Wednesday, 12 August 2020

राहत इन्दौरी की जीवनी हिंदी में | Rahat Indori Biodata in Hindi 2020

Rahat Indori Biography in Hindi 2020 

नमस्कार  दोस्तों, भारत के मशहूर शायर राहत इंदौरी की शायरी का अंदाज़ बहुत अलग एवं लाजवाब  होता है। वे लोगों के दिलों में उतरने के लिए के कोई भी ऐसा सरल रास्ता नहीं चुनते है. जो उनकी शायरी की इज़्ज़त को कम करता हो। राहत इंदौरी जी जब ग़ज़ल पढ़ रहे होते हैं तो उस वक़्त आप सिर्फ उनके चेहरे का अंदाज़ को देखना और सुनना दोनों एक अलग ही  अनुभव देता है। राहत जी के दिलों से निकली शायरी  का  महफ़िल में एक अलग ही जादू वहां बैठे लोगों के ऊपर चलते रहता है। 

उनको अगर क्रिकेट की भाषा में बताऊ तो राहत फ़तेह जी मुशायरों के ऐसे आलराउंडर हैं जिन्हें आप किसी भी क्रम पर खिला दो , वे बाज़ी अपने टीम के पक्ष में ही  कर देते हैं। मानो जैसे ही वह माइक पकड़ते हैं ऐसा लगता है कि  उनका माईक पर होना लोगों के ज़िन्दगी का होना होता है। यही अहसास उनके हर प्रशंसक  को बार-बार मिलता है कि राहत जी  हम लोगों के सामने हैं  और सबसे अच्छी शायरी सिर्फ इस वक़्त सुनी जा रही है।



प्रारम्भिक जीवन ( Rahat Indori Birth, Mother, Father, Brother & Sister)- 

दोस्तों  शायरी  के बादशाह राहत इंदौरी का जन्म 1 जनवरी 1950 को इंदौर, मध्य प्रदेश में हुआ था। उनके पिता का नाम रफ्तुल्लाह कुरैशी  जोकि कपड़ा मिल के कर्मचारी थे वहीँ  उनकी माता का नाम मकबूल उन निशा बेगम था। रहत जी ने अपने जीवन में दो शादियाँ  की। उनकी दोनों पत्नियों के नाम अंजुम रहबर (1988-1993) एवं  सीमा राहत है। उनके का नाम फ़ैसल राहत, सतलज़ राहत तथा उनकी एकमात्र बेटी का नाम शिब्ली इरफ़ान  है।


शिक्षा (Rahat Indori Education)-

रहत फ़तेह जी की  प्रारंभिक शिक्षा नूतन स्कूल इंदौर में हुई। इसके बाद उन्होंने इस्लामिया करीमिया कॉलेज इंदौर से 1973 में अपनी स्नातक की पढ़ाई पूरी की और 1975 में बरकत उल्लाह विश्वविद्यालय भोपाल से उर्दू साहित्य में एम.ए किया। उसके बाद सन 1985 में मध्य प्रदेश के मध्य प्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय से उर्दू साहित्य में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। इस प्रकार रहत फ़तेह जी का पढाई लिखाई बहोत अच्छे से हुई .

करियर-

जहाँ तक इनके कैरियर की बात है तो राहत इंदौरी जी अपने शुरुवाती कैरियर के रूप में  देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर में उर्दू साहित्य के प्राध्यापक भी रह चुके हैं। उन्होने महज 19 वर्ष की उम्र में उन्होने शेरो - शायरी  पेश करने शुरू कर दिये थे। भारत के साथ पूरी दुनिया में उनके शायरी  के बहुत से प्रसंशक  हैं. राहत इंदौरी ने कभी भी अपनी कला से राहत नहीं लीउनकी कविता की खुशबू ने उन्हें उर्दू साहित्य की दुनिया में एक अहम जगह दिलावा दी थी। यहीं से उनके प्रसिद्ध शायर होने का सफर शुरू हुआ था।


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राहत इन्दौरी जी के कुछ फ़िल्में एवं उनके प्रसिद्ध फ़िल्मी गीत-

