Saturday, 3 August 2019

कर्मफल | Result | what is result

नमस्कार  दोस्तों, जैसा कि हम सब जानते हैं कि हमारा  जीवन एक यात्रा है . हमारे  शरीर का अंत हो जाता है लेकिन आत्मा तत्व का नहीं . आत्मा तत्व प्रत्येक जन्म में अपनी यात्रा करता है . नया काया, नए माता- पिता, नयी जगह, नए नाम और पूर्व संस्कारो से प्राप्त कुछ विकारो को लेकर इस आत्म तत्व की यात्रा चलती रहती है.
कुछ गुण तो कुछ दुर्गुणों की मिलावट के साथ एक नयी यात्रा पुनः प्रारंभ होती है. इस सम्पूर्ण यात्रा में हमारा ध्येय सिर्फ कर्म करना है.
रामचरितमानस में तुलसीदास  जी ने कहा है कि, यह विश्व कर्म प्रधान है. इसलिए मनुष्य को कर्म करना ही है.
हर पल  कर्म करना है.
इस सन्दर्भ में ध्यान देने वाली बात यह है कि, जब हम कर्म नहीं करते तब  हमारी इन्द्रियां , मस्तिस्क और हमारी कल्पनाएं कार्य करती रहती हैं.
                               
समस्त शारीरिक एवं मानसिक कर्मो के अच्छे बुरे स्वरुप के कारण हमें शुभ  एवं अशुभ कर्मो का फल भोगना ही होगा.
प्रायश्चित करने से और कभी भी पाप न करने जी दृढ़ता पर अडिग रहने से हम कर्मफल के नकारात्मक प्रभाव से हम बच सकते हैं.
जैसा की हम सब जानते हैं कि, कर्म का फल अवश्य मिलता है , भले ही यह देर से मिले.जिस अनुपात में हम जैसा भी कर्म करते हैं,ठीक उसी अनुपात में हमें इसका फल भी मिलता है.
इस प्रकार हम जो भी कर्म करते हैं , उसका फल अवश्यम्भावी है. पूर्वकृत कर्म पीछा नहीं छोड़ते .
हमें किसी न किसी जन्म में इसे भोगना ही पड़ता है.
अपने किये गए कर्मो से ही प्रत्येक मनुष्य उठता है और गिरता भी है.
हम बचपन से ही यह कहावत सुनते आ रहे हैं , " बोया पेड़ बबूल का आम कैसे होय". 
फिर भी मानव अगर प्रयास करे तो वह अशुभ कर्मो से बच सकता है. वह ईश्वर से प्रार्थना कर वह अशुभ  कर्मो से बचने का  प्रयत्न कर सकता है.
वेदों का एक प्रमुख सार - तत्व है , हे ईश्वर हमें सब बुराइयों से दूर रख कर अच्छाइयो की तरफ पप्रवृत्त करो.
इस प्रकार संसार रूपी कर्मभूमि में हमें  सदा अच्छे कर्मो  को करने का प्रयास करना चाहिए .
इस प्रकार हम जब बार- बार प्रार्थना करेंगे एवं शुभ कार्यो को करने के लिए दृढ़ संकल्पित होंगे तो ईश्वर हमारा साथ अवश्य देंगे . इस स्थिति में हम हमेशा शुभ कार्य करेंगे .
इस प्रकार जब हम शुभ कार्य करेंगे तब इसका फल भी हमें शुभ ही मिलेगा . जब हम अपनी इस जीवन यात्रा को समाप्त कर  इस संसार से विदा लेंगे , तब  हमारे साथ कुछ न होगा . यदि कुछ होगा भी तो वे हमारे भले एवं बुरे कर्म ही होंगे , जिनका फल हमें निश्चित रूप से भोगना पड़ेगा .
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