Thursday, 23 May 2019

अजब गजब है आइसक्रीम का इतिहास I History of Ice cream

नमस्कार दोस्तों, आप सभी का एक बार फिर से स्वागत है आपके अपने वेबसाइट पर. फ्रेंड्स आज की इस पोस्ट में हम आपको बताने वाले हैं आइसक्रीम के अजीबो - गरीब इतिहास के बारे में.
दोस्तों आज के समय में आइसक्रीम बच्चे से लेकर बूढ़े सबको पसंद है,  पर क्या आप जानते हैं  की आइसक्रीम खाने की शुरुआत कहां से हुई है?  अगर इसका जवाब नहीं है, तो आप बने रहिए  हमारे इस पोस्ट पर.
दोस्तों किसी समय  सिर्फ गर्मियों में हमें लुभाने वाली  आइसक्रीम अब हर मौसम में हमें अपने तरफ आकर्षित कर रही है.अगर दुसरे शब्दों में कहें तो आज यह लगभग पुरे साल भर  के मैन्यू में होती है टॉप पर.क्या आप जानते हैं आइसक्रीम का रिश्ता हमारे साथ  सदियों पुराना है.
फ्रेंड्स इस पोस्ट में हम आप सब को आइसक्रीम से जुड़े कुछ रोचक चीजों के बारे में बताने जा रहे हैं.
                                 
