Thursday, 3 December 2020

मसाला किंग धर्मपाल गुलाटी का जीवन परिचय हिंदी में | Dharampal Gulati (MDH) Biography in Hindi

नमस्कार दोस्तों, आपने अपने जीवन में एमडीएच (MDH) मसाले के बारे में सुना होगा ना, वो जो टीवी में लाल रंग का  साफा बांधे दिखाई देते हैं और साथ ही यह कहते हैं "यही है असली इंडिया". जी हां आज के इस पोस्ट में मैं आप लोगों को तांगा  चलाने से लेकर MDH मसाले जैसी विश्वस्तरीय ब्रांड के MD श्री धर्मपाल गुलाटी जी के जीवन के बारे विस्तार से बताने वाला हूँ. तो आप शुरू से लेकर अंत तक बने रहिए हमारे इस आर्टिकल के साथ.

मित्रों महाशय धर्मपाल गुलाटी जी ने अपने जीवन में कठिन संघर्ष एवं अथक परिश्रम किया जिसके बाद ही अपने जीवन में सफलता प्राप्त की. जो कि हम सबके लिए एक बेहतरीन मार्गदर्शक प्रेरणास्त्रोत बन सकते हैं.

 ‘महाशय धर्मपाल गुलाटी’ की, जो कभी अपने जीवन यापन करने  के लिए तांगा चलाते थे लेकिन  आज "Masala King" (मसालों के बादशाह) के नाम से मशहूर है. आज इनकी कंपनी का  बनाया MDH मसाला  घर- घर की रसोई की पहचान है.


महाशय धरमपाल गुलाटी का प्रारम्भिक जीवन एवं परिवार  (Dharampal Early Life & Family) -

श्री धरमपाल गुलाटी जी  का जन्म 27 मार्च सन 1923 को पाकिस्तान के सियालकोट में एक सामान्य परिवार में हुआ था. उनके पिता जिनका नाम महाशय चुन्नीलाल और माता चनन देवी था. इनके माता- पिता दोनों ही धार्मिक प्रकृति वाले होने के साथ- साथ  दोनों ही आर्य समाज के अनुयायी थे. धरमपाल जी का बचपन पाकिस्तान के सियालकोट में ठीक- ठाक से ही बीता. सियालकोट में ही इनके पिता की अपनी एक मिर्च-मसालों की दुकान थी, जिसका नाम  ' महाशियान दि हट्टी ' था. धरमपाल जी के  पिता स्वयं ही मसालों को पीसकर तैयार करते थे  जिसके कारण उनकी दुकान अच्छी - खासी चलती थी. स्वयं के  बनाये मसालों के कारण ही वे अपने एरिया में ' दिग्गी मिर्च वाले ' के नाम से प्रसिद्द थे.


शिक्षा ( Education) -

दोस्तों जहाँ तक इनके शिक्षा की बात है तो आपको बता दें की धरमपाल गुलाटी जी का मन पढ़ाई-लिखाई में कोई ख़ास नहीं लगा. मात्र 5वीं क्लास में फेल होने के बाद इन्होंने पढ़ाई- लिखाई से रिश्ता ही तोड़ लिया एवं स्कूल छोड़ दिए. स्कूल छोड़ने के बाद ये अपने घर पर ही रहने लगे. इनके स्कूल छोड़ने से इनके पिता कुछ समय के लिए इनसे काफी दुखी हुए. लेकिन कुछ समय के बाद में उन्होंने इनको कोई  हुनर सिखाने का फैसला किया ताकि ये  अपने जीवन में अपने पैरों पर खड़े होने लायक बन सकें.

धरमपाल जी का व्यापारिक जीवन (Dharampal Business Life) -

शुरुवात में इनके पिता ने इन्हें लकड़ी का काम सीखने के लिए इनको एक बढ़ई के पास भेजा लेकिन मात्र  8 महीने तक ही वहाँ पर लकड़ी का काम सीखने के बाद इन्होंने वहाँ जाना ही बंद कर दिया. क्योकि इनका मन लकड़ी के  काम में नही लगता था. इसके कुछ ही समय के बाद फिर से इनके पिता ने इन्हें चांवल की फैक्ट्री में काम पर लगवा दिया, उसके बाद कपड़ों का काम भी इन्होंने कुछ समय तक किया.

इस तरह 15 साल की उम्र  तक आते-आते धरमपाल जी ने कपड़े से लेकर हार्डवेयर जैसे कई काम करके छोड़ चुके थे. लेकिन इस दौरान ये किसी भी काम में वे टिक नहीं पाए इसका एक प्रमुख कारण इनका इन सब कामो में मन नही लगना था.

एक समय ऐसा भी आया जब इनके पिता ने इन्हें अपने ही दुकान पर बैठने के लिए कह दिया और इस तरह ये अपने पिता की दुकान पर  मिर्च-मसाले पीसने का काम करने लगे. इस तरह 18 वर्ष के होते- होते ही इनके पिता ने धरमपाल जी की शादी कर दी और इस तरह से इनके पिता ने अपनी तरफ से धरमपाल  के प्रति अपनी  जिम्मेदारी पूरा  कर लिया. समय के साथ धरमपाल जी अपने पिता के  मसाले के बिजनेस को दिन ब दिन उचाई पर ले जाने लगे.




इस दौरान सब कुछ ठीक- ठाक ही चल रहा था की सन 1947 में देश का बटवारा  हो गया और देश भारत एवं पाकिस्तान में बंट गया. अब  सियालकोट एक नए देश पाकिस्तान का एक हिस्सा बन गया. देश विभाजन के बाद  पाकिस्तान में खूब दंगे भड़क उठे, जिसमें कई हिन्दुओं को जान से मार दिया गया एवं  कईयो  की दुकानें भी लूट ली गई और हिन्दुओ पर अनेकों प्रकार के अत्याचार किये गए. अब इस तरह की माहौल में पाकिस्तान में  रह रहे हिन्दुओं में अपने एवं अपने परिवार के प्रति असुरक्षा की भावना बुरी तरह से घर कर गई और जिसका परिणाम ये हुआ की  धरमपाल जी को रातो -रात पाकिस्तान छोड़कर भारत भागकर आना  पड़ा. 

इस तरह धरमपाल जी पाकिस्तान का  सियालकोट छोड़कर भारत आने के लिए निकल पड़े लेकिन  जिस ट्रेन से ये  भारत आ रहे थे, उसमें दंगो के कारण लाशें ही लाशें दिख रही  थी. लेकिन इन सब के बाद भी  ये किसी भी  तरह से अमृतसर पहुँच ही गए. अमृतसर पहुचने के बाद ये  एक दिन के लिए यहाँ रुकने के बाद ही  दूसरे दिन ये  ट्रेन पकड़कर  दिल्ली के करोलबाग स्थित अपनी बहन के घर आये.

इस प्रकार दिल्ली पहुचने के बाद में धरमपाल जी को एक नए सिरे से अपने जिन्दगी की शुरुवात करनी थी. आपको बता दें की  जब ये  सियालकोट को छोड़े थे उस वक्त इन्होंने अपने जेब में मात्र 1500 रुपये लेकर ही चले थे. क्योकि वही इनकी कुल जमा-पूंजी थी. इस दौरान उन पैसो में से 650 रुपये का इन्होंने दिल्ली आकर एक तांगा और घोड़ा खरीदा और तांगा चलाने वाले बन गए. 

ये  नयी दिल्ली स्टेशन से क़ुतुब रोड एवं  करोल बाग़ से  बड़ा हिंदू राव तक तांगा चलाते थे. लेकिन इनका यहाँ इस काम में भी मन नहीं रम सका जिसके कारण ये ज्यादा  समय तक  यह तांगा चलाने का  काम नहीं कर पाए. सिर्फ दो महीने तक ही तांगा चलाने के बाद इन्होंने अपना तांगा बेच दिया एवं उससे मिले पैसे  से लकड़ी  का खोका खरीद लिया और करोल बाग़ के अजमल खान रोड पर ही  एक छोटी सी दुकान बनवा ली. बस इसी दुकान से ही  इन्होंने मिर्च - मसालों के  अपने पुराने  बिजनेस को फिर से करना शुरू कर दिया. इस दुकान का नाम उन्होंने "महशिआन दि हट्टी – सियालकोट वाले" रखा.

इस तरह किसी समय  पाकिस्तान के सियालकोट में एक अच्छी खासी दुकान चलाने वाले धरमपाल जी इस छोटे से खोके पर ही दिन भर  मिर्च- मसाला पिसते . इनकी दूकान का पिसा हुआ मसाला लोगों  को खूब पसंद आने लगा. इस तरह धीरे- धीरे ही सही लेकिन इनकी  परिश्रम  सफलता में बदलने लगी. क्योकि जैसे-जैसे लोगों को पता चला की ये वही  सियालकोट के मशहूर दिग्गी मसाले वाले है, इस प्रकार लोग  इनकी दुकान पर मसाले खरीदने के लिए आने लगे. दोस्तों लोगों के इनके दुकान पर आने का सबसे प्रमुख कारण यह था की  इनके अपने हाथ से  बनाए गए मसालों की उच्च क्वालिटी का  होना था.