1.आज हमने दिल का हर किस्सा (फ़िल्म- सर)

2.तुमसा कोई प्यारा कोई मासूम नहीं है (फ़िल्म- खुद्दार)

3.एम बोले तो मैं मास्टर (फ़िल्म- मुन्नाभाई एमबीबीएस)

4.धुंआ धुंआ (फ़िल्म- मिशन कश्मीर)

5.ये रिश्ता क्या कहलाता है (फ़िल्म- मीनाक्षी)

6.चोरी-चोरी जब नज़रें मिलीं (फ़िल्म- करीब)

7.देखो-देखो जानम हम दिल (फ़िल्म- इश्क़)

8.खत लिखना हमें खत लिखना (फ़िल्म- खुद्दार)

9.रात क्या मांगे एक सितारा (फ़िल्म- खुद्दार)

10.दिल को हज़ार बार रोका (फ़िल्म- मर्डर)

11.नींद चुरायी मेरी (फ़िल्म- इश्क़)

12.मुर्शिदा (फ़िल्म – बेगम जान)

प्रसिद्ध ग़ज़ल- 

अगर ख़िलाफ़ हैं होने दो जान थोड़ी है

ये सब धुआँ है कोई आसमान थोड़ी है

लगेगी आग तो आएँगे घर कई ज़द में

यहाँ पे सिर्फ़ हमारा मकान थोड़ी है

मैं जानता हूँ के दुश्मन भी कम नहीं लेकिन

हमारी तरहा हथेली पे जान थोड़ी है

हमारे मुँह से जो निकले वही सदाक़त है

हमारे मुँह में तुम्हारी ज़ुबान थोड़ी है

राहत इंदौरी एक भारतीय उर्दू शायर और हिंदी फिल्मों के गीतकार हैं। उनके चित्रकारी के  साइनबोड्र्स आज भी इंदौर के दुकानों में आराम से देखने को मिलते हैं।


शायरी एवं गजल से मिली प्रसिद्धि-

राहत इंदोरी जी ने शुरुआत में इंद्रकुमार कॉलेज, इंदौर में उर्दू साहित्य का अध्यापन कार्य शुरू कर दिया। बताया जाता है कि उनके छात्रों के अनुसार  राहत फ़तेह जी अपने कॉलेज में उन दिनों सबसे अच्छे व्याख्याता थे। अध्यापन के कुछ ही समय बाद  वो मुशायरों में बहुत व्यस्त हो गए और कुछ ही समय में वे लोगों के बीच इतने लोकप्रिय हो गए की उनको  पूरे भारत के साथ  विदेशों से निमंत्रण प्राप्त आना  शुरू हो गया और वे इस मौके को भुनाने में देर नहीं किया  और भारत के साथ विदेशों में भी अपने कॉन्सर्ट करना शुरू कर दिया। इस प्रकार उनकी क्षमता, कड़ी लगन और उनके भीतर शब्दों की कला की एक विशिष्ट शैली थी, जिसने जनता के बीच उन्हें अत्यन्त लोकप्रिय बना दिया।कुछ ही समय बाद  उनकी कविता की खुशबू ने उन्हें उर्दू साहित्य की दुनिया में एक अहम जगह दिला दी । दोस्तों बस यहीं से रहत फ़तेह जी के  प्रसिद्ध शायर होने का सफर शुरू हुआ था। अपने जीवन में  वे पढ़ाई के साथ- साथ खेलकूद में भी बहुत आगे  रहते थे। वे अपने स्कूल और कॉलेज के दिनों में फुटबॉल और हॉकी टीम के कप्तान भी रहे हैं। मात्र 19 वर्ष की उम्र में ही  उन्होंने पहली बार अपनी शायरी लोगों को  सुनाई थी।


