Wednesday, 23 September 2020

10 प्रसिद्ध भारतीय व्यंजन जो मूल रूप से भारतीय नहीं हैं | 10 Famous Indian Recipes That Are Not Originally Indian

नमस्कार दोस्तों, जैसा कि आप सबको पता है की भारतीय लोग अपने सांस्कृतिक महत्व एवं बेहतरीन मेहमान नवाजी के लिए विश्व प्रसिद्द हैं। जब भी हमारे आपके घर कोई मेहमान आता है तो उनके मेहमान नवाजी के लिए हम लोग  बहुत सारे स्वादिष्ट व्यंजन बनाकर उनके सामने  परोसते हैं.

दोस्तों हम  बचपन से ही अपने दैनिक जीवन में कई ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन करते हैं जिन्हें ऐसा माना जाता है की वे  भारतीय व्यंजन हैं लेकिन आपको बता दें की ऐसा बिलकुल भी नहीं है। आज के इस पोस्ट में हम आप लोगों को कुछ ऐसे ही व्यंजनों के बारे में बताने वाले  हैं जिन्हें माना तो भारतीय व्यंजन  जाता है लेकिन वास्तव में इनकी उत्पत्ति  या खोज  विदेशों में हुई है.

1 . गुलाब जामुन ( Gulab Jamun) -

इस लिस्ट में पहला नाम भारत भर में बड़े ही चाव से खाया जाने वाला गुलाब जामुन  मूल रूप से भूमध्यरेखीय क्षेत्र का व्यंजन है, जिसे फारसी  आक्रमणकारियों के द्वारा भारत में लाया गया था. आपको बता दें की वहाँ गुलाब जामुन को  "लुकमत  अल कादी" के नाम से जाना जाता था|




मित्रों उन दिनों  वहाँ "लुकमत अल कादी"  यानि की आज के गुलाब जामुन को बनाने के लिए आटे की गोली को तेज आंच पर फ्राई करते  हैं. इसके बाद गोलीयों  को शहद की चाशनी में डालकर उसके ऊपर से चीनी छिड़क दी  जाती थीं. लेकिन आज भारत के लगभग सभी हिस्से में इसके बनाने के तरीकों में काफी बदलाव के साथ इसे और भी लजीज बना दिया गया है.


2. जलेबी ( Jalebi) -

दोस्तों जलेबी का नाम सुनते ही लोगों के जुबान पर पानी आ जाता है, और फिर आये भी क्यों ना  क्योकि जलेबी है ही इतनी प्यारी . आपको बता दें की जलेबी भारत का राष्ट्रीय मीठा है. जहाँ तक इसकी उत्पत्ति की बात है तो इसकी शुरुवात  मध्य पूर्व के देशों से हुई एवं  फारसी आक्रमणकारियों द्वारा यह भारत में लायी गयी. फारस में इसे मूल रूप से इसे “जलीबिया” या “जुलाबिया” और अरबी में इसको “जलाबिया ” के नाम से जाना जाता था.





3. चाय (Tea) - 

दोस्तों चाय की  शुरूआत सबसे पहले चीन में  हुई जहाँ पर इसका उपयोग वहां के लोग  औषधीय पेय के रूप में करते थे.  आज भी चाइना में चाय को बहुत पसंद किया जाता है. समय के साथ जल्द ही अंग्रेजों ने इसकी खोज कर ली  और इसे चीन से भारतीय बाजारों में लेकर आये जिसे भारत में हाथों हाथ लिया गया एवं जल्द ही पुरे भारत में इसे बहोत प्यार दिया गया एवं भारत भर के घरो में आने वाले मेहमानों को सबसे पहले दिया जाने वाला पेय बन गया. 




जहाँ तक इसकी खेती का सवाल है तो अंग्रेजों के द्वारा भारत के उत्तरी-पूर्वी भाग के आदिवासियों को चाय की खेती करने का तरीका सिखाया गया. इसके बाद से ही चाय भारत के लोगों के दिलो में अपना स्थान बना लिया एवं भारतीयों की दैनिक जीवन का एक अहम हिस्सा है और यह 1950 के बाद भारत में बहुत लोकप्रिय हो गया.


4 . दाल - भात ( Daal Bhaat) -

भात के सम्बन्ध में आश्चर्यजनक बात यह है कि इसे पूरी तरह से भारतीय व्यंजन माना  जाता है पर ऐसा वास्तव में सच नही है.  अगर भारत में इसकी सबसे अधिक लोकप्रियता की बात करे तो दाल भात असम , पश्चिम बंगाल के साथ पुरे उत्तर भारत में बहुत प्रसिद्द है . इन राज्यों में इसकी प्रसिद्धि का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है की इन प्रदेशो में रहने वाले लोगों के दोपहर का भोजन बिना दाल भात के पूरा नहीं होता.