दिल्ली के विभिन्न न्यूज़पेपरों  में दिए गए विज्ञापनों से भी इनके स्वयं बनाये  मसाले को मशहूर होने में बहुत सहयोग किया  और इस तरह  इनका व्यापार तेज़ी से उचाईयों पर पहुच गया.

जिसका परिणाम यह हुआ की इन्होंने सन 1968 तक इन्होंने दिल्ली में ही अपनी मिर्च -मसालों की फैक्ट्री खोल दी और इनके फैक्ट्री का बना मसाला पूरे भारत के साथ दुसरे देशों में भी export होने लगे.

दोस्तों आज के समय में इनका "महशिआन दि हट्टी" जिसको MDH के नाम से भी जाना जाता है, जो की मसालों की दुनिया में एक विश्वस्तरीय ब्रांड बन चुका है. आज वे MDH के प्रबंध निदेशक और ब्रांड एम्बेसडर हैं. आपको बता दें की  MDH मसाले आज दुनिया के 100 से भी अधिक देशों में अपने 60 से अधिक प्रोडक्ट की सप्लाई  करता है. आज MDH के टॉप 3 प्रोडक्ट है – देग्गी मिर्च, चाट मसाला और चना मसाला. 


Dharampal Gulati Networth-

आपको बता दें की साल  2020 में इनकी कंपनी की पूरी  आय 3000 करोड़ रूपये  हो गया है जो की हर साल बढ़ता ही जा रहा है. इसके अलावा इनकी कंपनी आज भारत के अलावा यूरोप , कनाडा, यूएई एवं ब्रिटेन जैसे विश्व के कई हिस्सों में अपने मसालों का निर्यात करते हैं. इनके सम्बन्ध में एक और खास बात यह है की ये अपने वेतन की 90% धनराशि दान में दे देते है. मित्रों किसी का समय कब बदल जाये ये किसी को पता नहीं, इसका प्रतक्ष्य उदाहरण हैं धरमपाल जी. क्योकि  कभी मात्र  दो आना लेकर तांगा चलाने वाले महाशय धरमपाल जी का नाम आज भारत के अरबपतियों में गिना जाता  है. इन सब के पीछे इनकी  मेहनत, लगन और कार्य के प्रति पूरी ईमानदारी है. जिसकी बदौलत इन्होंने  अपने जीवन में यह मुकाम हासिल किया है.

मित्रों आपको बता दें कि महाशय धरमपाल जी एक उद्योगपति होने के साथ-साथ  एक अच्छे समाजसेवी भी है. इन्होंने समाज सेवा करने के उद्देश्य से कई अस्पताल और स्कूलों का निर्माण करवाया है. आज मसाला किंग के नाम से जाने जाने वाले  धरमपाल जी ने अपने जीवन का एक अपना मानना  है  जो की यह है - "दुनिया को अपने सर्वश्रेष्ठ दो और सर्वश्रेष्ठ स्वमेव ही आपके पास वापस आएगा."

दोस्तों  आज भी जब धरमपाल जी टीवी में हमें दिखाई देते हैं तो लोग इनके इतनी उम्र में भी इनके जीवन जीने की कला को देखकर इनसे प्रेरित होते रहते हैं. कई बार जब इनसे इनकी फिटनेस का राज़ के बारे में पूछा तो इन्होंने अनुशाशित जीवन  एवं संतुलित खान- पान को ही अपने स्वस्थ्य जीवन का राज़ बताया. इन्होंने बताया की ये प्रतिदिन 5 बजे ही उठ जाया करते हैं और दैनिक क्रियाओ को करने के बाद बाहर टहलने निकल जाते हैं  आगे ये बताते हैं की इनका ये आदत इनके बचपन से ही है. इसके अलावा ये योग और ध्यान भी इनकी रूचि रही है.


पुरस्कार (Achivement) - 

सन 2016 में एबीसीआई वार्षिक पुरस्कारों में इंडियन ऑफ़ दी ईयर से इन्हें नवाजा गया.

सन 2017 में लाइफटाइम अचीवमेंट के लिए उत्कृष्टता पुरस्कार से सम्मानित.




वर्ष 2017 में ही एफएमसीजी क्षेत्र में सबसे ज्यादा भुगतान करने वाले CEO (21 करोड़/वर्ष)

वर्ष 2019 में भारत सरकार ने इन्हें भारत के तीसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्मभूषण से अलंकृत किया.  


   

धरमपाल जी की मृत्यु (Dharampal Gulati Death or RIP) -

दोस्तों मसाला किंग के नाम से मशहूर श्री धरमपाल गुलाटी जी की मृत्यु 3 दिसंबर सन 2020 को 98 वर्ष की उम्र में हुई.


 दोस्तों आज का हमारा यह आर्टिकल आपको कैसा लगा, हमें बताना ना भूलें. अगर यह आर्टिकल आपको  पसंद आया हो तो आप इसे अपने दोस्तों एवं रिश्तेदारों को शेयर कीजिए ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग हमारे देश के मसाला किंग के नाम से मशहुर धरमपाल गुलाटी जी के जीवन के बारे में जान सकें. 


धन्यवाद.






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छोटी सी हरड़ के 20 फायदे जानकर आप भी हो जाएंगे हैरान | Harad ke Fayde in Hindi

20 Benefits of Terminalia Chebula -

दोस्तों जब भी हमारे पेट  में गैस या कब्ज की परेशानी होती है तो हमारे घर के बुजुर्ग हमें हरड़ खाने की सलाह देते हैं। लेकिन क्या आपको पता है की ये छोटा सा हरड़ सिर्फ गैस जैसी बीमारियों में ही आराम नहीं देता बल्कि इसके कई और फायदे भी हैं। अगर दूसरी भाषा में कहें तो इसे औषधि कहना भी गलत नहीं होगा।आपको बता दें की  हरड़ दो प्रकार के होते हैं− बड़ी हरड़ और छोटी हरड़

दोस्तों  हरड़ को आयुर्वेद में बहुत ही गुणकारी माना गया है. चरक संहिता में जिस पहले औषधि के बारे में बताया गया है वह हर्रे या हरड़  ही है. बहुत पहले से ही आप और हम अपने घरो में इसका उपयोग कई तरीकों से करते आए हैं. दूसरी तरफ हरड़ पेट के रोगों में विशेष रूप से फायदेमंद है जैसे बवासीर, कब्ज़ एवं पेट के कीड़ो को ख़त्म करने में उपयोग किया जाता है.

जहाँ बड़ी हरड़ के भीतर सख्त गुठली होती है वहीँ  छोटी हरड़ में किसी प्रकार की कोई गुठली नहीं होती है। वास्तव में वे फल जो गुठली पैदा होने से पहले ही तोड़कर सुखा लिए जाते हैं उन्हें ही छोटी हरड़ की श्रेणी में रखा जाता है। क्या आपको पता है की हरड़ को हरीतकी भी कहा जाता है। यह न केवल हमारे स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है, इसके अलावा दुसरे लाभ यानि की इसके सौन्दर्य लाभ भी कुछ कम नहीं है। दोस्तों इस छोटी सी हरड़ के बड़े स्वास्थ्य लाभ क्या- क्या हैं  इसके बारे में सबको  जानना चाहिए।




आज के इस पोस्ट में हम आप लोगों को  हरड़ के 10 ऐसे फायदों के बारे में बताएँगे जो  हमारे स्वास्थ्य के लिए  बहुत लाभकारी हैं. तो चलिए शुरू करते हैं -


1. अगर आपके शरीर के किसी भाग पर फंगल एलर्जी या संक्रमण हो गया है तो ऐसी स्थिति में हरड़ के फल और हल्दी से तैयार लेप प्रभावित भाग पर दिन में दो बार लगाएं, त्वचा के पूरी तरह सामान्य होने तक इस लेप का इस्तेमाल करते  रहें ।


2. दोस्तों हरड़ का काढ़ा त्वचा संबंधी एलर्जी में लाभकारी है। हरड़ के फल को पानी में उबालकर काढ़ा बनाएं और इसका सेवन दिन में दो बार नियमित रूप से करने पर जल्द आराम मिलता है।


3. अपने बालों को स्वस्थ्य बनाने के लिए हरड़ के फल को नारियल तेल में उबालकर (हरड़ पूरी तरह घुलने तक) लेप बनाएं और इसे बालों में लगाएं या फिर प्रतिदिन 3-5 ग्राम हरड़ पावडर एक गिलास पानी के साथ सेवन करें।

