Thursday, 3 December 2020

मसाला किंग धर्मपाल गुलाटी का जीवन परिचय हिंदी में | Dharampal Gulati (MDH) Biography in Hindi

नमस्कार दोस्तों, आपने अपने जीवन में एमडीएच (MDH) मसाले के बारे में सुना होगा ना, वो जो टीवी में लाल रंग का  साफा बांधे दिखाई देते हैं और साथ ही यह कहते हैं "यही है असली इंडिया". जी हां आज के इस पोस्ट में मैं आप लोगों को तांगा  चलाने से लेकर MDH मसाले जैसी विश्वस्तरीय ब्रांड के MD श्री धर्मपाल गुलाटी जी के जीवन के बारे विस्तार से बताने वाला हूँ. तो आप शुरू से लेकर अंत तक बने रहिए हमारे इस आर्टिकल के साथ.

मित्रों महाशय धर्मपाल गुलाटी जी ने अपने जीवन में कठिन संघर्ष एवं अथक परिश्रम किया जिसके बाद ही अपने जीवन में सफलता प्राप्त की. जो कि हम सबके लिए एक बेहतरीन मार्गदर्शक प्रेरणास्त्रोत बन सकते हैं.

 ‘महाशय धर्मपाल गुलाटी’ की, जो कभी अपने जीवन यापन करने  के लिए तांगा चलाते थे लेकिन  आज "Masala King" (मसालों के बादशाह) के नाम से मशहूर है. आज इनकी कंपनी का  बनाया MDH मसाला  घर- घर की रसोई की पहचान है.



महाशय धरमपाल गुलाटी का प्रारम्भिक जीवन एवं परिवार  (Dharampal Early Life & Family) -

श्री धरमपाल गुलाटी जी  का जन्म 27 मार्च सन 1923 को पाकिस्तान के सियालकोट में एक सामान्य परिवार में हुआ था. उनके पिता जिनका नाम महाशय चुन्नीलाल और माता चनन देवी था. इनके माता- पिता दोनों ही धार्मिक प्रकृति वाले होने के साथ- साथ  दोनों ही आर्य समाज के अनुयायी थे. धरमपाल जी का बचपन पाकिस्तान के सियालकोट में ठीक- ठाक से ही बीता. सियालकोट में ही इनके पिता की अपनी एक मिर्च-मसालों की दुकान थी, जिसका नाम  ' महाशियान दि हट्टी ' था. धरमपाल जी के  पिता स्वयं ही मसालों को पीसकर तैयार करते थे  जिसके कारण उनकी दुकान अच्छी - खासी चलती थी. स्वयं के  बनाये मसालों के कारण ही वे अपने एरिया में ' दिग्गी मिर्च वाले ' के नाम से प्रसिद्द थे.


शिक्षा ( Education) -

दोस्तों जहाँ तक इनके शिक्षा की बात है तो आपको बता दें की धरमपाल गुलाटी जी का मन पढ़ाई-लिखाई में कोई ख़ास नहीं लगा. मात्र 5वीं क्लास में फेल होने के बाद इन्होंने पढ़ाई- लिखाई से रिश्ता ही तोड़ लिया एवं स्कूल छोड़ दिए. स्कूल छोड़ने के बाद ये अपने घर पर ही रहने लगे. इनके स्कूल छोड़ने से इनके पिता कुछ समय के लिए इनसे काफी दुखी हुए. लेकिन कुछ समय के बाद में उन्होंने इनको कोई  हुनर सिखाने का फैसला किया ताकि ये  अपने जीवन में अपने पैरों पर खड़े होने लायक बन सकें.

धरमपाल जी का व्यापारिक जीवन (Dharampal Business Life) -

शुरुवात में इनके पिता ने इन्हें लकड़ी का काम सीखने के लिए इनको एक बढ़ई के पास भेजा लेकिन मात्र  8 महीने तक ही वहाँ पर लकड़ी का काम सीखने के बाद इन्होंने वहाँ जाना ही बंद कर दिया. क्योकि इनका मन लकड़ी के  काम में नही लगता था. इसके कुछ ही समय के बाद फिर से इनके पिता ने इन्हें चांवल की फैक्ट्री में काम पर लगवा दिया, उसके बाद कपड़ों का काम भी इन्होंने कुछ समय तक किया.

इस तरह 15 साल की उम्र  तक आते-आते धरमपाल जी ने कपड़े से लेकर हार्डवेयर जैसे कई काम करके छोड़ चुके थे. लेकिन इस दौरान ये किसी भी काम में वे टिक नहीं पाए इसका एक प्रमुख कारण इनका इन सब कामो में मन नही लगना था.