5 . समोसा (Samosa) -

दोस्तों जब बात समोसे की आती है तो हमारे जुबान पर पानी आना लाजमी है. आखिर हम कर भी क्या सकते हैं समोसा है ही इतनी लजीज की इसके क्या बच्चे, क्या बूढ़े सभी को यह खूब भाता है. जहाँ तक इसकी उत्पत्ति की बात है तो आपको बता दें की समोसा की शुरुवात सबसे पहले  मध्य पूर्व से हुई और वहाँ इसे "सम्बोसा" के नाम से जाना जाता हैं . लेकिन समोसे के सम्बन्ध में कुछ जानकारों के द्वारा यह भी कहा जाता है की इसे भारत में मुगलों के द्वारा लाया गया था. वैसे भारत के पश्चिम बंगाल में इसे सिंघाड़ा एवं उत्तर प्रदेश के साथ भारत के ज्यादातर हिस्सों में इसे बड़े ही आदर के साथ समोसा नाम से जाना जाता है.

दोस्तों वैसे समोसा खाना तो मै भी बड़ा पसंद करता हू लेकिन मैंने भारत के कई राज्यों का समोसे का स्वाद लिया
है  लेकिन पश्चिम बंगाल का सिंघाड़ा मुझे सबसे ज्यादा पसंद है. अब बताने की बारी आपकी है की आपको भारत 
के किस शहर या राज्य का समोसा सबसे अच्छा लगता है.






 6 . राजमा ( Rajma) -

राजमा मैक्सिकन जायके  का प्रमुख  भोज्य पदार्थ में से एक है. आपको पुरे मक्सिको के छोटे - बड़े होटलों , रेस्टोरेंटो , ढाबो में यह हेल्दी खाद्य बड़े ही आसानी से देखने को मिल जायेगा. इसके साथ ही पुरे मक्सिको में इसकी खेती बड़े ही लगन के साथ होती है.  यह मध्य मेक्सिको और ग्वाटेमाला से भारत लाया गया है. जहाँ तक भारत में इसकी लोकप्रियता की बात है तो पूरा उत्तर भारत विशेष रूप से दिल्ली, उत्तर प्रदेश इसके अलावा पंजाब और हरियाणा के लोग इसे बड़े ही चाव से खाते हैं. राजमा के बारे में एक और बात यह है की यह बहोत हेल्दी एवं विभिन्न प्रकार के विटामिन एवं पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य है.




ऐसा कहा जाता है कि राजमा पुर्तगाल से भारत लाया गया था और इसको भिगोने और उबालने की तकनीक मैक्सिकन पाक कला से प्रभावित थी.


7. चिकन टिक्का मसाला ( Chicken Tikka Masala) -

दोस्तों चिकन टिक्का मसाला का आविष्कार ग्लासगो में हुआ था. इसके आविष्कार के पीछे एक बहुत ही दिलचस्प कहानी है और वह इस प्रकार है , हुआ यूँ था कि सन  1971 में ग्लासगो में अली अहमद नामक एक रसोइया था जिसके रेस्तरां (restaurant) का नाम शीश महल था. एक बार एक ग्राहक ने उस रेस्तरा में “चिकन करी” का आर्डर दिया लेकिन इसे खाते समय उसने इसे पसंद नहीं किया इसका कारण यह था की  “चिकन करी” सूखी थी. ठीक उसी  समय अली अहमद अपने रसोई में टमाटर सूप का मजे से आनंद ले रहा था और अचानक उसने सोचा कि क्यों न इस चिकन करी में सूप मिलाया  जाय. बस इसके बाद उसने करी में सूप, मसाले, क्रीम और दही के मिश्रण को मिलाया जिसे ग्राहकों ने बहुत पसंद किया. धीरे - धीरे उसका यह प्रयोग लोगों के जुबान पर अपने स्वाद का जादू दिखाना शुरू कर दिया और देखते ही देखते पुरे ग्लासगो भर से लोग इसके स्वाद को लेने के लिए शीश महल नाम के इस रेस्तरा में आने लगे और कुछ ही समय के बाद इस शहर के बाहर भी यह लजीज पकवान लोगों को अपना दीवाना बना लिया.




जहाँ तक भारत की बात है तो यहाँ के लोग भी इस चिकन टिक्का मसाला को बड़े ही चाव से खाते हैं . विशेष रूप से यह पंजाब, दिल्ली , उत्तर प्रदेश, गुजरात और हरियाणा में यह छोटे ,बड़े रेस्टोरेंटो पर आसानी से देखने को आपको मिल जायेंगे. जो इसकी प्रसिद्धि को खुद ही बयां कर देते हैं.