आइसक्रीम का इतिहास-
फ्रेंड्स कुछ वर्ष पहले तक हर दिल को लुभाने वाली आइसक्रीम का उपयोग सिर्फ और सिर्फ गर्मियों के मौसम में होता था. लेकिन गर्मियों के अलावा इस खाद्य पदार्थ का उपयोग अन्य मौसमों में करने की कल्पना भी नहीं की जा सकती थी. मगर अब समय बदल चुका है और आज आइसक्रीम बड़े शौक से लगभग पूरे साल खाई जाती है. आज से सदियों पहले भी आइसक्रीम की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि, जब सन  1671 में पहली बार ब्रिटेन के शासक चार्ल्स-2  ने आइसक्रीम खाई तो वह इसके स्वाद के इतने दीवाने हो गए कि उन्होंने अपने आइसक्रीम बनाने वाले शेफ को इस रेसिपी को गुप्त रखने के लिए आजीवन पेंशन देना शुरू कर दिया.
प्रत्येक शाही व्यंजन में होती थी आइसक्रीम की उपस्थिति-
किस्से मशहूर हैं कि सिकंदर तथा नीरू भी आइसक्रीम के बड़े दीवाने थे. वे शहद तथा फूलों के शरबत से बनी आइसक्रीम खाते थे. वहीँ चीन के राजा तेंग  दूध से बनी आइसक्रीम खाना पसंद करते थे.
चीनी युवराज झांगहुई के मकबरे में सजी पेंटिंग इस बात के सुबूत पुख्ता करती है, जिसमें कुछ महिलाएं आइसक्रीम खा रही हैं. कहते हैं मार्कोपोलो नामक व्यापारी 12 वीं शताब्दी में पूर्वी देशों से इसकी रेसिपी को यूरोप में लाया था.
एक अन्य किस्सा यह भी है कि जब फ्रांस के राजा हेनरी-2  का इटली की राजकुमारी से विवाह हुआ तो राजकुमारी अपने साथ जायकेदार आइसक्रीम बनाने वाले एक शेफ को अपने साथ लायी  थी.
एक अन्य  जानकारी के अनुसार इंग्लैंड की एग्नेस मार्शल ने सन 1885 से 1894 तक आइसक्रीम रेसिपी पर 4 पुस्तकें लिख डाली थीं.जिसका परिणाम यह हुआ की इन पुस्तकों के द्वारा आइसक्रीम  की प्रसिद्धि चारों ओर फैल गई थी.
अजब गजब किस्से-
दोस्तों आज  बाजार में आइसक्रीम के कई फ्लेवर मौजूद हैं, लेकिन इसके आविष्कार की कहानियां भी कम रोचक नहीं है.
फ्रेंड्स आइसक्रीम का पहला लिखित रिकॉर्ड सीरिया का है, जहां 780 ईसा पूर्व पत्थर पर अंकित प्राचीन लिपि के अनुसार मारी के राजा ने बर्फ का एक घर बनवाया था और मजे की बात यह थी कि पहाड़ों से लाई गई इस बर्फ  के घर में बर्फ जमा दी  जाती थी.
पर्शियन लोग भी सर्दियों के मौसम में  बर्फ को बर्फ के घरों में ( जिसे स्थानीय भाषा में यखचल कहते हैं) में  साल भर संभाल कर रखते थे. पर्शियन भाषा में यख का मतलब होता है बर्फ तथा चल का मतलब गड्ढा होता है. कहा जाता है कि यह लोग फलों के रस को इन बर्फ  के घरों में जमा कर रखते थे.
भारत में अव्वल गुजरात-
जहां तक भारत की बात है तो आइसक्रीम की खपत के मामले में सबसे आगे हैं गुजराती, इसका एक बड़ा कारण यह है कि,गुजरात में आइसक्रीम वहाँ के लोगों के लिए  एक बड़ा जुनून बन गया है. क्योकि गुजराती लोग पारंपरिक मिठाइयों के उलट  भोजन के बाद मिठाई के रूप में आइसक्रीम खाना ही अधिक पसंद करते हैं, जिससे इस राज्य में आइसक्रीम की बहुत ज्यादा खपत है.
विभिन्न प्रकार के लजीज  फ्लेवर भी डिमांड में-
बात अगर आइसक्रीम के फ्लेवर की करें तो अहमदाबाद में बिकने वाली पान के पत्तों में लिपटी मसालेदार आइसक्रीम चांदी के वर्क, आम के गूदे, ताजे अदरक के रस, ड्राइफ्रूट्स , कस्तूरी, पनीर, मूंगफली, शिमला मिर्च, लाल मिर्च, ग्रीन टी और गुलाब की पंखुड़ियों के स्वाद वाली वैराइटीज निश्चित ही आपको चौंका देगी.
कुछ वर्ष  पहले जब बिल क्लिंटन भारत में आए थे तब उन्हें आम और बर्फ वाली आइसक्रीम बहुत पसंद आई थी. दोस्तों मुंबई, हैदराबाद तथा अहमदाबाद में है गोल्ड प्लेटेड आइसक्रीम के स्टोर.
फ्रेंड्स क्या आप जानते हैं कि अमेरिका के तीसरे राष्ट्रपति थॉमस जेफरसन आइसक्रीम के बहुत बड़े प्रशंसक थे. इसका उदाहरण उन्होंने उनकी लिखी वनीला आइसक्रीम की रेसिपी आज भी मौजूद है लाइब्रेरी आफ कांग्रेस में.
आइसक्रीम फ्लेवर की रेस में सबसे आगे है वनीला उसके बाद चॉकलेट एवं स्ट्रॉबेरी वगैरह फ्लेवर पसंद किए जाते हैं.
तुर्की में एक खास किस्म की आइसक्रीम बहुत लोकप्रिय है जो दूसरी आइसक्रीम की तरह जल्दी पिघलती नहीं बल्कि बंधी रहती है. इसे यह खूबी मिलती है इस में मिलाए जाने वाले ऑर्किड  से.
विश्व की सबसे महंगी आइसक्रीम का नाम है एबसरडीटी संडे जिसकी कीमत $60,000 अमेरिकी डॉलर है. मजे की बात यह  है की इस आइसक्रीम के साथ एक हॉलीडे पैकेज भी मिलता है.
एक और आइसक्रीम की वैरायटी है जिसका नाम है सेरेंडीपीटी जिसकी कीमत $25,000 अमेरिकी डॉलर है. फ्रेंड्स इस आइसक्रीम फ्रोजन हॉट चॉकलेट को सोने की कटोरी में परोसा जाता है, साथ ही बेस पर सफेद डायमंड लगा होता है.
आइसक्रीम खाने के फायदे-
1. कैल्शियम से भरपूर होने के कारण आइसक्रीम हड्डियों को पोषण तो देता ही है साथ ही मुंह के छालों से भी यह आराम दिलाता है. दांत निकलवाने के बाद डेंटिस्ट आइसक्रीम खाने की सलाह भी देते हैं.
2. शारीरिक थकान हो या बोझिल माहौल इससे उबरने में आइसक्रीम बहुत ही सहायक होती है.
3. दूध, शक्कर, मेवों  तथा फलों से बनी आइसक्रीम शरीर में ऊर्जा उत्पन्न करती है जिससे शरीर को विटामिन ए, बी, सी, डी तथा मिनरल्स  की संपूर्ण खुराक मिलती रहती है.
4. आइसक्रीम बिगड़े मूड को  शांत करने का एक  बेहतरीन उपाय भी है.
तो दोस्तों अब तो आपने आइसक्रीम से संबंधित बहुत सी बातों के बारे में जान लिया होगा और यह पोस्ट आपको कैसा लगा आप हमें कमेंट करके जरूर बताएं.
दोस्तों अगर यह पोस्ट आपको अच्छी लगी हो तो इस पोस्ट को आप अपने दोस्तों एवं रिश्तेदारों को शेयर करना ना भूलें , जिससे ज्यादा से ज्यादा लोग इस पोस्ट को पढ़ सकें. धन्यवाद.


