Thursday, 21 January 2021

महान एथलीट टेरी फॉक्स का जीवन परिचय हिंदी में | Terry Fox Biography in Hindi

नमस्कार दोस्तों, कनाडा के महान व्यक्तित्व  टेरी फॉक्स को दुनिया एक एथलीट एवं  कैंसर अनुसंधान कार्यकर्ता के रूप में उनके नि:स्वार्थ समर्पण के लिए जानती है.
टेरेंस स्टेनली फॉक्स का जन्म 28 जुलाई, 1958 को विन्निपेग, मैनिटोबा रोलैंड फॉक्स में हुआ था। फॉक्स  अपने परिवार में तीन भाई-बहनों के साथ बड़े हुए और उनके अन्दर बचपन से ही  सदाचार एवं शिष्टाचार जैसे गुण विद्यमान थे.

टेरी फॉक्स को बचपन से ही खेलो से गहरा लगाव पैदा हो गया था, विशेषकर बास्केटबॉल के प्रति उनके अन्दर जबर्दस्त  जुनून था। शुरू - शुरू में जब वे बास्केटबाल खेलने के लिए मैदान में जाते लेकिन उनके कोच उन्हें ज्यादातर  बास्केटबॉल खेलने के स्थान पर मैदान में दौड़ने के लिए कहते और इस पर टेरी कुछ नहीं बोलते और फॉक्स अपने कोच के आज्ञा का पालन किया करते थे. 

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इस प्रकार वे घंटों मैदान का तब तक चक्कर लगाते रहते थे जब तक की वह पूरी तरह थक न जाते. उनके जीवन की एक और बात यह है की  टेरी फॉक्स अपनी पूरी गर्मियों की छुट्टियों को खेलों और अभ्यास करने में बिताते, इस तरह वो खेल की दुनिया के प्रति पुरे तन - मन से लग जाते .

टेरी के बारे में एक बात यह भी था की  फॉक्स की  ऊंचाई मात्र पांच फुट थी, जो की एक अच्छा बास्केटबाल खिलाड़ी बनने के लिए पर्याप्त नहीं था लेकिन टेरी के ऊपर तो बास्केटबाल का जूनून सवार था. क्योकि उन्होंने स्वयं से संकल्प कर लिया था की उसे एक दिन दुनिया को अपने कर्मो से महान बनकर दिखाना है. इस तरह  उनके इस सपने की शुरुवात अपने  हाई स्कूल बास्केटबॉल की टीम में जगह पाकर हुआ.
 
10 वीं  के बाद, उन्होंने  साइमन फ्रेजर यूनिवर्सिटी में एडमिशन  लिया, जहाँ पर जाकर उन्होंने 'कैनेियोलॉजी' की पढ़ाई की और यहाँ पर आकार उनकी चाहत एक  शारीरिक शिक्षा का  शिक्षक बनने की होने लगी।
अपने कॉलेज के दिनों यानि की  बारहवीं कक्षा में "सर्वश्रेष्ठ एथलीट" का खिताब  अपने नाम कर लिया। 


लेकिन  सन 1976 में अचानक उनके जिन्दगी में एक काला दिन भी आया जब घर लौटते समय टेरी फॉक्स एक पिकअप ट्रक से दुर्घटनाग्रस्त हो गए, और इस  दुर्घटना में उनका दायाँ पैर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका था.
इस तरह टेरी सिर्फ एक घायल घुटने के साथ जीवित रहा। इस एक्सीडेंट के बाद  उनके  घुटने में अक्सर  दर्द होने लगता लेकिन वे अपने खेलों के प्रति जूनून के आगे इस दर्द को भी अनदेखा कर देते और वह दर्द में भी खेलते. लेकिन एक दिन ऐसा भी आया जब उनके दाहिने पैर का  दर्द  असहनीय हो गया और उन्हें अस्पताल ले जाया गया जहां पर डॉक्टरों ने बताया की उन्हें ओस्टियोसारकोमा या रेयर बोन कैंसर नामक  बीमारी हो गया है।

इस स्थिति में उस समय डॉक्टरों ने उन्हें बताया कि उनको अपने पैर को कटवाना होगा और कीमोथेरेपी की प्रक्रिया से  गुजरना होगा साथ ही उनको यह भी बताया गया की इस प्रक्रिया के बाद उनके जीवित रहने की संभावना मात्र 50 प्रतिशत ही रह जाएगी ।

दोस्तों इतना सब सुनने के बाद अगर कोई आम इन्सान होता तो उसके दिलों -दिमाग  में  क्या चल रहा होता, इसकी कोई कल्पना भी करके सहम जाता . लेकिन दुनिया के सबसे महान एथलिटो में से एक टेरी उनमे से नहीं थे और उन्होंने डॉक्टरों की बात मानते हुए अपना दायाँ पैर कटवा लिया.
इस तरह अपने दाहिने पैर को कटवाने के मात्र तीन सप्ताह के भीतर ही, फॉक्स एक कृत्रिम पैर की सहायता से चलने लगे और कुछ दिनों के बाद जल्द ही अपनी पुराने दिनचर्या को फिर से शुरू कर दिये। 

अस्पताल में उपचार के दौरान वह अपनी इस बीमारी वाली  बात से बहुत ज्यादा  व्यथित हो गए और सिर्फ यह सोचते कि उनके देश में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में अभी तक कैंसर और इसके उपचार के ऊपर कितना कम शोध हुआ है।
इसी दौरान  उन्होंने डिक ट्रम के बारे में भी पढ़ा, जिन्होंने न्यू यॉर्क शहर के एक बड़े विवाद को कैसे खत्म किया था जिससे उनको काफी प्रेरणा मिली। 

दोस्तों  टेरी फॉक्स डीक ट्रम के कार्य से वे इतने प्रभावित हुए की इसने उन्हें कनाडा में एक "क्रॉस कंट्री मैराथन" की शुरुवात करने के लिए दृढ़ संकल्पित  कर दिया, ताकि इस मैराथन से प्राप्त चंदे  से कैंसर जैसे जानलेवा  रोग के ऊपर अनुसंधान करने के लिए पर्याप्त धनराशि प्राप्त की जा सके। 
इस प्रकार उन्होंने इसके लिए प्रशिक्षण लेना शुरू किया और जल्द ही 1980 में उन्होंने अपने मैराथन को शुरू किया, जिसे उन्होंने  "मैराथन ऑफ होप" नाम दिया। 
अपने जिंदगी के सबसे बड़े लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए उन्होंने "कनाडाई कैंसर सोसायटी" के साथ-साथ प्रायोजन के लिए कई कॉर्पोरेट फर्मों के समर्थन की घोषणा की।