दोस्तों जहाँ तक मेरी बात है तो आपको बता दूँ कि मुझे खुद cहिचकें टिक्का मसाला बहोत पसंद है और जब भी मौका मिलता है , इसका स्वाद लेने से अपने आप को दूर नहीं रख पाता हूँ. वैसे आप लोगों को चिकन टिक्का कैसा  लगता है , हमें कमेंट बॉक्स में जरुर बताएं.


8. बिरयानी ( Biriyani) - 

दोस्तों जैसे बात बिरयानी की आती है , हमारे और आपके मुह में पानी आना लाजमी है क्योकि ये होतो ही है इतनी लजीज की हर नॉनवेज  लवर इसकी तरफ तेज़ी से आकर्षित हो जाता है. जहाँ तक इसकी शुरूआत की बात है तो यह 16वीं सदी में फारस से  हुई. क्योकि वहां सब्जी का उत्पादन पर्याप्त नहीं हो पाता था इसलिए काफी हद तक वहां के लोग नॉनवेज जैसे चिकन, मटन, बीफ पर निर्भर होते हैं.  इस व्यंजन का नाम फारसी शब्द "बिरियन" से लिया गया है जिसका अर्थ "खाना पकाने से पहले तलना या फ्राई करना है"

बिरयानी बनाने के लिए बासमती चावल , दही, केशर, वनस्पति तेल या मक्खन, कस्तूरी मेथी, अंडा, चिकन या मटन एवं विभिन्न प्रकार के गरम मसालों को मिलकर तैयार किया जाता है. 




जहाँ तक भारत में बिरयानी की लोकप्रियता की बात है तो पुरे भारत में यह लजीज नॉन वेज बहोत प्यार से खाया एवं खिलाया जाता है. भारत में इसे शादी- विवाह  एवं हर छोटे-बड़े पार्टियों में अक्सर आप देख सकते हैं. यह रेहड़ी से लेकर हर छोटे-बड़े रेस्टोरेंटो में आसानी से मिल जायेगा जिससे इसकी लोकप्रियता का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है.

अगर बात प्रसिद्धि की की जाये तो निजाम का शहर हैदराबाद की बिरयानी का कोई जवाब नहीं है. वैसे भारत में  बिरयानी को कई तरीके से बनाया जाता है विभिन्न प्रकार के मसालों के साथ अलग - अलग फ्लेवर की बिरयानी आपको मिल जाएगी.

जहाँ तक पसंद की बात है तो दोस्तों मै आपको बता दूँ की बिरयानी मुझे बहोत पसंद है और मैंने कई शहरों का बिरयानी टेस्ट किया है. लेकिन लखनऊ एवं हैदराबाद की बिरयानी मुझे सबसे अच्छी लगती है. अब बताने की बारी आपकी है की आपको भारत के किस शहर की बिरयानी सबसे अधिक पसंद है.  



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9. नान (Non) - 

इसकी शुरूआत फारस में हुई और खमीर के रूप में इसका इस्तेमाल ईरान में किया गया था. यह मुगल काल के दौरान मुगलों द्वारा भारत लाया गया था. यह देखने में काफी कुछ ब्रेड जैसा दिखता है एवं उतना ही सॉफ्ट होता है. इसका प्रयोग ज्यादातर लोग नॉनवेज जैसे चिकन, मटन एवं वेज में पनीर के साथ खूब किया जाता है.इसका कारण है की नॉन इन बताये गए व्यंजनों के साथ बहोत ही स्वादिस्ट लगता है. वैसे नान मुझे भी खूब भाता है और आपको , हमें जरुर बताएं . 




10. फिल्टर कॉफी ( Filter Coffee) -

 दोस्तों फ़िल्टर काफी की शुरुवात  यमन से  हुई थी. इसे दूध और चीनी के बिना मदिरा के विकल्प के रूप में सेवन किया जाता था. आपको बता दें की फ़िल्टर काफी 16 वीं सदी तक यह भारत में नहीं पाया जाता था. इसे मक्का की तीर्थयात्रा पर गए सूफी संत बाबा बुदन द्वारा भारत में लाया गया था.  वे वेयमन के मोचा शहर से सात कॉफी के दाने भारत में लाये थे. भारत में सबसे पहले  फिल्टर कॉफी "कॉफी उपकर समिति" द्वारा लोकप्रिय हुआ था जब उन्होंने 1936 में बंबई में अपने पहले कॉफी हाउस की स्थापना की थी.




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