Saturday, 11 May 2019

गर्मी के दिनों में खास है प्याज

नमस्कार दोस्तों, एक बार फिर से स्वागत है आप सबका आपके अपने वेबसाइट पर. फ्रेंड्स अब मई का महीना शुरू हो गया है एवं इस महीने में दोपहर के वक्त लू चलता है. क्या आपको पता है कि प्याज हमें लू से काफी हद तक बचाता है.
आज प्याज का प्रयोग गांवों से लेकर महानगरों तक खूब किया जाता है, क्योंकि यह अपने अंदर रोग नाशक शक्ति  को समाहित कर हमारे स्वास्थ्य की रक्षा करने में भी सक्षम है.
दोस्तों नीचे दिए गए कुछ टिप्स  को अपनाकर आप गरमी एवं अन्य  दिनों में अपने  आप को स्वस्थ रख सकते हैं, तो चलिए शुरू करते हैं-
1. सिर के गंजेपन के लिए प्याज का रस शहद में मिलाकर उंगली की सहायता से धीरे-धीरे सिर पर मलें. इसे एक घंटा रहने दे और फिर सिर धो लें. ऐसा करने से गंजेपन से काफी लाभ मिलेगा.
                             
2. सेंधा नमक व  काली मिर्च में पूरे प्याज का रस मिलाकर दाद  पर लगाना बहुत ही लाभकारी सिद्ध होता है.
3. खट्टी डकार आने पर भूने  प्याज का रस निकालकर उसमें जरा सा नमक मिलाकर दिन में दो बार लेना हितकारी होता है. पेट के कीड़ों से परेशान व्यक्ति को इसके रस  में सेंधा नमक मिलाकर 2-2 चम्मच दो बार  देने से लाभ पहुंचता है
4. प्याज को मिक्सी में पीसकर उसका इसका लेप पांव के तलवों पर लगाएं एवं  लू से होने वाले सिर दर्द में इस के टुकड़े करके सूंघ ले.ऐसा करने से लू से छुटकारा मिलेगा.
5. रूसी और जू से छुटकारा पाने के लिए प्याज का रस सिर में लगाएं और 1 घंटे बाद सिर धो लें.
6. बहरेपन में सफेद प्याज को कसकर कान मे डालना गुणकारी है.
7. भोजन  के साथ प्याज खाने से इंसुलिन का स्तर सामान्य रहता है.
8. पाचन संबंधी विकारों में प्याज का सेवन करना काफी हितकारी है. गुड हमारे कोलेस्ट्रॉल का स्तर नियमित रखने में भी प्याज का रस बहुत सहायक सिद्ध होता है.
9. पेट में होने वाली पथरी के लिए भी प्याज, लहसुन, महुआ और सहजन की छाल सब को मिलाकर घोटकर पित्ताशय पर लेप लगाना हितकारी होता है.
10. जहरीला कीड़ा काटने पर प्याज को पीसकर लगाने और दो- दो चम्मच रस पीना लाभकारी होता है.
11. प्याज के रस में सरसों का तेल मिलाकर घुटनों पर मले इससे दर्द से छुटकारा मिलेगी.
12. लू से बचने के लिए घर से बाहर निकलते समय प्याज को जेब में रखें या कच्चा  प्याज खाकर धूप में निकलें धूप का असर कम होगा.
13. नाक से  खून आने पर प्याज के रस की दो बूंदे नाक में डालें इससे तुरंत लाभ मिलेगा.
तो दोस्तों अब तो आपने भी जान लिया होगा की प्याज हमारे जीवन में कितना उपयोगी एवं लाभकारी है. खासकर गर्मी के महीनों में, तो आज से ही आप भी अपने दैनिक जीवन में प्याज का उपयोग सब्जियों एवं सलाद के रूप में करना शुरू कर दीजिए.
दोस्तों आज का हमारा यह पोस्ट आपको कैसा लगा आप कमेंट करके हमें जरुर बताइए एवं इसी प्रकार के मजेदार पोस्ट पढ़ने के लिए आप हमारे वेबसाइट www.kyakaisehai.com पर नियमित रूप से आते रहिए.
दोस्तों अगर यह पोस्ट आपको पसंद आई हो तो इस पोस्ट को आप अपने दोस्तों एवं रिश्तेदारों के साथ शेयर जरूर कीजिए जिससे ज्यादा से ज्यादा लोग प्याज के गुणों के बारे में जान सकें  और अपने दैनिक जीवन में इसका उपयोग करके अपने जीवन को स्वस्थ बना सकें. धन्यवाद. 