   

4. दोस्तों हरड़ एक प्रकार का स्वास्थ्यवर्धक टॉनिक  है, जिसके प्रयोग से हमारे बाल काले, चमकीले और आकर्षक दिखने लगते हैं।

   

5. अगर आपके शरीर के किसी भाग पर एलर्जी हो गयी है तो उस  प्रभावित भाग की धुलाई भी इसके  काढ़े से की जा सकती है।


6. अगर आपके मुंह में सूजन हो गया है तो ऐसी स्थिति में  हरड़ के गरारे करने से काफी फायदा मिलता है।


7. हरड़ का पल्प कब्ज से राहत दिलाने में भी गुणकारी होता है। इस पल्प को चुटकीभर नमक के साथ खाएं या फिर 1/2 ग्राम लौंग अथवा दालचीनी के साथ इसका सेवन करें।


8. हरड़ का एक और लाभ यह है की इसके लेप को पतले छाछ के साथ मिलाकर गरारे करने से मसूढ़ों की सूजन में भी आराम मिलता है।


9. इसका एक और महत्वपूर्ण फायदा यह है की हरड़ का चूर्ण दांत दर्द  वाले स्थान पर लगाने से भी तकलीफ कम होती है।

   

10. हरड़ का नियमित रूप से सेवन, वजन कम करने में सहायक है। यह पाचन में सहायक होने के साथ ही, गैस, एसिडिटी और अन्य समस्याओं से राहत देती है और धीरे-धीरे मोटापा कम करती है।


11. खाना खाने के बाद अगर आपके पेट में भारीपन महसूस हो रहा है , तो इस स्थिति में  इसका सेवन करने से आराम मिलता है.


12. हरड़ का सेवन करने से खुजली  या फंगल इन्फेक्शन जैसी समस्या भी दूर हो जाती है.
नोट-  हरड़ का सेवन गर्भवती महिलाओं को नहीं करना चाहिए.


13. हरड़ का चूर्ण व पुराने  गुड़ को समान मात्रा में मिलाकर दिन में तीन बार सेवन करने से पीलिया जैसा  बड़ा रोग भी दूर हो जाता है. इसके सेवन की मात्रा सिर्फ 10 से 20 ग्राम तक ही रखें.


14. हरड़, नीम की छाल का चूर्ण, वायविडंग और गुड़ को एक साथ मिलाकर सेवन करने से हमारे पेट के कीड़ों का नाश हो जाता है.


15. हरड़ के  चूर्ण को समभाग गुड़ के साथ सुबह-शाम लेने  से बवासीर जैसी बीमारी भी ठीक हो जाती है.


16. हरड़ के चूर्ण को एक चम्मच की मात्रा में दो किशमिश के साथ सेवन  करने से एसिडिटी की समस्या  दूर हो जाती है.

17.  हरड़  हमारे भूख को बढ़ाने में भी बहुत लाभकारी सिद्ध होता है. इसके लिए हमें इसे चबाकर खाना होगा.

ये भी पढ़ें- सर्दियों में होने वाले जायफल के चमत्कारी फायदे | Benefits of Nutmeg in Hindi



18. 5 ग्राम हरड़ का चूर्ण 40 मि.ली. गोमूत्र में मिलाकर हर रोज़ पीने व खानपान में परहेज़ रखने से कुष्ठ जैसा गंभीर रोग भी ख़त्म हो जाता है.

19. अगर आपको खांसी की समस्या हो गयी है तो इस स्थिति में  हरड़, कालीमिर्च एवं  पीपरि तीनों का सामान भाग में चूर्ण 3-3 ग्राम की मात्रा में दिन में तीन बार गुड़ के साथ खाएं. इससे कुछ ही दिनों में लाभ मिलेगा.

20. हरड़ या हर्रे के चूर्ण को 5 ग्राम शहद के साथ सुबह-शाम लेने से मलेरिया में फ़ायदा होता है.


तो दोस्तों आज का यह पोस्ट आपको कैसा लगा, आप हमें अपने कमेंट के माध्यम से  जरुर बताएं. 

धन्यवाद.
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Wednesday, 2 December 2020

सर्दियों में होने वाले जायफल के चमत्कारी फायदे | Benefits of Nutmeg in Hindi

दोस्तों, ठण्ड की शुरुवात हो चुकी है  और इन सर्दियों के मौसम में ज्यादातर लोगों को सर्दी – जुकाम की परेशानी शुरू हो जाती है। जिसके बाद हमें डॉक्टर के चक्कर लगने लगते हैं। लेकिन अगर हम आयुर्वेद का सही से पालन एवं घर के बुजुर्गों का कहना  माने तो हम इन बीमारियों को  घर की रसोई में मौजूद विभिन्न प्रकार के मसालों से ही छुटकारा पा सकते है। दोस्तों हमारी  और आपकी दादी या नानी अक्सर सर्दियों के मौसम में जायफल का प्रयोग करने के लिए कहती रही होंगी या कहती हैं। इसे हम मसाले के रूप में तो प्रयोग करते हैं, लेकिन आपको इसके बारे में जानकर हैरानी होगी की जायफल के और भी बहुत से औषधीय गुण हैं, जिनको  जानना जरूरी है। दोस्तों क्या आपको पता है मिरिस्टिका नामक वृक्ष से जायफल तथा जावित्री प्राप्त होती है. तो चलिए जानते हैं जायफल के फायदों के बारे में..


1. सर्दी-खांसी-

सुबह-सुबह खाली पेट आधा चम्मच जायफल चाटने से गैस्ट्रिक, सर्दी-खांसी की समस्या नहीं सताती है। पेट में दर्द होने पर चार से पांच बूंद जायफल का तेल चीनी के साथ लेने से आराम मिलता है।


2. मुहांसों में फायदेमंद-

मुहांसे होने पर जायफल को दूध में घिसकर चेहरे पर लेप लगाने से मुहांसे समाप्त हो जाते हैं।


3. सर्दी से सुरक्षा-

सर्दी के मौसम के दुष्प्रभाव से बचने के लिए जायफल को थोड़ा सा खुरचिये, चुटकी भर कतरन को मुंह में रखकर चूसते रहिये। यह काम आप पूरे जाड़े भर एक या दो दिन के अंतराल पर करते रहिये। यह शरीर की स्वाभाविक गर्मी की रक्षा करता है, इसलिए ठंड के मौसम में इसे जरूर प्रयोग करना चाहिए।


4.पाचन तंत्र-

आमाशय के लिए उत्तेजक होने से आमाशय में पाचक रस बढ़ता है, जिससे भूख लगती है। आंतों में पहुंचकर वहां से गैस हटाता है।




5. बढ़ाए भूख-

आपको किन्हीं कारणों से भूख न लग रही हो तो चुटकी भर जायफल की कतरन चूसिये इससे पाचक रसों की वृद्धि होगी और भूख बढ़ेगी, भोजन भी अच्छे तरीके से पचेगा।


6. दस्त और पेट दर्द-

अगर किसी कारणवश आपको दस्त आ रहे हों या पेट दर्द कर रहा हो तो जायफल को भून लीजिये और उसके चार हिस्से कर लीजिये। एक हिस्सा मरीज को चूस कर खाने को कह दीजिये। सुबह शाम एक-एक हिस्सा खिलाएं।


7. लकवा वाले अंगों में फूंकता है नई जान-

लकवा का प्रकोप जिन अंगों पर हो उन अंगों पर जायफल को पानी में घिसकर रोज लेप करना चाहिए, दो माह तक ऐसा करने से अंगों में जान आ जाने की संभावना देखी गयी है।


8. प्रसव बाद कमर दर्द में फायदा-

प्रसव के बाद अगर कमर दर्द खत्म नहीं हो रहा है तो जायफल पानी में घिसकर कमर पर सुबह-शाम लगाएं, एक सप्ताह में ही दर्द गायब हो जाएगा।


9. फटी एड़ियों पर लगाएं-

अगर आपकी एडियाँ फट रही हैं तो फटी एडियों के लिए जायफल महीन पीसकर बिवाइयों में भर दीजिये। 12-15 दिन में ही पैर भर जायेंगे।


10. हृदय को बनाए मजबूत-

जायफल का एक और जबर्दस्त फायदा है की इसके  चूर्ण को शहद के साथ खाने से ह्रदय मज़बूत होता है। पेट भी ठीक रहता है।


11. जी मिचलाए तो पिएं जायफल मिक्स पानी-

अगर आपको जी मिचलाने की समस्या है तो तो इसके लिए आप जायफल को थोड़ा सा घिस कर पानी में मिला कर पी लेने से यह समस्या नष्ट हो जाती है।


