Tuesday, 8 December 2020

इम्युनिटी पासपोर्ट क्या है | Immunity Passport for Covid 19 in Hindi

What is Immunity Passport-

नमस्कार दोस्तों, जैसा की आप सब जानते हैं की मौजूदा समय में कोरोनावायरस  ने पूरे दुनियाभर के अर्थव्यवस्था को बहुत  ज्यादा नुकसान पहुंचा दिया है. एक तरफ जहाँ  लॉकडाउन लगने के कारण हर छोटे- बड़े संगठन एवं फैक्ट्रीयो में कामकाज बंद  होने से कई देशों की  आर्थिक वृद्धिदर को नकारात्मक  स्थिति में जाने की संभावना का अनुमान लगाया गया है. हालांकि पूरी तरह से कामकाज बंद नहीं हुआ है क्योकि कुछ जगहों पर कामकाज धीरे-धीरे पहले की तरह पटरी पर लाया जा रहा है. बस इसी को ध्यान में रखते हुए इसके लिए दुनिया के कुछ देश इम्युनिटी पासपोर्ट (Immunity Passport) के आइडिया पर सोच - विचार कर रहे हैं.

आपको बता दें कि इम्युनिटी पासपोर्ट अथवा  रिस्क फ्री सर्टिफिकेट (Risk Free Certificate) उन लोगों को दिए जाने किए जाने की योजना है, जिनको पूर्व में कोरोना हो गया था लेकिन अब वे  पूरी तरह ठीक हो चुके हैं. एक दूसरी बात यह है की उन लोगों को  ये सर्टिफिकेट इस आधार पर जारी किए जाने की योजना है कि वर्तमान में कोरोना से ठीक हो चुके लोगों में एंटीबॉडीज पर्याप्त मात्रा में विकसित हो चुके हों और अब वे इन्फेक्शन से सुरक्षित हैं. इसप्रकार  ऐसे लोग अब यात्रा करने  या फिर अपने काम पर वापस लौटने में सक्षम हैं.





World Health Organisation (WHO) ने दी चेतावनी-

एक तरफ जहाँ विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का कहना है कि दुनियाभर की गवर्नमेंट को कथित “इम्युनिटी पासपोर्ट” या “रिस्क फ्री सर्टिफिकेट” पर अभी इतना विश्वास नहीं करना चाहिए. एक और बात WHO ने कहा है कि अभी तक इस बात का कोई सबूत नहीं मिला है कि जिन लोगों में संक्रमण से ठीक होने के बाद एंटीबॉडी विकसित हो चुके  हैं, उन्हें अब दोबारा संक्रमण नहीं होगा और अब वे कोरोना  से सुरक्षित हैं. 

विश्व स्वास्थ्य संगठन  ने यह भी चेताया है कि इस तरह के कदम कोरोना वायरस के संक्रमण को बढ़ाने वाले हो सकते हैं. यदि किसी को  लगेगा कि वे इम्यून हो गए हैं यानी की अब वे रीइन्फेक्शन से सुरक्षित हैं, तो वे एहतियात बरतना बंद कर सकते हैं जो की बाद में खतरनाक साबित हो सकता है.

SARS के वक्त भी हुआ था फिर से इन्फेक्शन-

इसी क्रम में एक तरफ विश्व स्वास्थ्य संगठन WHO का कहना है कि सार्स (SARS) के मरीजों के फिर से \ बीमार होने के कई केस सामने आए थे जो की दुनिया के लिए ठीक नहीं है. WHO ने आगे बताया की सार्स के मरीजों के शरीर में तो एंटीबॉडीज बनीं , लेकिन इनमें से कई मरीजों में  एक वक्त के बाद एंटीबाडी बेअसर सी हो गईं. आपको बता दें की अब तक इस मामले में कोरोना के नतीजे अभी आने बाकी हैं.


एंटीबॉडीज को लेकर अध्ययन का रिपोर्ट-

विश्व स्वास्थ्य संगठन  ने एक संक्षिप्त नोट में कहा है कि ज्यादातर स्टडी यह  बताते हैं कि जो लोग एक बार कोरोना वायरस के  संक्रमण से  ठीक हो चुके हैं, उनके ब्लड  में एंटीबॉडीज उपस्थित  हैं और यह काफी मात्रा में हैं. वहीँ  कुछ व्यक्ति  ऐसे भी हैं, जिनके शरीर में एंटीबॉडीज का लेवल  अभी पर्याप्त नहीं है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार अभी  तक ऐसा कोई अध्ययन नहीं हुआ है, जो इस बात की सिद्ध  करता है  कि किसी मानव शरीर में एंटीबॉडी की मौजूदगी बाद में कोरोना के रीइन्फेक्शन को रोकने में प्रभावी रूप से काम कर रहा  है, इसका मतलब यह हुआ की  किसी व्यक्ति को फिर से कोरोना वायरस का संक्रमण नहीं होगा. इस प्रकार  इम्युनिटी पासपोर्ट के द्वारा लोग एहतियात बरतने के प्रति लापरवाह भी कर सकते हैं, इसप्रकार   कोरोना का संक्रमण फैलना आगे भी जारी रहने का खतरा  बढ़ सकता है.


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धन्यवाद.



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