इन नुस्खों को आजमाकर बनाएं चमकती त्वचा

नमस्कार दोस्तों, आपका एक बार फिर से स्वागत करते हैं आपके अपने वेबसाइट पर फ्रेंड्स  पौष्टिक  आहार की कमी सूरज की तीखी किरणें और अत्यधिक प्रदूषण हमारी त्वचा को खराब करते हैं, आज के इस पोस्ट में हम आप सबको कुछ नुश्खों के बारे में बताने वाले हैं की कैसे आप अपने त्वचा को चमकदार एवं खुबसूरत  बना सकते हैं.
फ्रेंड्स आज के समय में स्वस्थ और चमकती त्वचा हर व्यक्ति का ख्वाब होता है, लेकिन खूबसूरत और स्वस्थ शरीर पाना कोई आसान बात नहीं है.
दोस्तों आप एक छात्र,गृहिणी  या चाहे  कामकाजी व्यक्ति ही क्यों ना हो लेकिन आपके लिए एक स्वस्थ एवं खूबसूरत त्वचा होना बहुत मायने रखता है, जो हमें सुन्दर दिखने के साथ-साथ हमारे आत्मविश्वास को बढ़ाने में मदद करता है.
हालांकि बाजार में आज अनगिनत उत्पाद उपलब्ध है जो बहुत महंगे भी होते हैं, लेकिन कई घरेलू नुश्खों  को आजमा कर हम अपनी त्वचा को खूबसूरत एवं चमकदार बना सकते हैं.
फ्रेंड्स हमारी  त्वचा बहुत नाजुक होता है और हानिकारक रसायनों का इस्तेमाल हमारी त्वचा के लिए अच्छा नहीं होता है.
तनावपूर्ण जीवन शैली, व्यस्त दिनचर्या, अपर्याप्त नींद,पौष्टिक आहार की कमी, सूर्य की किरणें और अत्यधिक प्रदूषण हमारी त्वचा को खराब करते हैं जिसके कारण घर में प्राकृतिक सामग्रियों से बने सौंदर्य उत्पाद ही  एकमात्र प्राकृतिक विकल्प है.
दोस्तों नीचे कुछ नुश्खे बताये गए हैं जिससे हम अपने त्वचा को  चमकदार एवं खूबसूरत बना सकते हैं.
1. शहद-
शहद का सेवन आंतरिक और बाहरी दोनों तरफ से किया जा सकता है. रूखी त्वचा और कांबिनेशन त्वचा के लिए एक चम्मच शहद से प्रतिदिन मालिश करें और इसे लगभग 10 मिनट के लिए त्वचा पर  लगाकर छोड़ दें और फिर साफ पानी से अच्छी तरह धो लें. इससे आपकी त्वचा को ना केवल मुलायम  होगी बल्कि आकर्षक भी दिखाई देगी.
                                         