इस तरह टेरी फॉक्स ने अपने  मैराथन की शुरुवात 'सेंट जॉन' से की और हर दिन लगभग 43 किमी तक दौड़े। शुरुआत में उनका सामना मिली- जुली  प्रतिक्रिया और कठोर मौसम के साथ हुई , लेकिन बाद में जब तक वह न्यूफ़ाउंडलैंड के पोर्ट औक्स बेसिक्स में पहुचते, तब तक उन्होंने 10,000 डॉलर से अधिक की धनराशि दान के रूप में प्राप्त कर चुके थे. जिससे उन्हें अपने सपने को पूरा करने एवं मैराथन को आगे भी जारी रखने के लिए काफी प्रेरणा मिली।




जब तक वह ओंटारियो के लिए रवाना होते , तब तक उनका पूरा देश उनके इस कार्य को पुरे दिल से सपोर्ट करने लगा और अब उन्हें एक राष्ट्रीय स्टार के रूप में प्रसिद्धि मिलने लगी । लेकिन दुर्भाग्य से सन 1980 में, टेरी फॉक्स की बीमारी ने उन्हें थंडर बे में पहुचने से ठीक पहले उनके इस मैराथन को रोकना शुरू कर दिया। अब तक, कैंसर उनके  फेफड़ों तक पहुँच चुका था जिसके कारण उन्हें  अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा जहाँ सन 1981 में मात्र 23 वर्ष की अल्प आयु में दुनिया के इस महान व्यक्ति की  मृत्यु हो गई। 



दोस्तों टेरी फॉक्स अपने जीवन में कुल 143 दिनों तक चले और  इस दौरान कुल 5,373 किमी की दूरी तय किये  और 1981 में 24 मिलियन डॉलर से भी अधिक धनराशि जुटाने में कामयाब रहे ।
टेरी फॉक्स फाउंडेशन आज भी फॉक्स की विरासत को आगे बढ़ाते हुए, कैंसर अनुसंधान के लिए धन इक्कठा  करता है। 2004 में फॉक्स को "द ग्रेटेस्ट कैनेडियन" के रूप में दूसरा स्थान दिया गया था और उनके नाम पर कई पार्क और इमारतें बनी हैं।

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अंत में हम अपने आर्टिकल के माध्यम से आपसे सिर्फ इतना बताना  चाहते हैं कि  चाहे किसी व्यक्ति के सामने कितनी भी बाधाएं एवं मुश्किलें क्यों न आये.  अगर उसके अन्दर दृढ़ संकल्प एवं प्रबल इच्छाशक्ति हो तो वह कुछ भी कर सकता है.

तो आज का हमारा यह आर्टिकल आपको कैसा लगा अपने कमेंट के माध्यम से जरूर बताएं, साथ ही इस आर्टिकल को अपने सगे- सम्बन्धियों को शेयर करना न भूले. हो सकता है इस आर्टिकल को पढ़कर किसी के  जीवन में हमेशा के लिए सकारात्मक बदलाव आ जाये.

आर्टिलकल पढने के लिए आपका दिल से धन्यवाद.  
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Wednesday, 13 January 2021

Virat Kohli Baby Name Photo in Hindi | विराट एवं अनुष्का के घर आयी नन्हीं परी

Virat Kohli Baby News-

दोस्तों दुनिया के महान बल्लेबाजों में से एक एवं मौजूदा इंडियन  क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली के घर पर उस वक़्त ख़ुशी की लहर दौड़ गयी जब उनको पता चला की उनकी पत्नी अनुष्का शर्मा ने एक खुबसूरत नन्ही परी को जन्म दिया. सोमवार के दिन बेटी के जन्म के अवसर पर विराट  कोहली एवं उनका पूरा परिवार खूब  खुश है जिसकी जानकारी  विराट ने अपने ट्विटर हैंडल पर एक पोस्ट करके यह जानकारी पूरी दुनिया के साथ शेयर की.




कोहली ने इस ट्वीट के माध्यम से  बताया कि , "हम दोनों को यह बताते हुए बेहद खुशी हो रही है कि हमारे घर बेटी हुई है. हम आपके प्यार और शुभकामनओं के लिए दिल से आभारी हैं. अनुष्का और हमारी बेटी, दोनों बिल्कुल ठीक हैं. हमारा यह सौभाग्य है कि हमें जिंदगी का यह चैप्टर अनुभव करने का मौका मिला. हम जानते हैं कि आप यह जरूर समझेंगे कि इस वक्त हमें थोड़ी प्राइवेसी चाहिए."




पिछले साल अगस्त महीने में किया था अनुष्का के प्रेगनेंट  होने का खुलासा -

आपको बता दें की विराट  ने पिछले वर्ष  के अगस्त माह में ही अपने सोशल मीडिया हैंडल पर एक पोस्ट के माध्यम से अपनी पत्नी एवं बॉलीवुड एक्ट्रेस  अनुष्का शर्मा के प्रेग्नेंट होने की जानकारी को अपने प्रसंशकों के साथ शेयर की  थी. इसके साथ ही विराट और अनुष्का के बारे में इस जानकारी के फैलने के बाद से ही दोनों ही ट्विटर पर तेज़ी से ट्रेंड होने  लगे थे. इस प्रकार दोनों के प्रसंसको के बीच विराट एवं अनुष्का के जीवन  के इस सबसे खुबसूरत लम्हें  को लेकर खुशी और उत्साह दिखने लगा था. इस प्रकार सोमवार को जब इनकी  बेटी इनके घर पर  आ ही गई है तो इस मौके पर पूरी दुनिया भर के इनके प्रसंशक इनकी परी की पहली झलक पाने को बेताब दिख रहे हैं 

विराट कोहली ने ट्वीट करके फैंस को बताया है कि अनुष्का शर्मा (Anushka Sharma) ने 11 जनवरी की दोपहर को अपनी बेटी को जन्म दिया और डिलीवरी के बाद मां और बेटी दोनों की तबीयत पूरी तरह से ठीक है।




विराट कोहली के इस ट्वीट के बाद से ही लगातार उन्हें सोशल मीडिया पर बधाई संदेश भेजे जा रहे हैं। विराट कोहली ने फैंस और चाहने वालों से गुजारिश की है कि खुशी के इस समय में लोग उन्हें थोड़े दिनों के लिए अकेला छोड़ दें। जिससे उनका पूरा परिवार इस खुबसूरत लम्हे को पूरी तरह एन्जॉय कर पाए।

दूसरी तरफ मज़े की  बात यह भी है कि भारतीय क्रिकेट टीम के ज्यादातर  खिलाडियों  के घर पर पहले बेटी ने ही जन्म लिया जो की अपने आप में विशेष है. चाहे बात भारतीय टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की हो या फिर  सौरव गांगुली, रोहित शर्मा, सुरेश रैना की हो . इन  खिलाडियों  पर अगर नज़र दौडाएं तो आप पाएंगे की इन सभी खिलाडियों ने  पहले बेटी को  ही जन्म दिया. इस तरह अब इस लिस्ट में विराट कोहली का नाम भी जुड़ गया है.