12. मिटा देता है पुराने घावों के निशानों को-

मित्रों कई बार त्वचा पर कुछ चोट के निशान रह जाते हैं तो कई बार त्वचा पर नील और इसी तरह के घाव पड़ जाते हैं। जायफल में सरसों का तेल मिलाकर मालिश करें। जहां भी आपकी त्वचा पर पुराने निशान हैं, उस पर  रोजाना मालिश से कुछ ही समय में वे हल्के होने लगेंगे। जायफल से मालिश से रक्त का संचार भी होगा और शरीर में चुस्ती-फुर्ती भी बनी रहेगी।


13. बढ़ाता है आंखों की रौशनी-

जायफल को थोडा सा घिसकर काजल की तरह आंख में लगाने से आँखों की ज्योति बढ़ जाती है और आंख की खुजली और धुंधलापन ख़त्म हो जाता है।


14. मिटाए चेहरे की झाईयां-

आपके चेहरे पर या फिर त्वचा पर पड़ी झाईयों को हटाने के लिए आपको जायफल को पानी के साथ पत्थर पर घिसना चाहिए। घिसने के बाद इसका लेप बना लें और इस लेप का झाईयों की जगह पर इस्तेमाल करें, इससे आपकी त्वचा में निखार भी आएगा और झाईयों से भी निजात मिलेगी।


15. बार-बार लघुशंका जाने से मिलेगा छुटकारा-

अगर किसी को अगर बार-बार पेशाब जाना पड़ता है तो उसे जायफल और सफ़ेद मूसली 2-2 ग्राम की मात्रा में मिलाकर पानी से निगलवा दीजिये, दिन में एक बार, खाली पेट, 10 दिन लगातार।


16. झुर्रियों का है दुश्मन-

आप इसका उपयोग चेहरे की झुर्रियां मिटाने के लिए  जायफल को पीसकर उसका लेप बनाकर झुर्रियों पर एक महीने तक लगाएंगे तो आपको जल्द ही झुर्रियों से निजात मिलेगी। जायफल, काली मिर्च और लाल चन्दन को बराबर मात्रा में लेकर पीसकर चेहरे पर लगाने से चेहरे की चमक बढ़ती है, मुहांसे ख़त्म होते हैं।


17. आंखों के नीचे से मिटाए काला घेरा-

आंखों के नीचे काले घेरे हटाने के लिए रात को सोते समय रोजाना जायफल का लेप लगाएं और सूखने पर इसे धो लें। कुछ समय बाद काले घेरे हट जाएंगे।


18. दूर भगाए अनिद्रा को-

अनिद्रा का स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है और इसका त्वचा पर भी दुष्प्रभाव पड़ता है। त्वचा को तरोताजा रखने के लिए भी जायफल का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके लिए आपको रोजाना जायफल का लेप अपनी त्वचा पर लगाना होगा। इससे अनिद्रा की शिकायत भी दूर होगी और त्वचा भी तरोताजा रहेगी।


19. दांत दर्द को करे तुरंत ठीक-

दांत में दर्द होने पर जायफल का तेल रुई पर लगाकर दर्द वाले दांत या दाढ़ पर रखें, दर्द तुरंत ठीक हो जाएगा। अगर दांत में कीड़े लगे हैं तो वे भी मर जाएंगे।


20. बच्चों की करे सुरक्षा-

सर्दी के दिनों में यदि बच्चों को सर्दी-जुकाम हो जाए तो जायफल का चूर्ण और सोंठ का चूर्ण बराबर मात्रा में लीजिये, फिर 3 चुटकी इस मिश्रण को गाय के घी में मिलाकर बच्चे को सुबह शाम चटायें।


21. दूध पाचन-

शिशु का दूध छुड़ाकर ऊपर का दूध पिलाने पर यदि दूध पचता न हो तो दूध में आधा पानी मिलाकर, इसमें एक जायफल डालकर उबालें। इस दूध को थोडा ठण्डा करके कुनकुना गर्म, चम्मच कटोरी से शिशु को पिलाएं, यह दूध शिशु को हजम हो जाएगा।


22. मुंह के छालों को करे ठीक-

अगर आपके मुह में छाले पड़ गए हैं तो इस स्थिति में जायफल को पानी में पकाकर उस पानी से गरारे करें। मुंह के छाले ठीक होंगे, गले की सूजन भी जाती रहेगी।


23. सिर दर्द-

अगर आपके सिर में बहुत तेज दर्द हो रहा हो तो बस जायफल को पानी में घिस कर लगाएं।इससे आपको आराम मिलेगा.


दोस्तों  हमारा आजका यह पोस्ट आपको कैसा लगा, हमें अपने कमेंट के माध्यम से बताना ना भूले . अगर यह पोस्ट आपको पसंद आयी हो तो इस पोस्ट को अपने दोस्तों एवं रिश्तेदारों को शेयर कीजिए जिससे ज्यादा से ज्यादा लोग जायफल के विभिन्न फायदों के बारे में जान सकें.

धन्यवाद्.


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Saturday, 7 November 2020

प्रधानमंत्री मुद्रा लोन योजना की पूरी जानकारी हिंदी में | Pradhanmantri Mudra Loan Yojana 2020

प्रधानमंत्री मुद्रा लोन योजना (Pradhanmantri Mudra Loan Yojana In Hindi) - 

नमस्कार दोस्तों, जैसा की आप सबको पता है की भारत सरकार ने समय- समय  पर भारत के नागरिकों के लिए कई योजनाओं का संचालन करती रही है | विशेष रूप से हमारे वर्तमान  प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने देश के जरूरतमंद लोगों की मदद करने के लिए मौजूदा समय में कई योजनाओं का संचालन कर रहे हैं | प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा चलाई जा रही इन्हीं योजनाओं में से एक योजना 'प्रधानमंत्री मुद्रा लोन योजना' है.

इस योजना को "Mudra Yojana" के नाम से भी जाना जाता है. इस योजना को लाने का मुख्य उद्देश्य हमारे देश के नागरिकों को कम से कम  ब्याज दर पर लोन उपलब्ध कराना है. जिससे भारत का कोई भी नागरिक अपना खुद का व्यापार आसानी शुरू कर सके एवं आत्मनिर्भर बन सके.

मुद्रा लोन योजना (Mudra Loan Yojana) के अंतर्गत भारत सरकार द्वारा 10 लाख रुपये  तक का लोन प्रदान किया जाता है. सरकार द्वारा चलाए जा रहे मुद्रा लोन भारत के नागरिकों के लिए तीन प्रकार से उपलब्ध हैं – शिशु लोन , किशोर लोन और तरुण लोन . अपनी आवश्यकता  के अनुसार कोई भी नागरिक इस योजना का लाभ ले  सकता है. आप इससे भामाशाह मुद्रा बैंक योजना , आधार कार्ड लोन , लोन कैसे प्राप्त करें, भामाशाह कार्ड से लोन कैसे ले , प्रधान मंत्री मुद्रा योजना , मुद्रा लोन कैसे ले की जानकारी प्राप्त करेंगे.

दोस्तों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने  देश के छोटे और मध्यम आकार के उद्योगों को बढ़ावा देने और उनकी वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए प्रधानमंत्री मुद्रा लोन योजना (Pradhan Mantri Mudra Loan Yojana) का संचालन कर रहे हैं.  इस योजना के अंतर्गत भारत के जरूरतमंद व्यक्तियों को कम ब्याज दर पर लोन प्रदान किया जाता है जिससे की वह अपना कोई भी व्यापर शुरू कर सकें.

यदि आप अपना खुद का कोई व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं, लेकिन इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए आपके पास पर्याप्त धनराशि नहीं है तो आप भारत सरकार द्वारा चलाई जा रही  प्रधानमंत्री मुद्रा लोन योजना का लाभ उठा सकते  हैं . इस योजना के अंतर्गत  सरकार द्वारा लोन प्राप्त करके आप अपने व्यवसाय को ठीक तरह से  चला सकते हैं.

आपको बता दें कि भारत सरकार देश के छोटे संगठन, कंपनी और व्यापारियों की वित्तीय सहायता करने के लिए इस  योजना का संचालन किया है. जिसके अंतर्गत कोई भी नागरिक भारत सरकार द्वारा वित्तीय सहायता प्राप्त कर सकता है. मुद्रा का पूरा नाम “माइक्रो यूनिट्स डेवलपमेंट एंड रिफाइनेंस एजेंसी लिमिटेड” है. 

यह एक प्रकार की संस्था है  जिसको भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के देख- रेख  में भारत सरकार द्वारा संचालित किया जा रहा है. इस संस्था का मुख्य लक्ष्य देश के कारपोरेट और छोटे व्यवसाइयों को वित्तीय सहायता प्रदान करना है .