2. एलोवेरा- एलोवेरा कुपोषित त्वचा के लिए बेहतरीन होता है इसके जेल को मैश  करके अपने  त्वचा पर लगभग 5 मिनट  तक मालिश करें और इसके बाद 10 मिनट तक अपनी त्वचा पर लगाकर छोड़  दें फिर ठंडे पानी से धो लें. यह त्वचा से मृत कोशिकाओं को बाहर निकालकर उसे जीवंत करता है.
दोस्तों एलोवेरा की एक खास बात यह है कि यह  हर प्रकार की त्वचा के लिए फायदेमंद साबित होता है.
एलोवेरा विशेष रूप से गर्मियों में सूर्य की हानिकारक यूवीए एवं यूवीबी किरणों से हमारे त्वचा को बचाता है.
3. जैतून- जैतून हमारी त्वचा और सेहत दोनों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह  विटामिंस का एक बेहतर स्त्रोत है.
तीन से चार जैतून को अच्छी तरह से मसल कर अपने  त्वचा पर समान रूप से लगाएं और सूखने तक इसे  यूँ  ही छोड़ दें. अब सूखने  के पश्चात ठंडे पानी से अपने त्वचा को धो लें.
यह  एंटी एजिंग गुण और हाइड्रेटिंग स्क्वैलिन से भरा होता है, जिससे यह नाखूनों के साथ-साथ बालों और त्वचा के स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभदायक होता है.
4.केला- केला पौष्टिक होने के साथ-साथ एक अच्छे moisturizer का भी काम करता है. एक पके केले को मसल  लें और अब इसे  हल्के हाथों से अपने त्वचा पर मसाज करें.केले में भरपूर मात्रा में पोटैशियम, विटामिन-C और विटामिन-A पाया जाता है. 
5. अंजीर- दो अंजीर लें और उसे थोड़े से दूध के साथ मैश करें. अब इसे 1 से 2 मिनट के लिए अपने चेहरे पर हल्के हाथों से मसाज करें.
यह उपाय ना केवल  हमारी त्वचा  से सभी विषैले पदार्थों को हटाने में मदद करेगा बल्कि हमारे त्वचा  को बेहतर चमक भी प्रदान करेगा.
अंजीर प्राकृतिक रूप से हमारी त्वचा को स्वस्थ रखने में मदद करता है. फ्रेंड्स ध्यान रहे कि यह आपकी त्वचा के अनुरूप हो.
6. चीनी- चीनी बेहतर तरीके से हमारे  त्वचा को कोमल एवं आकर्षक बनाती है. इसके लिए चीनी को दही,ताजी क्रीम या मलाई के साथ मिलाएं और हल्के हाथों से धीरे-धीरे पूरे त्वचा  पर  मालिश करें. अब  इसे 10 मिनट के लिए त्वचा पर लगा कर छोड़ दें इसके बाद उसे ठंडे पानी से धो ले.
तो दोस्तों हमारा आज का यह पोस्ट आपको कैसा लगा आप हमें कमेंट के माध्यम से जरूर बताएं एवं इसी प्रकार के अन्य पोस्ट पढ़ने के लिए आप हमारे वेबसाइट www.kyakaisehai.com पर नियमित रूप से विजिट करते रहिए.
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Wednesday, 8 May 2019

तांबे के बर्तन के औषधीय गुण

नमस्कार दोस्तों, आप सभी का एक बार फिर से स्वागत है आपके अपने वेबसाइट पर. फ्रेंड्स  आज के इस पोस्ट में हम आप सबको कॉपर यानी कि तांबे के बर्तन के औषधिय  गुण के बारे में बताने वाले हैं,क्योंकि आज के बढ़ते प्रदूषण एवं  बदलती दिनचर्या  हमारे स्वास्थ्य को कई तरह से नुकसान पहुंचा सकता है.
लेकिन तांबे के बर्तन के इस्तेमाल से हम काफी हद तक बीमारियों से अपने आप को बचा सकते हैं, तो चलिए शुरू करते हैं-
दोस्तों तांबा यानि  कापर  के बर्तन में रखा पानी सीधे तौर पर हमारे  शरीर में कॉपर की कमी को पूरा करता है और बीमारी पैदा करने वाले जीवाणुओं से हमारे शरीर की रक्षा कर पूरी तरह से हमें स्वस्थ बनाए रखने में सहायक सिद्ध होता है.
1. एनीमिया की समस्या होने पर तांबे के बर्तन में रखा पानी काफी लाभदायक होता है, यह भोज्य पदार्थों से आयरन को आसानी से सोख लेता है जो एनीमिया से निपटने के लिए बेहद जरूरी होता है.
2. प्राचीन ग्रंथों के अनुसार तांबे के बर्तन में रखा पानी पूरी तरह से शुभ माना जाता है. यह सभी प्रकार के बैक्टीरिया को खत्म कर देता है जो डायरिया, पीलिया, पेचिस और अन्य प्रकार की बीमारियों को पैदा करते हैं उनसे हमारे शरीर की रक्षा करता है.
3. तांबे में भरपूर मात्रा में मौजूद मिनरल्स थायराइड की समस्या को दूर करने में सहायक होते हैं जोकि हमारे शरीर के लिए बहुत लाभदायक है.
                                               