विराट कोहली और अनुष्का शर्मा के बेटी का नाम (Virat Kohli & Anushka Sharma's Babygirl Name)-

Virat Kohli and Anushka Sharma’s baby girl ‘Anvi’-

दोस्तों विराट एवं अनुष्का के बेटी के जन्म के साथ ही इनके प्रसंशको के बीच इनकी इस नन्ही परी के नाम को लेकर चर्चाएँ तेज़ हो गयी हैं, लेकिन पीपिंगमून की एक रिपोर्ट की मानें तो विराट कोहली और अनुष्का शर्मा ने अपनी बेटी का नाम अनवी (Anvi) रखा है। जिसके पीछे का रहस्य यह बताया जा रहा है की यह नाम एक्ट्रेस अनुष्का शर्मा और क्रिकेटर विराट कोहली के नामों से मिलकर बना है।




‘अनवी’ का मतलब हिन्दू धर्म में पूजी जाने वाली देवी ‘लक्ष्मी जी’ का ही एक नाम है। मां लक्ष्मी को अनवी कहकर बुलाते हैं।

भारत में ‘अनवी’ को बहुत से लोग जंगल की देवी के रूप में भी पहचानते हैं। जैसा की आप लोग जानते हैं की  विराट कोहली और अनुष्का शर्मा दोनों ही प्रकृति प्रेमी  हैं, शायद यही कारण हो सकता है की  दोनों ने मिलकर अपनी बेटी का नाम ‘अनवी’ रखा है। कारण चाहे जो भी हो लेकिन मौजूदा समय ख़ुशी मनाने का है तो आप भी इस खुबसूरत लम्हे का लुत्फ़ उठाइए.

ये भी पढ़ें- विराट कोहली सफलता की कहानी | virat kohli biography in hindi


Virat Kohli Baby Photo -


Image Source - instagram 


आपको बता दें कि मौजूदा समय में भारतीय टीम ऑस्ट्रेलिया के साथ 4 मैच की सीरीज खेल रही है जो की अब अपने अंतिम पड़ाव में है . इसके बाद विराट  कोहली अगले महीने इंग्लैंड के खिलाफ घरेलू सरज़मीन पर होने वाली टेस्ट सीरीज से भारतीय टीम में वापसी करेंगे. जहाँ इंग्लैंड क्रिकेट टीम चार टेस्ट, पांच टी20 और तीन वनडे मैचों की सीरीज के लिए भारत दौरे पर आ रही है. इस दौरे की शुरुआत पांच फरवरी को पहले टेस्ट के साथ होगी.

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धन्यवाद.











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Tuesday, 8 December 2020

इम्युनिटी पासपोर्ट क्या है | Immunity Passport for Covid 19 in Hindi

What is Immunity Passport-

नमस्कार दोस्तों, जैसा की आप सब जानते हैं की मौजूदा समय में कोरोनावायरस  ने पूरे दुनियाभर के अर्थव्यवस्था को बहुत  ज्यादा नुकसान पहुंचा दिया है. एक तरफ जहाँ  लॉकडाउन लगने के कारण हर छोटे- बड़े संगठन एवं फैक्ट्रीयो में कामकाज बंद  होने से कई देशों की  आर्थिक वृद्धिदर को नकारात्मक  स्थिति में जाने की संभावना का अनुमान लगाया गया है. हालांकि पूरी तरह से कामकाज बंद नहीं हुआ है क्योकि कुछ जगहों पर कामकाज धीरे-धीरे पहले की तरह पटरी पर लाया जा रहा है. बस इसी को ध्यान में रखते हुए इसके लिए दुनिया के कुछ देश इम्युनिटी पासपोर्ट (Immunity Passport) के आइडिया पर सोच - विचार कर रहे हैं.

आपको बता दें कि इम्युनिटी पासपोर्ट अथवा  रिस्क फ्री सर्टिफिकेट (Risk Free Certificate) उन लोगों को दिए जाने किए जाने की योजना है, जिनको पूर्व में कोरोना हो गया था लेकिन अब वे  पूरी तरह ठीक हो चुके हैं. एक दूसरी बात यह है की उन लोगों को  ये सर्टिफिकेट इस आधार पर जारी किए जाने की योजना है कि वर्तमान में कोरोना से ठीक हो चुके लोगों में एंटीबॉडीज पर्याप्त मात्रा में विकसित हो चुके हों और अब वे इन्फेक्शन से सुरक्षित हैं. इसप्रकार  ऐसे लोग अब यात्रा करने  या फिर अपने काम पर वापस लौटने में सक्षम हैं.





World Health Organisation (WHO) ने दी चेतावनी-

एक तरफ जहाँ विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का कहना है कि दुनियाभर की गवर्नमेंट को कथित “इम्युनिटी पासपोर्ट” या “रिस्क फ्री सर्टिफिकेट” पर अभी इतना विश्वास नहीं करना चाहिए. एक और बात WHO ने कहा है कि अभी तक इस बात का कोई सबूत नहीं मिला है कि जिन लोगों में संक्रमण से ठीक होने के बाद एंटीबॉडी विकसित हो चुके  हैं, उन्हें अब दोबारा संक्रमण नहीं होगा और अब वे कोरोना  से सुरक्षित हैं. 

विश्व स्वास्थ्य संगठन  ने यह भी चेताया है कि इस तरह के कदम कोरोना वायरस के संक्रमण को बढ़ाने वाले हो सकते हैं. यदि किसी को  लगेगा कि वे इम्यून हो गए हैं यानी की अब वे रीइन्फेक्शन से सुरक्षित हैं, तो वे एहतियात बरतना बंद कर सकते हैं जो की बाद में खतरनाक साबित हो सकता है.

SARS के वक्त भी हुआ था फिर से इन्फेक्शन-

इसी क्रम में एक तरफ विश्व स्वास्थ्य संगठन WHO का कहना है कि सार्स (SARS) के मरीजों के फिर से \ बीमार होने के कई केस सामने आए थे जो की दुनिया के लिए ठीक नहीं है. WHO ने आगे बताया की सार्स के मरीजों के शरीर में तो एंटीबॉडीज बनीं , लेकिन इनमें से कई मरीजों में  एक वक्त के बाद एंटीबाडी बेअसर सी हो गईं. आपको बता दें की अब तक इस मामले में कोरोना के नतीजे अभी आने बाकी हैं.


