Tuesday, 7 May 2019

रमजान क्या है | रमजान क्या है इन हिंदी | what is the meaning of ramadan in hindi | what is ramadan in hindi

नमस्कार दोस्तों, आप सभी का एक बार फिर से स्वागत है आपके अपने वेबसाइट पर, दोस्तों रमजान का महिना शुरू हो चुका है और यह मुसलमानों का सबसे पवित्र महीना है, जैसा की आप सब जानते हैं की  यह महीना कई कारणों से विशिष्ट माना जाता है. क्योकि किसी  व्यक्ति के को  मुसलमान होने के लिए जिन पांच मूलभूत शिक्षा  को आवश्यक बताया गया है, उनमें एक रोजा भी है जो इसी महीने में रखा जाता है.
दोस्तों इस दुनिया के लगभग सभी  धर्मों में किसी न किसी रूप में उपवास का अपना एक अलग ही  महत्व है, ठीक उसी प्रकार रोजे का भी अपना एक महत्व यह है कि, यह व्यक्ति को अनुशासन और जिंदगी के मूल उद्देश्य की ओर  आने के लिए आमंत्रित करता है.
रोजा सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक केवल भूखे- प्यासे रहने का नाम नहीं है, बल्कि यह एक अभ्यास है कि वह एक रोज़ेदार को कैसे  साल के अन्य 11 महीने  अनुशासन और सत्य के रास्ते पर चलकर बिताएं. इसलिए कुरान -शरीफ में कहा गया है कि रोजा भूखे- प्यासे रहने से अधिक यह भी है कि आपके शरीर के किसी अंग और जुबान से किसी व्यक्ति  को किसी प्रकार का कोई दुख ना पहुंचे.
                                   
इसका मतलब यह है कि रोजा रखने वाला रोज़ेदार व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति को अपने हाथ से न तो किसी को किसी भी प्रकार से दुख न पहुंचाएं और पैर से चलकर किसी बुरे काम के लिए ना जाए, किसी को भी गलत नजर से नहीं देखे और ना ही अपनी जुबान से किसी को भी कुछ ऐसा कहे जो किसी के लिए दुखदायी हो.
यदि कोई कारोबारी है तो वह खरीददारों से धोखा ना करें और अगर कोई दुकानदार है तो वह कम नहीं तौले.
इन सब बातों से आशय यह है कि कोई भी रोजेदार रोजा रखकर किसी को भी किसी प्रकार से दुःख न  पहुंचाया जाए.
दोस्तों यह महीना इसलिए भी खास बन जाता है, क्योंकि इसमें गरीबों और जरूरतमंदों को दान करने का भी बड़ा महत्व बताया गया है.
कुरान-शरीफ के अनुसार इस पवित्र महीने में  कोई भी मुसलमान जिस के पास ढाई तोला सोना या उसके बराबर की धनराशि है और यह सोना या राशि उसके पास अगर  1 वर्ष से ज्यादा समय से है तो उसे इस्लाम में आदेश दिया गया है कि वह इसमें से ढाई प्रतिशत गरीबों पर खर्च करें.
दोस्तों इस रस्म को इस्लाम में  जकात कहते हैं.
मुसलमान होने के लिए जिन  मूलभूत शिक्षा को आवश्यक बताया गया है उनमें से जकात भी एक है, इसलिए देखा जा सकता है कि रमजान के महीने में मुसलमान खूब बढ़ चढ़कर दान देते हैं.
रमजान के महीने में मुस्लिम मोहल्लों और मस्जिदों के बाहर गरीब लोग मदद के लिएआसानी से देखे जा सकते हैं. इसलिए हम यह कह सकते हैं कि, रमजान का महिना सत्य के मार्ग पर चलने, गरीबों की मदद करने और अपने अंदर की बुराइयों को समाप्त करने का एक विशेष महीना है.
क्योकि  एक रोजेदार व्यक्ति भूखा एवं  प्यासा रहकर ही  गरीबों और वंचितों की स्थिति को अच्छी तरह समझ सकते हैं और अपनी शक्ति के अनुसार उनकी मदद भी कर सकते हैं यही  रोजे का सार्थक उद्देश्य है.
तो दोस्तों अब तो आपने भी जान लिया होगा कि रमजान के महीने से पहले रोजा रखने का  हमारे जीवन में क्यों उपयोगी  है एवं किस तरह हम  दीन- दुखियों की सहायता  करके हम अपने जीवन को सार्थक बना सकते हैं
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