिन  सन 1976 में अचानक उनके जिन्दगी में एक काला दिन भी आया जब घर लौटते समय टेरी फॉक्स एक पिकअप ट्रक से दुर्घटनाग्रस्त हो गए, और इस  दुर्घटना में उनका दायाँ पैर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका था.
इस तरह टेरी सिर्फ एक घायल घुटने के साथ जीवित रहा। इस एक्सीडेंट के बाद  उनके  घुटने में अक्सर  दर्द होने लगता लेकिन वे अपने खेलों के प्रति जूनून के आगे इस दर्द को भी अनदेखा कर देते और वह दर्द में भी खेलते. लेकिन एक दिन ऐसा भी आया जब उनके दाहिने पैर का  दर्द  असहनीय हो गया और उन्हें अस्पताल ले जाया गया जहां पर डॉक्टरों ने बताया की उन्हें ओस्टियोसारकोमा या रेयर बोन कैंसर नामक  बीमारी हो गया है।

इस स्थिति में उस समय डॉक्टरों ने उन्हें बताया कि उनको अपने पैर को कटवाना होगा और कीमोथेरेपी की प्रक्रिया से  गुजरना होगा साथ ही उनको यह भी बताया गया की इस प्रक्रिया के बाद उनके जीवित रहने की संभावना मात्र 50 प्रतिशत ही रह जाएगी ।

दोस्तों इतना सब सुनने के बाद अगर कोई आम इन्सान होता तो उसके दिलों -दिमाग  में  क्या चल रहा होता, इसकी कोई कल्पना भी करके सहम जाता . लेकिन दुनिया के सबसे महान एथलिटो में से एक टेरी उनमे से नहीं थे और उन्होंने डॉक्टरों की बात मानते हुए अपना दायाँ पैर कटवा लिया.
इस तरह अपने दाहिने पैर को कटवाने के मात्र तीन सप्ताह के भीतर ही, फॉक्स एक कृत्रिम पैर की सहायता से चलने लगे और कुछ दिनों के बाद जल्द ही अपनी पुराने दिनचर्या को फिर से शुरू कर दिये। 

अस्पताल में उपचार के दौरान वह अपनी इस बीमारी वाली  बात से बहुत ज्यादा  व्यथित हो गए और सिर्फ यह सोचते कि उनके देश में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में अभी तक कैंसर और इसके उपचार के ऊपर कितना कम शोध हुआ है।
इसी दौरान  उन्होंने डिक ट्रम के बारे में भी पढ़ा, जिन्होंने न्यू यॉर्क शहर के एक बड़े विवाद को कैसे खत्म किया था जिससे उनको काफी प्रेरणा मिली। 

दोस्तों  टेरी फॉक्स डीक ट्रम के कार्य से वे इतने प्रभावित हुए की इसने उन्हें कनाडा में एक "क्रॉस कंट्री मैराथन" की शुरुवात करने के लिए दृढ़ संकल्पित  कर दिया, ताकि इस मैराथन से प्राप्त चंदे  से कैंसर जैसे जानलेवा  रोग के ऊपर अनुसंधान करने के लिए पर्याप्त धनराशि प्राप्त की जा सके। 
इस प्रकार उन्होंने इसके लिए प्रशिक्षण लेना शुरू किया और जल्द ही 1980 में उन्होंने अपने मैराथन को शुरू किया, जिसे उन्होंने  "मैराथन ऑफ होप" नाम दिया। 
अपने जिंदगी के सबसे बड़े लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए उन्होंने "कनाडाई कैंसर सोसायटी" के साथ-साथ प्रायोजन के लिए कई कॉर्पोरेट फर्मों के समर्थन की घोषणा की।

इस तरह टेरी फॉक्स ने अपने  मैराथन की शुरुवात 'सेंट जॉन' से की और हर दिन लगभग 43 किमी तक दौड़े। शुरुआत में उनका सामना मिली- जुली  प्रतिक्रिया और कठोर मौसम के साथ हुई , लेकिन बाद में जब तक वह न्यूफ़ाउंडलैंड के पोर्ट औक्स बेसिक्स में पहुचते, तब तक उन्होंने 10,000 डॉलर से अधिक की धनराशि दान के रूप में प्राप्त कर चुके थे. जिससे उन्हें अपने सपने को पूरा करने एवं मैराथन को आगे भी जारी रखने के लिए काफी प्रेरणा मिली।




जब तक वह ओंटारियो के लिए रवाना होते , तब तक उनका पूरा देश उनके इस कार्य को पुरे दिल से सपोर्ट करने लगा और अब उन्हें एक राष्ट्रीय स्टार के रूप में प्रसिद्धि मिलने लगी । लेकिन दुर्भाग्य से सन 1980 में, टेरी फॉक्स की बीमारी ने उन्हें थंडर बे में पहुचने से ठीक पहले उनके इस मैराथन को रोकना शुरू कर दिया। अब तक, कैंसर उनके  फेफड़ों तक पहुँच चुका था जिसके कारण उन्हें  अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा जहाँ सन 1981 में मात्र 23 वर्ष की अल्प आयु में दुनिया के इस महान व्यक्ति की  मृत्यु हो गई। 



दोस्तों टेरी फॉक्स अपने जीवन में कुल 143 दिनों तक चले और  इस दौरान कुल 5,373 किमी की दूरी तय किये  और 1981 में 24 मिलियन डॉलर से भी अधिक धनराशि जुटाने में कामयाब रहे ।
टेरी फॉक्स फाउंडेशन आज भी फॉक्स की विरासत को आगे बढ़ाते हुए, कैंसर अनुसंधान के लिए धन इक्कठा  करता है। 2004 में फॉक्स को "द ग्रेटेस्ट कैनेडियन" के रूप में दूसरा स्थान दिया गया था और उनके नाम पर कई पार्क और इमारतें बनी हैं।

 ये भी पढ़ें-


अंत में हम अपने आर्टिकल के माध्यम से आपसे सिर्फ इतना बताना  चाहते हैं कि  चाहे किसी व्यक्ति के सामने कितनी भी बाधाएं एवं मुश्किलें क्यों न आये.  अगर उसके अन्दर दृढ़ संकल्प एवं प्रबल इच्छाशक्ति हो तो वह कुछ भी कर सकता है.

तो आज का हमारा यह आर्टिकल आपको कैसा लगा अपने कमेंट के माध्यम से जरूर बताएं, साथ ही इस आर्टिकल को अपने सगे- सम्बन्धियों को शेयर करना न भूले. हो सकता है इस आर्टिकल को पढ़कर किसी के  जीवन में हमेशा के लिए सकारात्मक बदलाव आ जाये.

आर्टिलकल पढने के लिए आपका दिल से धन्यवाद.  

2 comments


EmoticonEmoticon

>