एंटीबॉडीज को लेकर अध्ययन का रिपोर्ट-

विश्व स्वास्थ्य संगठन  ने एक संक्षिप्त नोट में कहा है कि ज्यादातर स्टडी यह  बताते हैं कि जो लोग एक बार कोरोना वायरस के  संक्रमण से  ठीक हो चुके हैं, उनके ब्लड  में एंटीबॉडीज उपस्थित  हैं और यह काफी मात्रा में हैं. वहीँ  कुछ व्यक्ति  ऐसे भी हैं, जिनके शरीर में एंटीबॉडीज का लेवल  अभी पर्याप्त नहीं है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार अभी  तक ऐसा कोई अध्ययन नहीं हुआ है, जो इस बात की सिद्ध  करता है  कि किसी मानव शरीर में एंटीबॉडी की मौजूदगी बाद में कोरोना के रीइन्फेक्शन को रोकने में प्रभावी रूप से काम कर रहा  है, इसका मतलब यह हुआ की  किसी व्यक्ति को फिर से कोरोना वायरस का संक्रमण नहीं होगा. इस प्रकार  इम्युनिटी पासपोर्ट के द्वारा लोग एहतियात बरतने के प्रति लापरवाह भी कर सकते हैं, इसप्रकार   कोरोना का संक्रमण फैलना आगे भी जारी रहने का खतरा  बढ़ सकता है.


तो दोस्तों आज का यह पोस्ट आपको कैसा लगा हमें जरुर बताइए . अगर यह आर्टिकल आपको पसंद आया हो तो इसको अपने दोस्तों के साथ शेयर करना न भूलें जिससे इम्युनिटी पासपोर्ट के बारे में ज्यादा से ज्यादा लोगों को पता चल सके. 


धन्यवाद.


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Monday, 7 December 2020

नताशा औघेय का जीवन परिचय हिंदी में | Natasha Aughey Biography in Hindi

दोस्तों, कैनेडियन अमेरिकन  फिटनेस आइकॉन, बॉडी बिल्डर एवं  पर्सनल ट्रेनर, नताशा औघेय अपनी परफेक्ट फिजिक के लिए न  केवल अपने देश में बल्कि पूरी दुनिया में काफी मशहूर हैं। अपने व्यवस्थित  दिनचर्या और हेल्दी आहार के दम पर उन्होंने एक मजबूत और लचीला शरीर बनाया है जिसके कारण आज दुनियाभर में उनके लाखों प्रसंशक हैं. ये अपने  Instagram और YouTube चैनल के माध्यम से लोगों को अच्छे फिटनेस एवं स्वास्थ्य के लिए प्रेरित करती रहती हैं.

तो आज के पोस्ट में हम आप लोगों को उनके जीवन के बारे में विस्तार से बताने वाले हैं इसलिए आप बने रहिए हमारे इस पोस्ट के साथ.  


प्रारम्भिक जीवन ( Natasha Aughey Early Life) -

 नताशा औघेय  का जन्म 18 मार्च सन 1993 को  ओटावा कनाडा में हुआ था. वह एक ईसाई फॅमिली से सम्बन्ध रखती हैं. जहाँ तक उनके माता- पिता की बात है तो आपको बता दें की नताशा अपने माता-पिता और भाई-बहनों के नाम अभी तक सार्वजनिक रूप से या सोशल मीडिया पर  नहीं बताती हैं। अब इसके पीछे क्या कारण है ये तो हम नहीं बता सकते लेकिन  एक साक्षात्कार में, उन्होंने बताया  कि उनके माता-पिता हमेशा से ही उनको फिटनेस के क्षेत्र में अपना करियर बनाने के लिए उसका समर्थन करते रहे हैं जिसका परिणाम आज सबके सामने है. उनके इंस्टाग्राम अकाउंट के मुताबिक, उनके परिवार में उनकी एक बहन है।





नताशा औघेय का बायोडाटा (Natasha Aughey Biodata) -


पूरा नाम                 नताशा औघेय 

निक नेम                नताशा  

जन्म                     18 मार्च 1993         

जन्म स्थान           ओटावा , कनाडा 

लिंग                      महिला 

राष्ट्रीयता              अमेरिकन 

उम्र                       27 साल 

उच्चतम शिक्षा      स्नातक 

वर्तमान पता         लोस अन्जेलोस , कैलिफ़ोर्निया , अमेरिका 

ऊँचाई                  5 फिट 6 इंच 

वजन                   62 किलोग्राम 

बॉडी की माप        36B-25-38 

आँखों का रंग       गहरा भूरा 

बालों का रंग        गहरा भूरा 

वैवाहिक स्थिति  अविवाहित 

कुल आय           400- 500 हजार अमेरिकी डॉलर 

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शिक्षा (Education)-

अगर पढाई- लिखाई की बात करें तो आपको बता दें की नताशा औघेय ने ग्रेजुएशन तक की पढाई की है. इसके अलावा इन्होंने अपनी स्कूल की पढाई कनाडा से ही पूरी की थी.





कैरियर (Career) - 

अपनी युवावस्था से ही नताशा  फिटनेस की दुनिया में बहुत रुचि रही है।  रिपोर्ट के अनुसार, उसने अपने हाई स्कूल के दिनों में कार्डियो का अभ्यास शुरू कर दिया था. क्योकि नताशा को अपने बचपन के दिनों से ही बॉडीबिल्डिंग करना अच्छा लगता था जिसका परिणाम यह हुआ की  वह अपने किशोरावस्था से ही जिम में जाती और वहा खूब प्रैक्टिस किया करती थीं. शायद यही वो समय था जब नताशा को बॉडीबिल्डिंग की दुनिया पसंद आने लगी. कुछ वर्षों बाद इन्होंने एक जबर्दस्त बॉडी बना लिया. अगर कैरियर की नजर से देखा जाये तो एक पेशेवर बॉडी बिल्डर होने के नाते, नताशा ऑगहे ने विभिन्न फिटनेस प्रतियोगिताओं में भाग लिया। सूत्रों के अनुसार, उन्होंने 2013 में ओपीए ओटावा चैंपियनशिप, चित्रा और टाल में 6 वां स्थान हासिल किया।




इसके अलावा वह एक फिटनेस ट्रेनर के रूप में भी काम करती हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, नताशा ने एक फिटनेस और स्वास्थ्य पूरक ब्रांड “EHP लैब्स” के लिए एक राजदूत के पद पर भी काम कर चुकी हैं.

सिर्फ इतना ही नहीं, वह कई अन्य फिटनेस ब्रांडों और उत्पादों को भी प्रमोट करती है. इसके अलावा यह प्रसिद्ध फिटनेस आइकन सोशल मीडिया इन्फ़्लुएन्शर भी हैं. इस तरह कुल मिलकर देखा जाये तो नताशा ने फिटनेस आइकॉन और बॉडीबिल्डिंग को ही अपना कैरियर बना लिया है.