प्रधानमंत्री मुद्रा लोन योजना के फायदे (Benefits of Pradhan Mantri Mudra Loan Yojna) -

दोस्तों आपको बता दें की प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा चलाई जा रही मुद्रा योजना के लाभ कुछ इस प्रकार हैं जो निम्नलिखित हैं.

1. इस योजना का सबसे अच्छा  लाभ यह है कि इस योजना के अंतर्गत नागरिकों को बिना किसी गारंटी के लोन        उपलब्ध कराया जाता है |

2. इस योजना के अंतर्गत मिलने वाले लोन पर किसी भी प्रकार की कोई भी प्रोसेसिंग फीस नहीं लगती है.

3. मुद्रा लोन योजना के अंतर्गत मिलने वाले लोन की भुगतान अवधि को 5 साल  तक बढ़ाया जा सकता है जिससे      लोगों को काफी आसानी हो जाती है.

4. इस  योजना के अंतर्गत 50000 रूपये से लेकर 10 लाख रूपये  तक का लोन प्राप्त किया जा सकता है .

5. इस योजना के अंतर्गत मिलने वाले लोन की एक और अच्छी बात यह है की इसकी  ब्याज दर अन्य बैंक लोन        से कम होती है.


प्रधान मंत्री मुद्रा लोन योजना की ब्याज दर( Pradhanmantri  Mudra Loan Interest Rate) -

मुद्रा लोन के तहत मिलने वाले लोन पर  जो  ब्याज दर लगाई जाती है जो निम्नलिखित है -


  सीमा                                    सूक्ष्म                                      लघु

1. 50000/- से अधिक       एमसीएलआर +एसपी                 (एमसीएलआर +एसपी)+0.50%

2. 50000/- से अधिक      (एमसीएलआर +एसपी)+0.50%   (एमसीएलआर +एसपी)+0.70%

और रु. 2 लाख तक                                                                

3. 2 लाख से अधिक        (एमसीएलआर +एसपी)+0.70%   (एमसीएलआर +एसपी)+0.85%

और 10 लाख तक


प्रधानमंत्री मुद्रा लोन योजना के प्रकार(Types of Pradhan Mantri Mudra Loan Yojna)- 

दोस्तों भारत सरकार द्वारा चलाई जा रही प्रधानमंत्री मुद्रा लोन योजना  के प्रकार और उनके अंतर्गत मिलने वाली धनराशी  कुछ इस प्रकार हैं -




1. शिशु ऋण -

इसके अंतर्गत कोई भी व्यक्ति जो अपना छोटा व्यापर शुरू  करना चाहता है  या  आपने चल रहे व्यापर को आगे बढ़ाना चाहता है  तो इसके अंतर्गत 10,000 रूपये से 50,000 रूपये तक का लोन प्राप्त कर सकता है . इसके अंतर्गत ब्याज दर 10 से 12% तक रहती है |

2. किशोर ऋण -

 यह  लोन उन व्यक्तियों के लिए है , जो अपने व्यापर  को और अधिक विस्तार  देना  चाहते हैं . इसके अंतर्गत 50,000 से लेकर 5 लाख रूपये  तक का लोन प्राप्त किया जा सकता है . इस लोन के अंतर्गत ब्याज दर 14 से 70% तक रहती है .

3. तरुण ऋण -

 इस लोन  के अंतर्गत वह सभी छोटे कारोबारी ऋण प्राप्त कर सकते हैं  जो अपने व्यापर  को और अधिक विस्तार देना चाहते हैं.  इसके अंतर्गत कोई भी नागरिक 10 लाख  रुपए तक का लोन प्राप्त कर सकता है. इस लोन के अंतर्गत ब्याज दर 16 प्रतिशत से शुरू होती हैं.


मुद्रा कार्ड (Mudra Card)-

दोस्तों मुद्रा योजना के अंतर्गत सभी लोन आवेदनकर्ताओं को बैंक द्वारा प्रधानमंत्री मुद्रा लोन योजना में लोन देते समय मुद्रा कार्ड भी प्रदान किया जाता है. यह कार्ड देखने में ATM कार्ड की तरह ही होता है. इस कार्ड के द्वारा आवेदनकर्ता 10% तक  की धनराशि खर्च कर सकता है .




इससे आप कहीं भी किसी भी एटीएम से पैसे निकालने और भुगतान करने के लिए उपयोग कर सकते हैं. मुद्रा कार्ड  का मुख्य उद्देश्य व्यापारियों की वर्किंग कैपिटल (चालू पूंजी) की सभी जरूरतों को पूरा करना है.


प्रधानमंत्री मुद्रा लोन योजना  के लिए आवश्यक दस्तावेज ( Important Documents of Pradhan Mantri Mudra Loan Yojana) -

यदि आप किसी भी बैंक में प्रधानमंत्री मुद्रा लोन योजना के लिए आवेदन करना चाहते हैं तो आपको  कुछ आवश्यक दस्तावेजों की जरूरत पड़ेगी-

1. पहचान प्रमाण पत्र , वोटर ID , ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड, आधार कार्ड, पासपोर्ट, पहचान का  प्रमाण पत्र, टेलीफोन बिल, इलेक्ट्रिसिटी बिल, प्रॉपर्टी टैक्स स्लिप 

2. जाति प्रमाण पत्र

3. व्यवसाय का प्रमाण पत्र

4. बैंक अकाउंट का स्टेटमेंट यदि आप उस बैंक के मौजूदा ग्राहक हैं तो |

5. प्रोजेक्ट रिपोर्ट

6. फोटो


प्रधानमंत्री मुद्रा लोन योजना प्रदान करने वाले बैंक और संस्थाएं (Pradhan Mantri Mudra Loan Yojana Bank & Organisation) -

दोस्तों इस योजना के तहत लगभग सभी भारतीय बैंक नागरिकों को मुद्रा योजना के अंतर्गत ऋण उपलब्ध कराते हैं . इस योजना के अंतर्गत जिन  बैंको से लोन प्राप्त किया जा सकता है उनके नाम निम्न हैं-

17 निजी बैंकों से

27 पब्लिक बैंक से

31 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों से

4 सहकारी बैंकों से

36 माइक्रोफाइनेंस संस्थाओं से

25 गैर बैंकिंग वित्तीय संस्थान से


ये भी पढ़ें-  सुकन्या समृद्धि योजना की पूरी जानकारी हिंदी में | Sukanya Samriddhi Yojna in Hindi


मुद्रा लोन के लिए आवेदन कैसे करें, मुद्रा लोन कैसे मिलेगा -

यदि आप किसी भी प्रकार की  शिशु, किशोर और तरुण  ऋण प्राप्त करना चाहते हैं तो आपको यहां पर बताए गए कुछ स्टेप्स को फॉलो करना होगा जिससे आप बड़ी ही आसानी से ऋण प्राप्त कर सकेंगे –

1. सबसे पहले आवेदनकर्ता को अपने क्षेत्र में मुद्रा लोन उपलब्ध कराने वाली बैंकों में से किसी एक बैंक का चुनाव      करना होगा .

2. इसके पश्चात आवेदनकर्ता को अपने नजदीकी बैंक में जाना होगा जिस बैंक से उसे लोन लेना है .

3. बैंक में पहुंचने के पश्चात आपको अपने व्यवसाय के विचार और पूरी तरह से सही सही भरा हुआ फार्म साथ में      पहचान का प्रमाण पत्र , व्यवसाय का  प्रमाण पत्र और हाल ही की पासपोर्ट साइज फोटो और साथ में अन्य            जरुरी दस्तावेज देने होंगे.

4. बैंक द्वारा सभी आवश्यक चरणों को पूरा करने के पश्चात यदि आवेदनकर्ता लोन प्राप्त करने का पात्र पाया          जाएगा तो उसे लोन उपलब्ध करा दिया जाएगा. इस प्रक्रिया में कुछ दिन का समय लग सकता है.


प्रधानमंत्री मुद्रा लोन योजना वेबसाइट , हेल्पलाइन डिटेल (Pradhan Mantri Mudra Loan Yojana Website, Toll Free No ) -

यदि आपको मुद्रा लोन योजना के अंतर्गत किसी प्रकार की सहायता की जरूरत है तो आप नीचे बताए गए – फोन नंबर ईमेल वेबसाइट आदि  की सहायता से इसके बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं और अपनी समस्याओं का समाधान प्राप्त कर सकते हैं.

Mudra Loan Yojana Website – http://www.mudra.org.in/

Mail – [email protected]

Toll Free Call – 1800 180 1111 call – 1800 11 0001


प्रधानमंत्री मुद्रा लोन योजना  के लिए  शिकायत (हेल्प लाइन ) नंबर (Pradhan Mantri Mudra Loan Yojana Helpline No) -

आपको प्रधानमंत्री मुद्रा लोन योजना  के लिए सभी राज्यों के शिकायत और हेल्प लाइन नंबर दिए जा रहे हैं , जहाँ से आप आसानी से प्रधानमंत्री मुद्रा लोन योजना से जुडी किसी भी प्रकार की जानकारी , सहायता और शिकायत कर सकतें हैं .