एक समय ऐसा भी आया जब इनके पिता ने इन्हें अपने ही दुकान पर बैठने के लिए कह दिया और इस तरह ये अपने पिता की दुकान पर  मिर्च-मसाले पीसने का काम करने लगे. इस तरह 18 वर्ष के होते- होते ही इनके पिता ने धरमपाल जी की शादी कर दी और इस तरह से इनके पिता ने अपनी तरफ से धरमपाल  के प्रति अपनी  जिम्मेदारी पूरा  कर लिया. समय के साथ धरमपाल जी अपने पिता के  मसाले के बिजनेस को दिन ब दिन उचाई पर ले जाने लगे.




इस दौरान सब कुछ ठीक- ठाक ही चल रहा था की सन 1947 में देश का बटवारा  हो गया और देश भारत एवं पाकिस्तान में बंट गया. अब  सियालकोट एक नए देश पाकिस्तान का एक हिस्सा बन गया. देश विभाजन के बाद  पाकिस्तान में खूब दंगे भड़क उठे, जिसमें कई हिन्दुओं को जान से मार दिया गया एवं  कईयो  की दुकानें भी लूट ली गई और हिन्दुओ पर अनेकों प्रकार के अत्याचार किये गए. अब इस तरह की माहौल में पाकिस्तान में  रह रहे हिन्दुओं में अपने एवं अपने परिवार के प्रति असुरक्षा की भावना बुरी तरह से घर कर गई और जिसका परिणाम ये हुआ की  धरमपाल जी को रातो -रात पाकिस्तान छोड़कर भारत भागकर आना  पड़ा. 

इस तरह धरमपाल जी पाकिस्तान का  सियालकोट छोड़कर भारत आने के लिए निकल पड़े लेकिन  जिस ट्रेन से ये  भारत आ रहे थे, उसमें दंगो के कारण लाशें ही लाशें दिख रही  थी. लेकिन इन सब के बाद भी  ये किसी भी  तरह से अमृतसर पहुँच ही गए. अमृतसर पहुचने के बाद ये  एक दिन के लिए यहाँ रुकने के बाद ही  दूसरे दिन ये  ट्रेन पकड़कर  दिल्ली के करोलबाग स्थित अपनी बहन के घर आये.

इस प्रकार दिल्ली पहुचने के बाद में धरमपाल जी को एक नए सिरे से अपने जिन्दगी की शुरुवात करनी थी. आपको बता दें की  जब ये  सियालकोट को छोड़े थे उस वक्त इन्होंने अपने जेब में मात्र 1500 रुपये लेकर ही चले थे. क्योकि वही इनकी कुल जमा-पूंजी थी. इस दौरान उन पैसो में से 650 रुपये का इन्होंने दिल्ली आकर एक तांगा और घोड़ा खरीदा और तांगा चलाने वाले बन गए. 

ये  नयी दिल्ली स्टेशन से क़ुतुब रोड एवं  करोल बाग़ से  बड़ा हिंदू राव तक तांगा चलाते थे. लेकिन इनका यहाँ इस काम में भी मन नहीं रम सका जिसके कारण ये ज्यादा  समय तक  यह तांगा चलाने का  काम नहीं कर पाए. सिर्फ दो महीने तक ही तांगा चलाने के बाद इन्होंने अपना तांगा बेच दिया एवं उससे मिले पैसे  से लकड़ी  का खोका खरीद लिया और करोल बाग़ के अजमल खान रोड पर ही  एक छोटी सी दुकान बनवा ली. बस इसी दुकान से ही  इन्होंने मिर्च - मसालों के  अपने पुराने  बिजनेस को फिर से करना शुरू कर दिया. इस दुकान का नाम उन्होंने "महशिआन दि हट्टी – सियालकोट वाले" रखा.

इस तरह किसी समय  पाकिस्तान के सियालकोट में एक अच्छी खासी दुकान चलाने वाले धरमपाल जी इस छोटे से खोके पर ही दिन भर  मिर्च- मसाला पिसते . इनकी दूकान का पिसा हुआ मसाला लोगों  को खूब पसंद आने लगा. इस तरह धीरे- धीरे ही सही लेकिन इनकी  परिश्रम  सफलता में बदलने लगी. क्योकि जैसे-जैसे लोगों को पता चला की ये वही  सियालकोट के मशहूर दिग्गी मसाले वाले है, इस प्रकार लोग  इनकी दुकान पर मसाले खरीदने के लिए आने लगे. दोस्तों लोगों के इनके दुकान पर आने का सबसे प्रमुख कारण यह था की  इनके अपने हाथ से  बनाए गए मसालों की उच्च क्वालिटी का  होना था.

दिल्ली के विभिन्न न्यूज़पेपरों  में दिए गए विज्ञापनों से भी इनके स्वयं बनाये  मसाले को मशहूर होने में बहुत सहयोग किया  और इस तरह  इनका व्यापार तेज़ी से उचाईयों पर पहुच गया.