ऊंचाई और वजन ( Natasha Aughey Height & Weight) -

अगर इनके कद की बात की जाये तो आपको बता दें की नताशा औघेय की ऊँचाई लगभग 5 फीट 6 इंच (मीटर 1.67 मीटर)  है। वहीँ नताशा  का बॉडीवेट लगभग 61.2 किलोग्राम (लगभग) है।





वर्कआउट और  डाइट (Natasha Aughey Workout & Diet) -

जहाँ तक इनके डाइट एवं वर्कआउट की बात है तो  नताशा ऑगहे सप्ताह के 6 दिन केंद्र में बॉडीबिल्डिंग की प्रशिक्षण लेती है, एक दिन आराम करती हैं।  वह अपने फिट शरीर को बनाए रखने के लिए वह अपने शरीर को फिट रखने के लिए संतुलित डाइट का बहुत ही अनुशासन से पालन करती हैं. अपने  डाइट में वेज  एवं नॉनवेज दोनों प्रकार के भोजन खाती हैं . उनका पसंदीदा व्यंजन चिकन, चावल और हरी सब्जियां हैं।  दूसरी  तरफ अपने  शरीर में प्रोटीन की आवश्यकता को पूरा करने के लिए  नताशा RedCon1, EHP लैब्स और अन्य प्रसिद्ध स्वास्थ्य उत्पादों को प्राथमिकता देती हैं. 


इन्स्टाग्राम पर रहती हैं एक्टिव (Natasha Aughey Instagram) -

दोस्तों आपको बता दें कि नताशा औघेय अपने इन्स्टाग्राम पेज  पर नियमित रूप से एक्टिव रहती हैं. ये अपने इन्स्टाग्राम अकाउंट पर अक्सर फिटनेस से सम्बंधित विडियो और फोटो अपने प्रसंशको के साथ शेयर करती रहती हैं.    




 नताशा औघेय  के बारे में कुछ रोचक तथ्य (Interesting Fact about Natasha Aughey) -


1. नताशा  को बचपन से ही बॉडी बिल्डिंग में दिलचस्पी है।

2. वह अपने स्कूल के दिनों में पेशेवर बॉडीबिल्डिंग करने लगी थी।

3. नताशा ऑगहे ने अपने दोस्तों के कहने पर अपनी फिटनेस तस्वीरें इंटरनेट पर पोस्ट करना शुरू कर दिया था     जिससे उनको दुनियाभर में लोग जानने लगे।

4. एक सफल करियर बनाने के लिए उसने अपने जीवन में बहुत संघर्ष किया।




5. कुछ समय बाद, नताशा ऑगहे ने विभिन्न स्वास्थ्य ब्रांडों के लिए एक फिटनेस मॉडल के रूप में काम करना      शुरू किया।

6. अपने बॉडीबिल्डिंग के कैरियर में उन्होंने  कई लोकप्रिय ब्रांडों के साथ काम किया जिसमें सेलेस्टियल बॉडीज़,    ब्लैकस्टोन लैब्स और अन्य शामिल हैं ।

7. मीडिया सूत्रों के अनुसार, नताशा ने CanFitPro से एक ट्रेनर प्रमाणपत्र (स्तर -1) भी अर्जित किया।

8. अब तक वह कई लोकप्रिय पत्रिकाओं के  लेखों में भी उनके बारे में बताया गया है।

9. इसके अलावा वह एक निजी फिटनेस ट्रेनर के रूप में भी काम करती हैं।

10. नताशा औघेय के पास  एक अपना खुद का  YouTube चैनल भी है, जिसका नाम उनके नाम पर ही है. इस यूट्यूब चैनल के माध्यम से अपने नियमित कसरत दिनचर्या और अपने प्रशंसकों के साथ स्वास्थ्य सुझाव भी पोस्ट करती रहती हैं ।


ये भी पढ़ें- मसाला किंग धर्मपाल गुलाटी का जीवन परिचय हिंदी में | Dharampal Gulati (MDH) Biography in Hindi

11. अगर  उनकी लव लाइफ की बात करें तो नताशा अभी तक सिंगल हैं और साल यानि की 2020 तक  उनका कोई बॉयफ्रेंड नहीं है. 

12. नताशा अपने instagram account पर काफी एक्टिव रहती हैं एवं अपने फ़ोटोज़ एवं वीडियोस को शेयर करती रहती हैं.

13. नताशा को प्रकृति से काफी लगाव है जिसके लिए वो अक्सर जंगलों एवं पहाड़ों पर घुमने के लिए जाती रहती हैं. 

14. नताशा ने अब तक लुइस-फिलिप जीन, शेरोन ब्रूनो और जेनाया होफर सहित अन्य बॉडी बिल्डरों के साथ काम कर चुकी हैं.

15. नताशा औघेय काफी मेहनती हैं एवं सप्ताह के 6 दिन वर्कआउट करती हैं एवं 1 दिन आराम करती  हैं.


दोस्तों हमारा आज का पोस्ट आपको कैसा लगा , हमें अपने कमेंट के माध्यम से जरुर बताइए . अगर यह पोस्ट आपको पसंद आयी हो तो इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर जरुर कीजिए ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इस फिटनेस आइकॉन के बारे में जान सकें.


धन्यवाद्.

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Thursday, 3 December 2020

मसाला किंग धर्मपाल गुलाटी का जीवन परिचय हिंदी में | Dharampal Gulati (MDH) Biography in Hindi

नमस्कार दोस्तों, आपने अपने जीवन में एमडीएच (MDH) मसाले के बारे में सुना होगा ना, वो जो टीवी में लाल रंग का  साफा बांधे दिखाई देते हैं और साथ ही यह कहते हैं "यही है असली इंडिया". जी हां आज के इस पोस्ट में मैं आप लोगों को तांगा  चलाने से लेकर MDH मसाले जैसी विश्वस्तरीय ब्रांड के MD श्री धर्मपाल गुलाटी जी के जीवन के बारे विस्तार से बताने वाला हूँ. तो आप शुरू से लेकर अंत तक बने रहिए हमारे इस आर्टिकल के साथ.

मित्रों महाशय धर्मपाल गुलाटी जी ने अपने जीवन में कठिन संघर्ष एवं अथक परिश्रम किया जिसके बाद ही अपने जीवन में सफलता प्राप्त की. जो कि हम सबके लिए एक बेहतरीन मार्गदर्शक प्रेरणास्त्रोत बन सकते हैं.

 ‘महाशय धर्मपाल गुलाटी’ की, जो कभी अपने जीवन यापन करने  के लिए तांगा चलाते थे लेकिन  आज "Masala King" (मसालों के बादशाह) के नाम से मशहूर है. आज इनकी कंपनी का  बनाया MDH मसाला  घर- घर की रसोई की पहचान है.



