Tuesday, 7 May 2019

क्रोध क्या है | What is Anger | what is anger in hindi | what is anger management

नमस्कार दोस्तों, आप सभी का एक बार फिर स्वागत है आपके अपने वेबसाइट पर,फ्रेंड्स आज के इस पोस्ट में हम आप सबको क्रोध यानि की गुस्सा के बारे में बताने वाले हैं.
फ्रेंड्स आप सबको अपने जीवन में क्रोध जरुर आया होगा. दोस्तों क्या आपको पता है की क्रोध 2 प्रकार का होता है.
हमें क्रोध क्यों आता है ?,यह हमारे जीवन के लिए किस तरह हानिकारक है और मज़े की बात यह है की कई बार सकारात्मक क्रोध हमारे लिए उपयोगी भी सिद्ध होता है. तो चलिए दोस्तों आपको बताते हैं की वास्तव में क्रोध है क्या ?
क्रोध को व्यक्ति का निजी शत्रु माना गया है, क्योकि कोई व्यक्ति जब क्रोधित होता है तो उस समय वह व्यक्ति  उसकी अग्नि में  स्वयं जलता है और उसकी बुद्धि नष्ट हो जाती है.
गोस्वामी तुलसीदास जी ने रामचरितमानस के सुंदरकांड अध्याय की चौपाई में  "काम क्रोध मद लोभ सब नाथ नरक के पंथ" के माध्यम से इस तरफ इंगित  भी किया गया है.
दूसरी तरफ भगवान बुद्ध ने क्रोध के सम्बन्ध में कहा है कि-
"क्रोध उस खौलते हुए जल के समान है जिसमें  क्रोधी व्यक्ति स्वयं अपनी ही परछाई नहीं देख पाता "
इस दृष्टि से देखा जाये तो  क्रोध की दिशा और दशा किस तरह की है इसको भी समझने की  जरूरत है. क्रोध का वर्गीकरण हम सकारात्मक तथा नकारात्मक दृष्टि से कर सकते हैं.
भगवान श्री  राम के वनवासी  जीवन पर नजर डालने से पता चलता  है कि, वह भी लोक हितार्थ (संसार के लोगों के कल्याण के लिए) विरोध करते हैं.
                                       

भाई के साथ ज्यादती के लिए बाली  पर तथा कई अन्य दैत्यों  के साथ दैत्य राज रावण पर भी क्रोध करते हैं ताकि भूमंडल पर ज्यादती करने वालों का अंत हो सके.
भगवान श्री राम लंका जाने के लिए समुद्र तट पर 3 दिन बैठते हैं और रास्ते के लिए समुद्र पर जब क्रोध  करते हैं तो समुद्र उनका स्वागत करता है.
भगवान श्री राम के तीर -धनुष निकालकर विरोध करते समुद्र उनके आरती करने लगता है. समुद्र भगवान श्रीराम के विनयशील स्वरूप की जगह उनके सैन्य स्वरूप पर प्रसन्न हो जाता है, क्योंकि जिस श्रीलंका में रावण वध के लिए वह जा रहे हैं, वहां विनय श्री राम की नहीं बल्कि सेना अध्यक्ष स्वरूप श्री राम की जरूरत है.
इसी प्रकार दोस्तों हम अपने दैनिक जीवन में देखें तो माता-पिता भी अपनी संतानों पर जो क्रोध करते हैं, उसका उद्देश्य बदला लेने का नहीं बल्कि बुराइयों को समाप्त कर अपने संतानों को गढ़ने  का होता है इसलिए यह सकारात्मक क्रोध या गुस्सा होता है.
जब कोई  व्यक्ति अपने अहंकार, प्रभुत्व या किसी को नीचा दिखाने के लिए अनर्गल गुस्सा या क्रोध  करता है तो वह नकारात्मक श्रेणी का क्रोध होता है.
इस तरह का क्रोध बदला लेने की प्रवृत्ति को जगाता है, तथा इस स्थिति में क्रोध  किसी व्यक्ति  की नस एवं नाड़ियों के जरिए मन मस्तिष्क में स्थाई रूप से डेरा जमा लेता है, जो कि बाद में विकृतियों को जन्म देता है.
क्योकि नस- नाड़ियों में दौड़ता क्रोध ही  नरक ले जाने का रास्ता है.
इसलिए किसी भी व्यक्ति को नकारात्मक गुस्सा करने  से बचना चाहिए तथा अपनों के व्यक्तित्व निर्माण के लिए सकारात्मक सोच किए जाने से किसी के भी जीवन में बुराइयों का अंत हो जाता है.
इस प्रकार सकारात्मक क्रोध समाज एवं मानवता  की रक्षा के लिए उपयुक्त भी होता है.
इस प्रकार हम कह सकते हैं कि, व्यक्तित्व निर्माण के लिए  किया गया क्रोध या गुस्सा बहुत लाभदायक भी सिद्ध होता है.
तो दोस्तों हमारा यह पोस्ट आपको कैसा लगा आप हमें कमेंट करके जरूर बताएं एवं इसी प्रकार के अध्यात्म से सम्बंधित  पोस्ट पढ़ने के लिए आप हमारे वेबसाइट www.kyakaisehai.com पर नियमित रूप से आते रहिए और का अगर आपको यह  पोस्ट  पसंद आई हो तो आप इस पोस्ट को अपने दोस्तों एवं रिश्तेदारों से शेयर जरूर कीजिए जिससे ज्यादा से ज्यादा लोग इस पोस्ट को पढ़ें और अपने जीवन में नकारात्मक क्रोध से मुक्ति पा सकें. धन्यवाद. 


EmoticonEmoticon