4. तांबे में एंटी इन्फ्लेमेटरी गुण होने के कारण शरीर में दर्द और सूजन की समस्या नहीं होती एवं आर्थराइटिस की समस्या से निबटने में भी तांबे के बर्तन में पानी पीना काफी फायदेमंद सिद्ध होता है.
5. तांबे के बर्तन में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट कैंसर से लड़ने की क्षमता को बढ़ाते हैं. अमेरिकन कैंसर सोसायटी के अनुसार तांबे के बर्तन में रखा पानी कैंसर की शुरुआत को रोकने में मदद करता है और इसमें कैंसर विरोधी तत्व मौजूद होते हैं.
6. पेट से संबंधित सभी प्रकार की समस्याओं में तांबे के बर्तन में रखा पानी बेहद फायदेमंद होता है इसका प्रयोग करने से पेट दर्द, गैस, एसिडिटी और कब्ज जैसी परेशानियों से छुटकारा  मिल जाती है.
7. शरीर की आंतरिक सफाई के लिए तांबे के बर्तन में रखा पानी बहुत ही कारगर सिद्ध होता है. इसके अलावा यह हमारे लीवर और किडनी को भी स्वस्थ रखने में सहायता करता है.
8. तांबे के बर्तन का एक और महत्वपूर्ण फायदा यह है कि यह  किसी भी प्रकार के इंफेक्शन से निपटने में तांबे के बर्तन में रखा पानी बहुत ही लाभदायक होता है.
9. यह दिल को स्वस्थ बनाए रखकर ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करता  है एवं  खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करता है इसके अलावा यह हार्ट-अटैक के खतरे को भी काफी कम करता है. यह वात, पित्त और कफ की शिकायत को दूर करने में मदद करता है.
10. तांबा  अपने एंटी बैक्टीरियल, एंटी वायरल और एंटी इन्फ्लेमेटरी गुणों के लिए भी जाना जाता है जो शरीर के आंतरिक घाव को जल्दी भरने के लिए काफी फायदेमंद साबित होता है.
तो दोस्तों अब तो आपने भी कापर यानी कि तांबे के औषधिय  गुण के बारे में काफी कुछ जान लिया होगा तो क्यों ना आप सब आज से ही अपने दैनिक जीवन में  तांबे के बर्तन का प्रयोग करना शुरू कर दीजिए  जिससे हम काफी बीमारियों से अपने आप को बचाकर  एक अच्छा एवं स्वस्थ जीवन जी  सकते हैं.
दोस्तों आज का हमारा यह पोस्ट आपको कैसा लगा आप हमें कमेंट करके जरूर बताइए एवं इसी प्रकार के अन्य मज़ेदार पोस्ट पढ़ने के लिए आप हमारे वेबसाइट www.kyakaisehai.com पर नियमित नियमित रूप से विजिट करते रहिए.धन्यवाद.
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Tuesday, 7 May 2019

क्रोध क्या है | What is angry..

नमस्कार दोस्तों, आप सभी का एक बार फिर स्वागत है आपके अपने वेबसाइट पर,फ्रेंड्स आज के इस पोस्ट में हम आप सबको क्रोध यानि की गुस्सा के बारे में बताने वाले हैं.
फ्रेंड्स आप सबको अपने जीवन में क्रोध जरुर आया होगा. दोस्तों क्या आपको पता है की क्रोध 2 प्रकार का होता है.
हमें क्रोध क्यों आता है ?,यह हमारे जीवन के लिए किस तरह हानिकारक है और मज़े की बात यह है की कई बार सकारात्मक क्रोध हमारे लिए उपयोगी भी सिद्ध होता है. तो चलिए दोस्तों आपको बताते हैं की वास्तव में क्रोध है क्या ?
क्रोध को व्यक्ति का निजी शत्रु माना गया है, क्योकि कोई व्यक्ति जब क्रोधित होता है तो उस समय वह व्यक्ति  उसकी अग्नि में  स्वयं जलता है और उसकी बुद्धि नष्ट हो जाती है.
गोस्वामी तुलसीदास जी ने रामचरितमानस के सुंदरकांड अध्याय की चौपाई में  "काम क्रोध मद लोभ सब नाथ नरक के पंथ" के माध्यम से इस तरफ इंगित  भी किया गया है.
दूसरी तरफ भगवान बुद्ध ने क्रोध के सम्बन्ध में कहा है कि-
"क्रोध उस खौलते हुए जल के समान है जिसमें  क्रोधी व्यक्ति स्वयं अपनी ही परछाई नहीं देख पाता "
इस दृष्टि से देखा जाये तो  क्रोध की दिशा और दशा किस तरह की है इसको भी समझने की  जरूरत है. क्रोध का वर्गीकरण हम सकारात्मक तथा नकारात्मक दृष्टि से कर सकते हैं.
भगवान श्री  राम के वनवासी  जीवन पर नजर डालने से पता चलता  है कि, वह भी लोक हितार्थ (संसार के लोगों के कल्याण के लिए) विरोध करते हैं.
                                       