महाशय धरमपाल गुलाटी का प्रारम्भिक जीवन एवं परिवार  (Dharampal Early Life & Family) -

श्री धरमपाल गुलाटी जी  का जन्म 27 मार्च सन 1923 को पाकिस्तान के सियालकोट में एक सामान्य परिवार में हुआ था. उनके पिता जिनका नाम महाशय चुन्नीलाल और माता चनन देवी था. इनके माता- पिता दोनों ही धार्मिक प्रकृति वाले होने के साथ- साथ  दोनों ही आर्य समाज के अनुयायी थे. धरमपाल जी का बचपन पाकिस्तान के सियालकोट में ठीक- ठाक से ही बीता. सियालकोट में ही इनके पिता की अपनी एक मिर्च-मसालों की दुकान थी, जिसका नाम  ' महाशियान दि हट्टी ' था. धरमपाल जी के  पिता स्वयं ही मसालों को पीसकर तैयार करते थे  जिसके कारण उनकी दुकान अच्छी - खासी चलती थी. स्वयं के  बनाये मसालों के कारण ही वे अपने एरिया में ' दिग्गी मिर्च वाले ' के नाम से प्रसिद्द थे.


शिक्षा ( Education) -

दोस्तों जहाँ तक इनके शिक्षा की बात है तो आपको बता दें की धरमपाल गुलाटी जी का मन पढ़ाई-लिखाई में कोई ख़ास नहीं लगा. मात्र 5वीं क्लास में फेल होने के बाद इन्होंने पढ़ाई- लिखाई से रिश्ता ही तोड़ लिया एवं स्कूल छोड़ दिए. स्कूल छोड़ने के बाद ये अपने घर पर ही रहने लगे. इनके स्कूल छोड़ने से इनके पिता कुछ समय के लिए इनसे काफी दुखी हुए. लेकिन कुछ समय के बाद में उन्होंने इनको कोई  हुनर सिखाने का फैसला किया ताकि ये  अपने जीवन में अपने पैरों पर खड़े होने लायक बन सकें.

धरमपाल जी का व्यापारिक जीवन (Dharampal Business Life) -

शुरुवात में इनके पिता ने इन्हें लकड़ी का काम सीखने के लिए इनको एक बढ़ई के पास भेजा लेकिन मात्र  8 महीने तक ही वहाँ पर लकड़ी का काम सीखने के बाद इन्होंने वहाँ जाना ही बंद कर दिया. क्योकि इनका मन लकड़ी के  काम में नही लगता था. इसके कुछ ही समय के बाद फिर से इनके पिता ने इन्हें चांवल की फैक्ट्री में काम पर लगवा दिया, उसके बाद कपड़ों का काम भी इन्होंने कुछ समय तक किया.

इस तरह 15 साल की उम्र  तक आते-आते धरमपाल जी ने कपड़े से लेकर हार्डवेयर जैसे कई काम करके छोड़ चुके थे. लेकिन इस दौरान ये किसी भी काम में वे टिक नहीं पाए इसका एक प्रमुख कारण इनका इन सब कामो में मन नही लगना था.

एक समय ऐसा भी आया जब इनके पिता ने इन्हें अपने ही दुकान पर बैठने के लिए कह दिया और इस तरह ये अपने पिता की दुकान पर  मिर्च-मसाले पीसने का काम करने लगे. इस तरह 18 वर्ष के होते- होते ही इनके पिता ने धरमपाल जी की शादी कर दी और इस तरह से इनके पिता ने अपनी तरफ से धरमपाल  के प्रति अपनी  जिम्मेदारी पूरा  कर लिया. समय के साथ धरमपाल जी अपने पिता के  मसाले के बिजनेस को दिन ब दिन उचाई पर ले जाने लगे.




इस दौरान सब कुछ ठीक- ठाक ही चल रहा था की सन 1947 में देश का बटवारा  हो गया और देश भारत एवं पाकिस्तान में बंट गया. अब  सियालकोट एक नए देश पाकिस्तान का एक हिस्सा बन गया. देश विभाजन के बाद  पाकिस्तान में खूब दंगे भड़क उठे, जिसमें कई हिन्दुओं को जान से मार दिया गया एवं  कईयो  की दुकानें भी लूट ली गई और हिन्दुओ पर अनेकों प्रकार के अत्याचार किये गए. अब इस तरह की माहौल में पाकिस्तान में  रह रहे हिन्दुओं में अपने एवं अपने परिवार के प्रति असुरक्षा की भावना बुरी तरह से घर कर गई और जिसका परिणाम ये हुआ की  धरमपाल जी को रातो -रात पाकिस्तान छोड़कर भारत भागकर आना  पड़ा. 

इस तरह धरमपाल जी पाकिस्तान का  सियालकोट छोड़कर भारत आने के लिए निकल पड़े लेकिन  जिस ट्रेन से ये  भारत आ रहे थे, उसमें दंगो के कारण लाशें ही लाशें दिख रही  थी. लेकिन इन सब के बाद भी  ये किसी भी  तरह से अमृतसर पहुँच ही गए. अमृतसर पहुचने के बाद ये  एक दिन के लिए यहाँ रुकने के बाद ही  दूसरे दिन ये  ट्रेन पकड़कर  दिल्ली के करोलबाग स्थित अपनी बहन के घर आये.

इस प्रकार दिल्ली पहुचने के बाद में धरमपाल जी को एक नए सिरे से अपने जिन्दगी की शुरुवात करनी थी. आपको बता दें की  जब ये  सियालकोट को छोड़े थे उस वक्त इन्होंने अपने जेब में मात्र 1500 रुपये लेकर ही चले थे. क्योकि वही इनकी कुल जमा-पूंजी थी. इस दौरान उन पैसो में से 650 रुपये का इन्होंने दिल्ली आकर एक तांगा और घोड़ा खरीदा और तांगा चलाने वाले बन गए. 

ये  नयी दिल्ली स्टेशन से क़ुतुब रोड एवं  करोल बाग़ से  बड़ा हिंदू राव तक तांगा चलाते थे. लेकिन इनका यहाँ इस काम में भी मन नहीं रम सका जिसके कारण ये ज्यादा  समय तक  यह तांगा चलाने का  काम नहीं कर पाए. सिर्फ दो महीने तक ही तांगा चलाने के बाद इन्होंने अपना तांगा बेच दिया एवं उससे मिले पैसे  से लकड़ी  का खोका खरीद लिया और करोल बाग़ के अजमल खान रोड पर ही  एक छोटी सी दुकान बनवा ली. बस इसी दुकान से ही  इन्होंने मिर्च - मसालों के  अपने पुराने  बिजनेस को फिर से करना शुरू कर दिया. इस दुकान का नाम उन्होंने "महशिआन दि हट्टी – सियालकोट वाले" रखा.