जिसका परिणाम यह हुआ की इन्होंने सन 1968 तक इन्होंने दिल्ली में ही अपनी मिर्च -मसालों की फैक्ट्री खोल दी और इनके फैक्ट्री का बना मसाला पूरे भारत के साथ दुसरे देशों में भी export होने लगे.

दोस्तों आज के समय में इनका "महशिआन दि हट्टी" जिसको MDH के नाम से भी जाना जाता है, जो की मसालों की दुनिया में एक विश्वस्तरीय ब्रांड बन चुका है. आज वे MDH के प्रबंध निदेशक और ब्रांड एम्बेसडर हैं. आपको बता दें की  MDH मसाले आज दुनिया के 100 से भी अधिक देशों में अपने 60 से अधिक प्रोडक्ट की सप्लाई  करता है. आज MDH के टॉप 3 प्रोडक्ट है – देग्गी मिर्च, चाट मसाला और चना मसाला. 


Dharampal Gulati Networth-

आपको बता दें की साल  2020 में इनकी कंपनी की पूरी  आय 3000 करोड़ रूपये  हो गया है जो की हर साल बढ़ता ही जा रहा है. इसके अलावा इनकी कंपनी आज भारत के अलावा यूरोप , कनाडा, यूएई एवं ब्रिटेन जैसे विश्व के कई हिस्सों में अपने मसालों का निर्यात करते हैं. इनके सम्बन्ध में एक और खास बात यह है की ये अपने वेतन की 90% धनराशि दान में दे देते है. मित्रों किसी का समय कब बदल जाये ये किसी को पता नहीं, इसका प्रतक्ष्य उदाहरण हैं धरमपाल जी. क्योकि  कभी मात्र  दो आना लेकर तांगा चलाने वाले महाशय धरमपाल जी का नाम आज भारत के अरबपतियों में गिना जाता  है. इन सब के पीछे इनकी  मेहनत, लगन और कार्य के प्रति पूरी ईमानदारी है. जिसकी बदौलत इन्होंने  अपने जीवन में यह मुकाम हासिल किया है.

मित्रों आपको बता दें कि महाशय धरमपाल जी एक उद्योगपति होने के साथ-साथ  एक अच्छे समाजसेवी भी है. इन्होंने समाज सेवा करने के उद्देश्य से कई अस्पताल और स्कूलों का निर्माण करवाया है. आज मसाला किंग के नाम से जाने जाने वाले  धरमपाल जी ने अपने जीवन का एक अपना मानना  है  जो की यह है - "दुनिया को अपने सर्वश्रेष्ठ दो और सर्वश्रेष्ठ स्वमेव ही आपके पास वापस आएगा."

दोस्तों  आज भी जब धरमपाल जी टीवी में हमें दिखाई देते हैं तो लोग इनके इतनी उम्र में भी इनके जीवन जीने की कला को देखकर इनसे प्रेरित होते रहते हैं. कई बार जब इनसे इनकी फिटनेस का राज़ के बारे में पूछा तो इन्होंने अनुशाशित जीवन  एवं संतुलित खान- पान को ही अपने स्वस्थ्य जीवन का राज़ बताया. इन्होंने बताया की ये प्रतिदिन 5 बजे ही उठ जाया करते हैं और दैनिक क्रियाओ को करने के बाद बाहर टहलने निकल जाते हैं  आगे ये बताते हैं की इनका ये आदत इनके बचपन से ही है. इसके अलावा ये योग और ध्यान भी इनकी रूचि रही है.


पुरस्कार (Achivement) - 

सन 2016 में एबीसीआई वार्षिक पुरस्कारों में इंडियन ऑफ़ दी ईयर से इन्हें नवाजा गया.

सन 2017 में लाइफटाइम अचीवमेंट के लिए उत्कृष्टता पुरस्कार से सम्मानित.




वर्ष 2017 में ही एफएमसीजी क्षेत्र में सबसे ज्यादा भुगतान करने वाले CEO (21 करोड़/वर्ष)

वर्ष 2019 में भारत सरकार ने इन्हें भारत के तीसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्मभूषण से अलंकृत किया.  


   

धरमपाल जी की मृत्यु (Dharampal Gulati Death or RIP) -

दोस्तों मसाला किंग के नाम से मशहूर श्री धरमपाल गुलाटी जी की मृत्यु 3 दिसंबर सन 2020 को 98 वर्ष की उम्र में हुई.


 दोस्तों आज का हमारा यह आर्टिकल आपको कैसा लगा, हमें बताना ना भूलें. अगर यह आर्टिकल आपको  पसंद आया हो तो आप इसे अपने दोस्तों एवं रिश्तेदारों को शेयर कीजिए ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग हमारे देश के मसाला किंग के नाम से मशहुर धरमपाल गुलाटी जी के जीवन के बारे में जान सकें. 


धन्यवाद.






1 comments so far

Wow great man,thanks for the information.


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