भाई के साथ ज्यादती के लिए बाली  पर तथा कई अन्य दैत्यों  के साथ दैत्य राज रावण पर भी क्रोध करते हैं ताकि भूमंडल पर ज्यादती करने वालों का अंत हो सके.
भगवान श्री राम लंका जाने के लिए समुद्र तट पर 3 दिन बैठते हैं और रास्ते के लिए समुद्र पर जब क्रोध  करते हैं तो समुद्र उनका स्वागत करता है.
भगवान श्री राम के तीर -धनुष निकालकर विरोध करते समुद्र उनके आरती करने लगता है. समुद्र भगवान श्रीराम के विनयशील स्वरूप की जगह उनके सैन्य स्वरूप पर प्रसन्न हो जाता है, क्योंकि जिस श्रीलंका में रावण वध के लिए वह जा रहे हैं, वहां विनय श्री राम की नहीं बल्कि सेना अध्यक्ष स्वरूप श्री राम की जरूरत है.
इसी प्रकार दोस्तों हम अपने दैनिक जीवन में देखें तो माता-पिता भी अपनी संतानों पर जो क्रोध करते हैं, उसका उद्देश्य बदला लेने का नहीं बल्कि बुराइयों को समाप्त कर अपने संतानों को गढ़ने  का होता है इसलिए यह सकारात्मक क्रोध या गुस्सा होता है.
जब कोई  व्यक्ति अपने अहंकार, प्रभुत्व या किसी को नीचा दिखाने के लिए अनर्गल गुस्सा या क्रोध  करता है तो वह नकारात्मक श्रेणी का क्रोध होता है.
इस तरह का क्रोध बदला लेने की प्रवृत्ति को जगाता है, तथा इस स्थिति में क्रोध  किसी व्यक्ति  की नस एवं नाड़ियों के जरिए मन मस्तिष्क में स्थाई रूप से डेरा जमा लेता है, जो कि बाद में विकृतियों को जन्म देता है.
क्योकि नस- नाड़ियों में दौड़ता क्रोध ही  नरक ले जाने का रास्ता है.
इसलिए किसी भी व्यक्ति को नकारात्मक गुस्सा करने  से बचना चाहिए तथा अपनों के व्यक्तित्व निर्माण के लिए सकारात्मक सोच किए जाने से किसी के भी जीवन में बुराइयों का अंत हो जाता है.
इस प्रकार सकारात्मक क्रोध समाज एवं मानवता  की रक्षा के लिए उपयुक्त भी होता है.
इस प्रकार हम कह सकते हैं कि, व्यक्तित्व निर्माण के लिए  किया गया क्रोध या गुस्सा बहुत लाभदायक भी सिद्ध होता है.
तो दोस्तों हमारा यह पोस्ट आपको कैसा लगा आप हमें कमेंट करके जरूर बताएं एवं इसी प्रकार के अध्यात्म से सम्बंधित  पोस्ट पढ़ने के लिए आप हमारे वेबसाइट www.kyakaisehai.com पर नियमित रूप से आते रहिए और का अगर आपको यह  पोस्ट  पसंद आई हो तो आप इस पोस्ट को अपने दोस्तों एवं रिश्तेदारों से शेयर जरूर कीजिए जिससे ज्यादा से ज्यादा लोग इस पोस्ट को पढ़ें और अपने जीवन में नकारात्मक क्रोध से मुक्ति पा सकें. धन्यवाद. 