इस तरह किसी समय  पाकिस्तान के सियालकोट में एक अच्छी खासी दुकान चलाने वाले धरमपाल जी इस छोटे से खोके पर ही दिन भर  मिर्च- मसाला पिसते . इनकी दूकान का पिसा हुआ मसाला लोगों  को खूब पसंद आने लगा. इस तरह धीरे- धीरे ही सही लेकिन इनकी  परिश्रम  सफलता में बदलने लगी. क्योकि जैसे-जैसे लोगों को पता चला की ये वही  सियालकोट के मशहूर दिग्गी मसाले वाले है, इस प्रकार लोग  इनकी दुकान पर मसाले खरीदने के लिए आने लगे. दोस्तों लोगों के इनके दुकान पर आने का सबसे प्रमुख कारण यह था की  इनके अपने हाथ से  बनाए गए मसालों की उच्च क्वालिटी का  होना था.

दिल्ली के विभिन्न न्यूज़पेपरों  में दिए गए विज्ञापनों से भी इनके स्वयं बनाये  मसाले को मशहूर होने में बहुत सहयोग किया  और इस तरह  इनका व्यापार तेज़ी से उचाईयों पर पहुच गया.

जिसका परिणाम यह हुआ की इन्होंने सन 1968 तक इन्होंने दिल्ली में ही अपनी मिर्च -मसालों की फैक्ट्री खोल दी और इनके फैक्ट्री का बना मसाला पूरे भारत के साथ दुसरे देशों में भी export होने लगे.

दोस्तों आज के समय में इनका "महशिआन दि हट्टी" जिसको MDH के नाम से भी जाना जाता है, जो की मसालों की दुनिया में एक विश्वस्तरीय ब्रांड बन चुका है. आज वे MDH के प्रबंध निदेशक और ब्रांड एम्बेसडर हैं. आपको बता दें की  MDH मसाले आज दुनिया के 100 से भी अधिक देशों में अपने 60 से अधिक प्रोडक्ट की सप्लाई  करता है. आज MDH के टॉप 3 प्रोडक्ट है – देग्गी मिर्च, चाट मसाला और चना मसाला. 


Dharampal Gulati Networth-

आपको बता दें की साल  2020 में इनकी कंपनी की पूरी  आय 3000 करोड़ रूपये  हो गया है जो की हर साल बढ़ता ही जा रहा है. इसके अलावा इनकी कंपनी आज भारत के अलावा यूरोप , कनाडा, यूएई एवं ब्रिटेन जैसे विश्व के कई हिस्सों में अपने मसालों का निर्यात करते हैं. इनके सम्बन्ध में एक और खास बात यह है की ये अपने वेतन की 90% धनराशि दान में दे देते है. मित्रों किसी का समय कब बदल जाये ये किसी को पता नहीं, इसका प्रतक्ष्य उदाहरण हैं धरमपाल जी. क्योकि  कभी मात्र  दो आना लेकर तांगा चलाने वाले महाशय धरमपाल जी का नाम आज भारत के अरबपतियों में गिना जाता  है. इन सब के पीछे इनकी  मेहनत, लगन और कार्य के प्रति पूरी ईमानदारी है. जिसकी बदौलत इन्होंने  अपने जीवन में यह मुकाम हासिल किया है.

मित्रों आपको बता दें कि महाशय धरमपाल जी एक उद्योगपति होने के साथ-साथ  एक अच्छे समाजसेवी भी है. इन्होंने समाज सेवा करने के उद्देश्य से कई अस्पताल और स्कूलों का निर्माण करवाया है. आज मसाला किंग के नाम से जाने जाने वाले  धरमपाल जी ने अपने जीवन का एक अपना मानना  है  जो की यह है - "दुनिया को अपने सर्वश्रेष्ठ दो और सर्वश्रेष्ठ स्वमेव ही आपके पास वापस आएगा."

दोस्तों  आज भी जब धरमपाल जी टीवी में हमें दिखाई देते हैं तो लोग इनके इतनी उम्र में भी इनके जीवन जीने की कला को देखकर इनसे प्रेरित होते रहते हैं. कई बार जब इनसे इनकी फिटनेस का राज़ के बारे में पूछा तो इन्होंने अनुशाशित जीवन  एवं संतुलित खान- पान को ही अपने स्वस्थ्य जीवन का राज़ बताया. इन्होंने बताया की ये प्रतिदिन 5 बजे ही उठ जाया करते हैं और दैनिक क्रियाओ को करने के बाद बाहर टहलने निकल जाते हैं  आगे ये बताते हैं की इनका ये आदत इनके बचपन से ही है. इसके अलावा ये योग और ध्यान भी इनकी रूचि रही है.


पुरस्कार (Achivement) - 

सन 2016 में एबीसीआई वार्षिक पुरस्कारों में इंडियन ऑफ़ दी ईयर से इन्हें नवाजा गया.

सन 2017 में लाइफटाइम अचीवमेंट के लिए उत्कृष्टता पुरस्कार से सम्मानित.




वर्ष 2017 में ही एफएमसीजी क्षेत्र में सबसे ज्यादा भुगतान करने वाले CEO (21 करोड़/वर्ष)

वर्ष 2019 में भारत सरकार ने इन्हें भारत के तीसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्मभूषण से अलंकृत किया.  


   

धरमपाल जी की मृत्यु (Dharampal Gulati Death or RIP) -

दोस्तों मसाला किंग के नाम से मशहूर श्री धरमपाल गुलाटी जी की मृत्यु 3 दिसंबर सन 2020 को 98 वर्ष की उम्र में हुई.


 दोस्तों आज का हमारा यह आर्टिकल आपको कैसा लगा, हमें बताना ना भूलें. अगर यह आर्टिकल आपको  पसंद आया हो तो आप इसे अपने दोस्तों एवं रिश्तेदारों को शेयर कीजिए ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग हमारे देश के मसाला किंग के नाम से मशहुर धरमपाल गुलाटी जी के जीवन के बारे में जान सकें. 


धन्यवाद.