 Name Of State                             Toll Free Number

अंडमान और निकोबार आइलैंड्स      18003454545

आंध्र प्रदेश                                      18004251525

अरुणाचल प्रदेश                              18003453988

असम                                             18003453988

बिहार                                             18003456195

चंडीगढ़                                          18001804383

छत्तीसगढ                                    18002334358

दादरा और नगर हवेली                   18002338944

दमन और दीव                               18002338944

गोवा                                             18002333202

गुजरात                                         18002338944

हरियाणा                                       18001802222

हिमाचल प्रदेश                              18001802222

जम्मू और कश्मीर                        18001807087

झारखंड                                       1800 3456 576

कर्नाटक                                      180042597777

केरल                                          180042511222

लक्षद्वीप                                    0484-2369090

मध्य प्रदेश                                 18002334035

महाराष्ट्र                                    18001022636

मणिपुर                                     18003453988

मेघालय                                    18003453988

मिजोरम                                   18003453988

नागालैंड                                   18003453988

दिल्ली                                      18001800124

उड़ीसा                                      18003456551

पुडुचेरी                                     18004250016

पंजाब                                      18001802222

राजस्थान                                18001806546

सिक्किम                                 18003453988

तमिल नाडू                              18004251646

तेलंगाना                                 18004258933

त्रिपुरा                                     18003453344           

उत्तर प्रदेश                            18001027788
उत्तराखंड                              18001804167
पश्चिम बंगाल                       18003453344


दोस्तों हमारा आज का पोस्ट आपको कैसा लगा, आप कमेंट के माध्यम से हमें जरुर बताईये . अगर यह पोस्ट आपको पसंद आयी हो तो इस पोस्ट को अपने दोस्तों , रिश्तेदारों को शेयर करना ना भूलें जिससे ज्यादा से ज्यादा लोगों तक यह पोस्ट पहुच सके और भारत सरकार के इस बेहद महात्वाकांक्षी योजना का लाभ ज्यादा से ज्यादा लोग उठा सकें.

धन्यवाद.
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Thursday, 24 September 2020

सुकन्या समृद्धि योजना की पूरी जानकारी हिंदी में | Sukanya Samriddhi Yojna in Hindi

 Sukanya Samriddhi Yojana

नमस्कार दोस्तों, सुकन्या समृद्धि योजना का  शुभारम्भ  भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी  के नेतृत्व में 2 दिसंबर 2014 में किया गया था. इस महात्वाकांक्षी योजना को लागू करने का मुख्य उद्देश्य हमारे देश में नारी शक्ति को समृद्ध और सशक्त बनाना है.

सुकन्या समृद्धि योजना भारत के ऐसे नागरिकों को के लिए है, जो अपने बेटी के उज्जवल भविष्य के लिए बचत करना चाहते हैं. इस योजना के अंतर्गत वह छोटी - छोटी बचत करके अपने बेटी के चमकदार  भविष्य एवं अच्छी शिक्षा के माध्यम से अपनी बेटी  के सपनों को पूरा कर सकते हैं. सुकन्या समृद्धि योजना देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना के अंतर्गत चलाई जा रही है जो की मात्र कुछ ही समय में भारत के लोगों के बीच खूब सफल हो रहा है. 

आपको बता दें कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य हमारे देश  में लड़के और लड़कियों के फर्क को  दूर करना है. 

सुकन्या समृद्धि योजना क्या है ? 

इस योजना के अंतर्गत आप  खाता कैसे खोल सकते हैं ?

सुकन्या समृद्धि योजना के नियम 2020 क्या है ? 

सुकन्या समृद्धि योजना इंटरेस्ट रेट 2020  , सुकन्या योजना डाकघर , सुकन्या समृद्धि योजना 2020, सुकन्या समृद्धि योजना अपडेट , इन सब की पूरी जानकारी स्टेप बाई स्टेप  प्राप्त करने के लिए आपको यह आर्टिकल अंत तक  पढ़ना होगा. क्योकि इस पोस्ट में हम आपको इसकी पूरी जानकारी देने वाले हैं तो दोस्तों बने रहिए हमारे इस पोस्ट के साथ.




हमारे देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के द्वारा "बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ" योजना के अंतर्गत सुकन्या समृद्धि योजना (Sukanya Samriddhi Yojana) की शुरुआत 2 दिसंबर 2014 को किया गया था. इसके अंतर्गत जन्म से लेकर 10 वर्ष उम्र तक की बेटियों का खाता  खोला जाता है. सुकन्या समृद्धि योजना के अंतर्गत भारत का  कोई भी नागरिक अपने किसी नजदीकी पोस्ट ऑफिस अथवा बैंक में खाता खुलवा सकता है.

इस योजना के अंतर्गत न्यूनतम 1000 रूपये की धनराशि बैंक या पोस्ट ऑफिस में जमा करनी होती है. इस योजना  का मुख्य उद्देश्य हमारे देश के लड़कियों को आगे बढ़ाना है. इसके अलावा बेटियों की शिक्षा, विवाह योग्य होने पर पैसों की कमी ना आए , इसके लिए उनके माता-पिता द्वारा छोटी-छोटी धनराशि से  इस योजना के अंतर्गत बचत कर सकते हैं.

इस योजना के अंतर्गत जब बेटी 18 वर्ष की हो जायेगी तब वह पढ़ाई के लिए वह इस खाते से पैसे निकाल सकती है, और 21 साल  की उम्र होने पर उसके विवाह के समय इस योजना  के अंतर्गत जमा संपूर्ण धनराशि निकालकर अपने विवाह आदि में  उपयोग कर सकती हैं . भारत सरकार के इस योजना  से हमारे देश के बेटियों को काफी प्रोत्साहन मिला  है. जिसकी मदद से उनको आगे बढ़ने में काफी आसानी हो जाएगी और देश के विकास में हमारी बेटियां भी भागीदार होंगी. इसके माध्यम से देश में नारियों की स्थिति और अधिक सशक्त एवं सुदृढ़ होगी |


सुकन्या समृद्धि योजना 2020 के अंतर्गत कौन- कौन लोग खाता खोल सकते हैं –

सुकन्या समृद्धि योजना  के अंतर्गत केवल जन्म से लेकर 10 वर्ष की उम्र तक की लड़की के नाम पर ही अकाउंट खोला जा सकता है. इसका अर्थ यह है की  इस योजना के अंतर्गत 10 वर्ष से ऊपर लड़कियों का खाता नहीं खोला जा सकता है. इसके अलावा इस  योजना का लाभ अनिवासी भारतीय (एन आर आई) नहीं प्राप्त कर सकते हैं | यदि कोई बेटी, सुकन्या समृद्धि खाता खोलने के बाद एन आर आई  बन जाती है तो उसे अपना सुकन्या समृद्धि योजना का खाता बंद करना होगा . यदि किसी कारण वश खाता बंद नहीं किया जाता है  तो एन आर आई बनने के बाद  इस खाते में किसी प्रकार का ब्याज नहीं प्रदान किया जाएगा.



भारत सरकार के इस महात्वाकांक्षी योजना के अंतर्गत माता-पिता अथवा कानूनी संरक्षक अपनी बेटी के लिए खाता खोल सकते हैं.  इसके साथ ही गोद ली हुई बेटी के लिए भी सुकन्या समृद्धि योजना  के अंतर्गत खाता खोल सकते हैं.


सुकन्या समृद्धि योजना के तहत आप कितने खाते खोल सकते हैं –

दोस्तों  हम देखते हैं की अक्सर यह सवाल पूछा जाता है कि सुकन्या समृद्धि योजना  के अंतर्गत आप कितने खाते खोल  सकते हैं . तो आपको बता दें कि इस योजना के तहत आप कितने अकाउंट खोल सकते हैं इसके बारे में आप इस प्रकार  समझ सकते हैं –


सुकन्या समृद्धि योजना के अंतर्गत आप एक कन्या के नाम से मात्र  एक ही खाता खोल सकते हैं.

कन्या अथवा बेटी के माता - पिता या कोई अन्य कानूनी अभिभावक इस योजना के अंतर्गत दो अकाउंट खोल सकते हैं.

यदि किसी माता-पिता की पहली संतान कन्या है और दूसरी संतानें भी  दो जुड़वा कन्यायें हैं, तब इस स्थिति में वह तीसरा अकाउंट खुलवा  सकते हैं. इस स्थिति में बेटी के माता-पिता को मेडिकल प्रमाण पत्र भी जमा करना होगा.