क्यों रखते हैं रोज़ा | केवल भूखे- प्यासे रहने का नाम नहीं है रोजा | Ramdan Special

नमस्कार दोस्तों, आप सभी का एक बार फिर से स्वागत है आपके अपने वेबसाइट पर, दोस्तों रमजान का महिना शुरू हो चुका है और यह मुसलमानों का सबसे पवित्र महीना है, जैसा की आप सब जानते हैं की  यह महीना कई कारणों से विशिष्ट माना जाता है. क्योकि किसी  व्यक्ति के को  मुसलमान होने के लिए जिन पांच मूलभूत शिक्षा  को आवश्यक बताया गया है, उनमें एक रोजा भी है जो इसी महीने में रखा जाता है.
दोस्तों इस दुनिया के लगभग सभी  धर्मों में किसी न किसी रूप में उपवास का अपना एक अलग ही  महत्व है, ठीक उसी प्रकार रोजे का भी अपना एक महत्व यह है कि, यह व्यक्ति को अनुशासन और जिंदगी के मूल उद्देश्य की ओर  आने के लिए आमंत्रित करता है.
रोजा सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक केवल भूखे- प्यासे रहने का नाम नहीं है, बल्कि यह एक अभ्यास है कि वह एक रोज़ेदार को कैसे  साल के अन्य 11 महीने  अनुशासन और सत्य के रास्ते पर चलकर बिताएं. इसलिए कुरान -शरीफ में कहा गया है कि रोजा भूखे- प्यासे रहने से अधिक यह भी है कि आपके शरीर के किसी अंग और जुबान से किसी व्यक्ति  को किसी प्रकार का कोई दुख ना पहुंचे.
                                   
इसका मतलब यह है कि रोजा रखने वाला रोज़ेदार व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति को अपने हाथ से न तो किसी को किसी भी प्रकार से दुख न पहुंचाएं और पैर से चलकर किसी बुरे काम के लिए ना जाए, किसी को भी गलत नजर से नहीं देखे और ना ही अपनी जुबान से किसी को भी कुछ ऐसा कहे जो किसी के लिए दुखदायी हो.
यदि कोई कारोबारी है तो वह खरीददारों से धोखा ना करें और अगर कोई दुकानदार है तो वह कम नहीं तौले.
इन सब बातों से आशय यह है कि कोई भी रोजेदार रोजा रखकर किसी को भी किसी प्रकार से दुःख न  पहुंचाया जाए.
दोस्तों यह महीना इसलिए भी खास बन जाता है, क्योंकि इसमें गरीबों और जरूरतमंदों को दान करने का भी बड़ा महत्व बताया गया है.
कुरान-शरीफ के अनुसार इस पवित्र महीने में  कोई भी मुसलमान जिस के पास ढाई तोला सोना या उसके बराबर की धनराशि है और यह सोना या राशि उसके पास अगर  1 वर्ष से ज्यादा समय से है तो उसे इस्लाम में आदेश दिया गया है कि वह इसमें से ढाई प्रतिशत गरीबों पर खर्च करें.
दोस्तों इस रस्म को इस्लाम में  जकात कहते हैं.
मुसलमान होने के लिए जिन  मूलभूत शिक्षा को आवश्यक बताया गया है उनमें से जकात भी एक है, इसलिए देखा जा सकता है कि रमजान के महीने में मुसलमान खूब बढ़ चढ़कर दान देते हैं.
रमजान के महीने में मुस्लिम मोहल्लों और मस्जिदों के बाहर गरीब लोग मदद के लिएआसानी से देखे जा सकते हैं. इसलिए हम यह कह सकते हैं कि, रमजान का महिना सत्य के मार्ग पर चलने, गरीबों की मदद करने और अपने अंदर की बुराइयों को समाप्त करने का एक विशेष महीना है.
क्योकि  एक रोजेदार व्यक्ति भूखा एवं  प्यासा रहकर ही  गरीबों और वंचितों की स्थिति को अच्छी तरह समझ सकते हैं और अपनी शक्ति के अनुसार उनकी मदद भी कर सकते हैं यही  रोजे का सार्थक उद्देश्य है.
तो दोस्तों अब तो आपने भी जान लिया होगा कि रमजान के महीने से पहले रोजा रखने का  हमारे जीवन में क्यों उपयोगी  है एवं किस तरह हम  दीन- दुखियों की सहायता  करके हम अपने जीवन को सार्थक बना सकते हैं
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