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छोटी सी हरड़ के 20 फायदे जानकर आप भी हो जाएंगे हैरान | Harad ke Fayde in Hindi

20 Benefits of Terminalia Chebula -

दोस्तों जब भी हमारे पेट  में गैस या कब्ज की परेशानी होती है तो हमारे घर के बुजुर्ग हमें हरड़ खाने की सलाह देते हैं। लेकिन क्या आपको पता है की ये छोटा सा हरड़ सिर्फ गैस जैसी बीमारियों में ही आराम नहीं देता बल्कि इसके कई और फायदे भी हैं। अगर दूसरी भाषा में कहें तो इसे औषधि कहना भी गलत नहीं होगा।आपको बता दें की  हरड़ दो प्रकार के होते हैं− बड़ी हरड़ और छोटी हरड़

दोस्तों  हरड़ को आयुर्वेद में बहुत ही गुणकारी माना गया है. चरक संहिता में जिस पहले औषधि के बारे में बताया गया है वह हर्रे या हरड़  ही है. बहुत पहले से ही आप और हम अपने घरो में इसका उपयोग कई तरीकों से करते आए हैं. दूसरी तरफ हरड़ पेट के रोगों में विशेष रूप से फायदेमंद है जैसे बवासीर, कब्ज़ एवं पेट के कीड़ो को ख़त्म करने में उपयोग किया जाता है.

जहाँ बड़ी हरड़ के भीतर सख्त गुठली होती है वहीँ  छोटी हरड़ में किसी प्रकार की कोई गुठली नहीं होती है। वास्तव में वे फल जो गुठली पैदा होने से पहले ही तोड़कर सुखा लिए जाते हैं उन्हें ही छोटी हरड़ की श्रेणी में रखा जाता है। क्या आपको पता है की हरड़ को हरीतकी भी कहा जाता है। यह न केवल हमारे स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है, इसके अलावा दुसरे लाभ यानि की इसके सौन्दर्य लाभ भी कुछ कम नहीं है। दोस्तों इस छोटी सी हरड़ के बड़े स्वास्थ्य लाभ क्या- क्या हैं  इसके बारे में सबको  जानना चाहिए।




आज के इस पोस्ट में हम आप लोगों को  हरड़ के 10 ऐसे फायदों के बारे में बताएँगे जो  हमारे स्वास्थ्य के लिए  बहुत लाभकारी हैं. तो चलिए शुरू करते हैं -


1. अगर आपके शरीर के किसी भाग पर फंगल एलर्जी या संक्रमण हो गया है तो ऐसी स्थिति में हरड़ के फल और हल्दी से तैयार लेप प्रभावित भाग पर दिन में दो बार लगाएं, त्वचा के पूरी तरह सामान्य होने तक इस लेप का इस्तेमाल करते  रहें ।


2. दोस्तों हरड़ का काढ़ा त्वचा संबंधी एलर्जी में लाभकारी है। हरड़ के फल को पानी में उबालकर काढ़ा बनाएं और इसका सेवन दिन में दो बार नियमित रूप से करने पर जल्द आराम मिलता है।


3. अपने बालों को स्वस्थ्य बनाने के लिए हरड़ के फल को नारियल तेल में उबालकर (हरड़ पूरी तरह घुलने तक) लेप बनाएं और इसे बालों में लगाएं या फिर प्रतिदिन 3-5 ग्राम हरड़ पावडर एक गिलास पानी के साथ सेवन करें।

   

4. दोस्तों हरड़ एक प्रकार का स्वास्थ्यवर्धक टॉनिक  है, जिसके प्रयोग से हमारे बाल काले, चमकीले और आकर्षक दिखने लगते हैं।

   

5. अगर आपके शरीर के किसी भाग पर एलर्जी हो गयी है तो उस  प्रभावित भाग की धुलाई भी इसके  काढ़े से की जा सकती है।


6. अगर आपके मुंह में सूजन हो गया है तो ऐसी स्थिति में  हरड़ के गरारे करने से काफी फायदा मिलता है।


7. हरड़ का पल्प कब्ज से राहत दिलाने में भी गुणकारी होता है। इस पल्प को चुटकीभर नमक के साथ खाएं या फिर 1/2 ग्राम लौंग अथवा दालचीनी के साथ इसका सेवन करें।


8. हरड़ का एक और लाभ यह है की इसके लेप को पतले छाछ के साथ मिलाकर गरारे करने से मसूढ़ों की सूजन में भी आराम मिलता है।


9. इसका एक और महत्वपूर्ण फायदा यह है की हरड़ का चूर्ण दांत दर्द  वाले स्थान पर लगाने से भी तकलीफ कम होती है।

   

10. हरड़ का नियमित रूप से सेवन, वजन कम करने में सहायक है। यह पाचन में सहायक होने के साथ ही, गैस, एसिडिटी और अन्य समस्याओं से राहत देती है और धीरे-धीरे मोटापा कम करती है।


11. खाना खाने के बाद अगर आपके पेट में भारीपन महसूस हो रहा है , तो इस स्थिति में  इसका सेवन करने से आराम मिलता है.


12. हरड़ का सेवन करने से खुजली  या फंगल इन्फेक्शन जैसी समस्या भी दूर हो जाती है.
नोट-  हरड़ का सेवन गर्भवती महिलाओं को नहीं करना चाहिए.


13. हरड़ का चूर्ण व पुराने  गुड़ को समान मात्रा में मिलाकर दिन में तीन बार सेवन करने से पीलिया जैसा  बड़ा रोग भी दूर हो जाता है. इसके सेवन की मात्रा सिर्फ 10 से 20 ग्राम तक ही रखें.


14. हरड़, नीम की छाल का चूर्ण, वायविडंग और गुड़ को एक साथ मिलाकर सेवन करने से हमारे पेट के कीड़ों का नाश हो जाता है.


15. हरड़ के  चूर्ण को समभाग गुड़ के साथ सुबह-शाम लेने  से बवासीर जैसी बीमारी भी ठीक हो जाती है.


16. हरड़ के चूर्ण को एक चम्मच की मात्रा में दो किशमिश के साथ सेवन  करने से एसिडिटी की समस्या  दूर हो जाती है.

17.  हरड़  हमारे भूख को बढ़ाने में भी बहुत लाभकारी सिद्ध होता है. इसके लिए हमें इसे चबाकर खाना होगा.

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18. 5 ग्राम हरड़ का चूर्ण 40 मि.ली. गोमूत्र में मिलाकर हर रोज़ पीने व खानपान में परहेज़ रखने से कुष्ठ जैसा गंभीर रोग भी ख़त्म हो जाता है.

19. अगर आपको खांसी की समस्या हो गयी है तो इस स्थिति में  हरड़, कालीमिर्च एवं  पीपरि तीनों का सामान भाग में चूर्ण 3-3 ग्राम की मात्रा में दिन में तीन बार गुड़ के साथ खाएं. इससे कुछ ही दिनों में लाभ मिलेगा.

20. हरड़ या हर्रे के चूर्ण को 5 ग्राम शहद के साथ सुबह-शाम लेने से मलेरिया में फ़ायदा होता है.


तो दोस्तों आज का यह पोस्ट आपको कैसा लगा, आप हमें अपने कमेंट के माध्यम से  जरुर बताएं. 

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