सुकन्या समृद्धि योजना के अंतर्गत खाता खोलने के लिए आवश्यक दस्तावेज या प्रमाणपत्र  –

सुकन्या समृद्धि योजना के अंतर्गत खाता खोलने के लिए कुछ आवश्यक प्रमाणपत्रों  की आवश्यकता होती  है  जो कि निम्न  है –

1. सुकन्या समृद्धि योजना के अंतर्गत खाता खोलने के लिए आपको बेटी का जन्म प्रमाण पत्र की आवश्यकता     होगी.

2. इस योजना के लिए खाता में पैसे जमा करने वाले व्यक्ति का परिचय पत्र की भी आवश्यकता होगी.

3. जमाकर्ता का एड्रेस प्रूफ भी सुकन्या समृद्धि योजना के अंतर्गत खाता खोलने के लिए आवश्यक है.




सुकन्या समृद्धि योजना के अंतर्गत आप अधिकतम और न्यूनतम कितनी धनराशि जमा कर सकते हैं –

सुकन्या समृद्धि योजना के अंतर्गत खाता खोलने के लिए आपको सबसे पहले न्यूनतम 1000 रूपये जमा करके खाता खोलना होगा . इसके बाद आप 100 रुपए के गुणकों में पैसे जमा कर सकते हैं . सुकन्या समृद्धि योजना के तहत  न्यूनतम  1000 रूपये और अधिकतम डेढ़ लाख रूपये  प्रतिवर्ष अपनी बेटी के खाते में जमा कर सकते हैं. यदि अभिभावक माता - पिता की दो बेटियां हैं, तो इस स्थिति में सुकन्या समृद्धि योजना 2020  खाते में डेढ़ लाख- डेढ़ लाख कुल मिलाकर तीन लाख रूपये (3,00000)  जमा कर सकते हैं |


यदि आप सुकन्या समृद्धि योजना के अंतर्गत खोले गए खाते में एक वित्तीय वर्ष में डेढ़ लाख रूपय से अधिक की धनराशि जमा कर देते हैं, तो इस स्थिति में अतिरिक्त धनराशी पर आपको बैंक या पोस्ट ऑफिस की तरफ से किसी भी प्रकार का ब्याज नहीं दिया जाएगा और अतिरिक्त जमा की गई अपनी  धनराशि को आप कभी भी वापस ले सकते हैं. 


सुकन्या समृद्धि योजना  के अंतर्गत खाता खोलने के लाभ –

मित्रों आपको बता दें कि प्रधानमंत्री सुकन्या समृद्धि योजना  के अंतर्गत खाता खोलने के कई प्रकार के लाभ है . आप इससे इस  प्रकार से लाभान्वित हो  सकते हैं –


1. सुकन्या समृद्धि योजना के अंतर्गत जमा की गई धनराशि करमुक्त है. इस योजना के अंतर्गत एक वित्तीय वर्ष

    में आप अधिकतम डेढ़ लाख ऊपर तक ही जमा कर सकते हैं.

2. सुकन्या समृद्धि योजना के अंतर्गत मिलने वाला ब्याज भी करमुक्त है.

3. इस योजना के अंतर्गत 9.2 प्रतिशत का ब्याज प्रदान किया जाएगा.

4. सुकन्या समृद्धि योजना के अंतर्गत जब कन्या की उम्र 18 वर्ष की हो जाएगी,  तब वह पढ़ाई के लिए पैसे निकाल सकती है.  इसके साथ 21 वर्ष पूरा होने पर वह विवाह के लिए संपूर्ण धनराशि निकाल सकती है.

5. सुकन्या समृद्धि योजना के तहत  खोले गए खाते को आप कभी भी किसी भी बैंक से अथवा पोस्ट ऑफिस से

    किसी दूसरी बैंक या पोस्ट ऑफिस के ब्रांच में  स्थांतरण कर सकते हैं .

सुकन्या समृद्धि योजना के अधिक लाभ इस प्रकार समझ सकतें हैं –

यदि आप  सुकन्या समृद्धि योजना के अंतर्गत खोले गए खाते में आप 12000 रूपये की धनराशि प्रतिवर्ष जमा करते हैं तो इस प्रकार 14 वर्षों में कुल मिलाकर आपकी 16,8000 रुपए की धनराशि जमा होगी. लेकिन इस योजना के अंतर्गत आपके अकाउंट के परिपक्व (पूरा) होने के पश्चात आपको 6,07128 रूपये दिए जाएंगे |

इसके साथ ही इस योजना के अंतर्गत प्रति वर्ष अधिकतम 15,0000 रूपये जमा किए जा सकते हैं . यदि आप 14 वर्षों तक प्रतिवर्ष 150000 रूपये जमा करते हैं, तो पूरे - पूरे  आपके 21,00000 रुपए आपके बेटी के खाते में जमा होंगे. लेकिन इस योजना के अंतर्गत खाता परिपक्व होने पर आपको 72,00000 रुपए प्राप्त होंगे . इस योजना के तहत बेटी 18 वर्ष की उम्र में 50% धनराशि निकाल सकती हैं |




सुकन्या समृद्धि योजना  खाते में आप कब तक योगदान दे सकते हैं –

यदि आपने अपनी बेटी के नाम से सुकन्या समृद्धि योजना के अंतर्गत खाता खोला है, तो इस स्थिति में आप खाता खोलने की तारीख से लेकर 15 वर्ष पूरे होने तक बेटी के खाते में पैसे जमा कर सकते हैं .इसके बाद खाता  खोलने की तारीख से 16 वर्ष की शुरुआत और 21 वर्ष के अंत तक आप किसी प्रकार की धनराशि जमा नहीं कर सकते हैं .


नोट – यहां पर आपको इस बात का ध्यान  रखना है कि 16 वर्ष से 21 वर्ष के दौरान भी आपको ब्याज मिलता रहेगा.


सुकन्या समृद्धि योजना के अंतर्गत खोले गए खाते की परिपक्वता कब होती है –

दोस्तों आपकी जानकारी के लिए बता दें कि  सुकन्या समृद्धि योजना के अंतर्गत खोले गए खाते में जमा धनराशि को आप तब ही निकाल सकते हैं, जब बेटी की  उम्र 18 वर्ष हो चुकी हो. इस योजना का कार्यकाल 21 वर्ष तक होता है . जब से खाता खोला जाता है तब से लेकर 21 वर्ष होने तक आप इसमें जमा किए गए सारे  धनराशि  खाता धारक को ब्याज सहित वापस की जाती है. वहीँ यदि कन्या की आयु 18 वर्ष से अधिक है, एवं  कन्या का विवाह होना है . तो इस स्थिति में इस खाते को समय से पहले ही  बंद किया जा सकता है, और संपूर्ण धनराशि निकाली जा सकती है.


सुकन्या समृद्धि योजना के तहत समय से पूर्व पैसे निकालने के नियम –

दोस्तों सुकन्या समृद्धि योजना  अन्य योजनाओं से काफी अलग योजना है. क्योकि  इस योजना के अंतर्गत खोले गए खाते में जमा धनराशि को आप को समय से पूर्व नहीं निकाल सकते हैं . आप अपनी बेटी के खाते की धनराशि तभी निकाल सकते हैं. जब खाताधारक बेटी  की उम्र 18 वर्ष से अधिक हो, और उसे आगे की पढ़ाई के लिए पैसे की आवश्यकता हो . तब इस स्थिति में आप की कुल जमा धनराशि का 50% ही खाते से निकाल सकते हैं.

सुकन्या समृद्धि योजना  के अंतर्गत किए गए निवेश पर टैक्स में छूट  –

भारत सरकार द्वारा लाये गए सुकन्या समृद्धि योजना के अंतर्गत खोले गए खाते में अधिकतम आप 150000 रूपये  प्रति वर्ष तक का निवेश कर सकते हैं . इस योजना के अंतर्गत खाते में पैसे जमा करने पर आपको टैक्स में छूट दिया जाता  है . यह आयकर अधिनियम की धारा 80C के अंतर्गत आता है . इसके साथ ही इस योजना के अंतर्गत जमा की गई धनराशि पर मिलने वाला ब्याज भी कर मुक्त है . और समय पूर्ण होने पर मिलने वाली संपूर्ण धनराशि पर भी कोई टैक्स नहीं देना होता है .

नोट – यदि आपके दो बेटियां हैं | और आपने दोनों बेटियों के सुकन्या समृद्धि योजना के अंतर्गत खाता खोल रखा है और आप प्रतिवर्ष दोनों खातों में डेढ़ लाख -डेढ़ लाख रूपय कुल मिलाकर 3,00000 रूपये का निवेश करते हैं | तो आपको टैक्स छूट  में सिर्फ 3,00000 रूपये ही दिया जायेगा. 