चित्रकारी के शौक़ीन-  

दोस्तों  जहाँ तक रहत इन्दौरी  के परिवार की आर्थिक स्थिति की बात है तो  वह बहुत अच्छी नहीं थी और इनका शुरुआती जीवन काफी मुश्किलों भरा रहा उनका। उस समय उन्होंने अपने ही शहर में एक साइन-चित्रकार के रूप में 10 साल से भी कम उम्र में काम करना शुरू कर दिया था। दोस्तों आपको बता दें की  रहत इन्दौरी जी के जीवन में चित्रकारी उनकी रुचि के क्षेत्रों में से एक थी। वह कुछ ही समय में इंदौर के व्यस्ततम साइनबोर्ड चित्रकार बन गए। इसका प्रमुख कारण था  उनकी प्रतिभा जो की  असाधरण थी, साथ ही उन्हें रंगों और कल्पनाओं के बीच तालमेल की अच्छी समझ भी थी, यही वो बात जो उनको इतना जल्द ही कामयाब हो गए । यहां तक की लोगों ने उनके चित्रित बोर्ड को अपना बनाने  के लिए महीनों तक  इंतजार किया। आज भी उनके साइनबोड्र्स को इंदौर में 

आसानी से देखा जा सकता है।

 मृत्यु (Rahat Indori Death Cause)-

 बीते मंगलवार 11 अगस्त को राहत इंदौरी साहब (Rahat Indori Tweet) ने सोशल मीडिया पर खुद को पॉजिटिव होने की जानकारी दी थी। साथ ही कहा था कि मुझे और मेरे परिवार को कोई फोन नहीं करेगा।
उन्होंने ट्वीट में कहा था, कोविड के शरुआती लक्षण दिखाई देने पर कल मेरा कोरोना टेस्ट किया गया, जिसकी रिपोर्ट पॉज़िटिव आयी है। ऑरबिंदो हॉस्पिटल में एडमिट हूँ. दुआ कीजिये जल्द से जल्द इस बीमारी को हरा दूँ। एक और इल्तेजा है, मुझे या घर के लोगों को फ़ोन ना करें, मेरी ख़ैरियत ट्विटर और फेसबुक पर आपको मिलती रहेगी।
इसके बाद थोड़ी देर पहले ही उनके ट्विटर हैंडल से उनके इंतकाल का ऐलान किया गया। ट्वीट में लिखा, राहत साहब का Cardiac Arrest की वजह से आज शाम 05:00 बजे इंतेक़ाल हो गया है..... उनकी मग़फ़िरत के लिए दुआ कीजिये.
कई बीमारियों से जूझ रहे थे इंदौरी
उनके जानने वालों के द्वारा बताया जाता है की राहत इंदौरी को पहले से भी कई तरह की बीमारी थी। उन्होंने शुगर और हार्ट संबंधी बीमारियां भी थी। अरबिंदो अस्पताल के डॉक्टर विनोद भंडारी ने कहा है कि अस्पताल में भर्ती होने के बाद उन्हें 2 बार दिल का दौरा पड़ा था। उसके बाद उनकी स्थिति बिगड़ती गई। हम लोग उन्हें बचा नहीं सके। उन्हें 60 फीसदी निमोनिया था। डॉक्टरों ने कहा कि उन्हें पहले से निमोनिया था। डॉक्टर्स ने कहा कि उनका 70 प्रतिशत लंग खराब , कोविड पॉजीटिव, हाईपर टेशंन और डायबिटिक की दिक्कत थी।

उनकी कुछ बहुत प्रसिद्द  शायरी जो हमेशा लोगों के दिलों में रहकर उनकी यादें ताज़ा करती रहेगी -

1.रुला देगी मेरी शायरी तुम्हें 
   मुझे और थोड़ा मशहुर होने दो.


2. किसने दस्तक दी, दिल पे ये कौन है
    आप तो अन्दर हैं, बाहर कौन है.

3. सभी का ख़ून है शामिल यहाँ की मिट्टी में

    किसी के बाप का हिन्दोस्तान थोड़ी है.


4. जो आज साहिबे मसनद हैं कल नहीं होंगे

    किराएदार हैं ज़ाती मकान थोड़ी है.


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धन्यवाद्.  





1 comments so far

great article about rahat indori.


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