यहां पर एक बात और ध्यान रखनी है | कि आप डेढ़ लाख तक का टैक्स बेनिफिट केवल सुकन्या समृद्धि योजना  में ही नहीं बल्कि ईपीएफ, ईएलएसएस और जीवन बीमा में जमा धनराशि भी इसी में जोड़कर दी  जाएगी .


सुकन्या समृद्धि योजना के अंतर्गत खोले गए खाते पर ब्याज दर –

दोस्तों आपको बता दें कि सुकन्या समृद्धि योजना के अंतर्गत शुरुवात में 9.2%  प्रदान किया जाता था . लेकिन वर्तमान में 2019-20  में यह ब्याज दर घटाकर 8.1% कर दिया गया है | यह ब्याज दर अब भी सभी सरकारी योजनाओं से ज्यादा है .


सुकन्या समृद्धि योजना  खाता आवेदन फार्म डाउनलोड –

यदि आपको सुकन्या समृद्धि योजना के अंतर्गत खाता ओपन कराना चाहते हैं. तो आपको पोस्ट ऑफिस अथवा बैंक द्वारा इस योजना के लिए फॉर्म प्राप्त कर सकते हैं. यदि आपको पोस्ट ऑफिस अथवा बैंक द्वारा फार्म प्राप्त करने में किसी प्रकार की समस्या का सामना करना पड़ रहा है. तो आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके सुकन्या समृद्धि योजना खाता फॉर्म डाउनलोड कर सकते हैं.


सुकन्या समृद्धि योजना  के लिए ऑनलाइन आवेदन कैसे करें –

यदि आप सुकन्या समृद्धि योजना के अंतर्गत दें ऑनलाइन आवेदन करना चाहते हैं, तो आप नीचे बताए जा रहे हैं. ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीके में से किसी एक तरीके का प्रयोग करके आवेदन कर सकते हैं –


सुकन्या समृद्धि खाते के लिए ऑनलाइन आवेदन कैसे करें –

दोस्तों सुकन्या समृद्धि योजना के अंतर्गत ऑनलाइन खाते के लिए आवेदन करने के लिए आप नीचे बताए गए आसान से स्टेप्स को फॉलो कर सकते हैं –


1. सबसे पहले आपको 28 राष्ट्रीयकृत बैंकों में से किसी एक बैंक की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाना होगा | जिस बैंक में आप सुकन्या समृद्धि खाता ओपन करना चाहते हैं |

2.वेबसाइट के होमपेज पर पहुंचने के पश्चात यहां आपको सुकन्या समृद्धि योजना  का लिंक मिलेगा | जिस पर आपको क्लिक करना होगा |

3. अब इस लिंक पर क्लिक करने के पश्चात आपको अपना रजिस्ट्रेशन करना होगा, जिसमें आपको रेजिडेंशियल प्रूफ माता-पिता का पहचान पत्र और बच्चे का पहचान का पत्र और जन्म प्रमाण पत्र की जरुरत  होगी.

4. यहां पर आपके द्वारा प्रदान की गई जानकारी की प्रामाणिकता होना आवश्यक है. आपके द्वारा प्रदान की गई सभी जानकारी को बैंक द्वारा चेक किया  जाएगा.

5. अब सारे जानकारी भरने और आवश्यक दस्तावेजों को अपलोड करने के पश्चात आपको सबमिट बटन पर क्लिक करना होगा.

6. इस प्रकार आवेदन पत्र सबमिट करने के पश्चात आपको पहली राशि बैंक खाते में जमा कर खाता चालू कर सकते हैं .आप इन्टरनेट  बैंकिंग की मदद से भी पैसे बेटी के खाते में जमा कर सकते हैं .

खाता खुलने होने के बाद  जब भी आपके खाते में पैसे जमा करते हैं , तो  आपको SMS द्वारा सभी जानकारी प्रदान कर दी जाती है .


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सुकन्या समृद्धि योजना  के अंतर्गत ऑफलाइन आवेदन कैसे करें –

यदि आप सुकन्या समृद्धि योजना के अंतर्गत ऑफलाइन आवेदन करना चाहते हैं, तो आप नीचे बताये जा रहे आसन से स्टेप्स को फॉलो करके ऑफलाइन आवेदन कर सकते हैं –


1. सुकन्या समृद्धि योजना खाते के लिए ऑफलाइन आवेदन करने के लिए सबसे पहले आपको सभी आवश्यक दस्तावेजों को लेकर अपने नजदीकी किसी बैंक अथवा पोस्ट ऑफिस में जाना होगा.

2. बैंक अथवा पोस्ट ऑफिस में पहुंचकर आपको सुकन्या समृद्धि योजना फार्म प्राप्त करना होगा . आवेदन फॉर्म में पूछी गई सभी जानकारी को सही-सही भरना होगा.

3. इसके साथ ही आप को आवेदन पत्र में आवश्यक सभी दस्तावेजों की फोटोकॉपी भी संलग्न करना होगा |

4. सभी जानकारी सही-सही भरने  और आवश्यक दस्तावेजों को संलग्न करने के बाद अपना  आवेदन पत्र बैंक अथवा डाकघर द्वारा निर्धारित काउंटर पर जमा करना होगा.

5. आवेदन फॉर्म जमा करने के पश्चात बैंक अथवा  डाकघर द्वारा आवेदन पत्र की जांची  की जाएगी. और यदि आपके द्वारा दिया गया सारा प्रमाण सही है तब आपकी बेटी का खाता खोल दिया जाएगा.

6. खाता खोलने के पश्चात बैंक और डाकघर द्वारा आपको पासबुक भी प्रदान की जाएगी | जिसमें आप के सभी लेन-देन का विवरण प्रदान किया जाएगा.

तो दोस्तों यह थी भारत सरकार की महात्वाकांक्षी  सुकन्या समृद्धि योजना के बारे में सभी जरुरी  जानकारी. मित्रों अगर  यह आर्टिकल पसंद आयी हो तो इस आर्टिकल को अपने दोस्तों, रिश्तेदारों एवं सोशल मीडिया पर  जरूर शेयर करें ताकि भारत सरकार के इस बहुत ही महात्वाकांक्षी योजना के बारे में सबको पता चल सके, जिसका लाभ वो अपनी बेटी के उज्जवल भविष्य के लिए उठा सकें.


धन्यवाद.


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Wednesday, 23 September 2020

10 प्रसिद्ध भारतीय व्यंजन जो मूल रूप से भारतीय नहीं हैं | 10 Famous Indian Recipes That Are Not Originally Indian

नमस्कार दोस्तों, जैसा कि आप सबको पता है की भारतीय लोग अपने सांस्कृतिक महत्व एवं बेहतरीन मेहमान नवाजी के लिए विश्व प्रसिद्द हैं। जब भी हमारे आपके घर कोई मेहमान आता है तो उनके मेहमान नवाजी के लिए हम लोग  बहुत सारे स्वादिष्ट व्यंजन बनाकर उनके सामने  परोसते हैं.

दोस्तों हम  बचपन से ही अपने दैनिक जीवन में कई ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन करते हैं जिन्हें ऐसा माना जाता है की वे  भारतीय व्यंजन हैं लेकिन आपको बता दें की ऐसा बिलकुल भी नहीं है। आज के इस पोस्ट में हम आप लोगों को कुछ ऐसे ही व्यंजनों के बारे में बताने वाले  हैं जिन्हें माना तो भारतीय व्यंजन  जाता है लेकिन वास्तव में इनकी उत्पत्ति  या खोज  विदेशों में हुई है.

1 . गुलाब जामुन ( Gulab Jamun) -

इस लिस्ट में पहला नाम भारत भर में बड़े ही चाव से खाया जाने वाला गुलाब जामुन  मूल रूप से भूमध्यरेखीय क्षेत्र का व्यंजन है, जिसे फारसी  आक्रमणकारियों के द्वारा भारत में लाया गया था. आपको बता दें की वहाँ गुलाब जामुन को  "लुकमत  अल कादी" के नाम से जाना जाता था|




मित्रों उन दिनों  वहाँ "लुकमत अल कादी"  यानि की आज के गुलाब जामुन को बनाने के लिए आटे की गोली को तेज आंच पर फ्राई करते  हैं. इसके बाद गोलीयों  को शहद की चाशनी में डालकर उसके ऊपर से चीनी छिड़क दी  जाती थीं. लेकिन आज भारत के लगभग सभी हिस्से में इसके बनाने के तरीकों में काफी बदलाव के साथ इसे और भी लजीज बना दिया गया है.


2. जलेबी ( Jalebi) -

दोस्तों जलेबी का नाम सुनते ही लोगों के जुबान पर पानी आ जाता है, और फिर आये भी क्यों ना  क्योकि जलेबी है ही इतनी प्यारी . आपको बता दें की जलेबी भारत का राष्ट्रीय मीठा है. जहाँ तक इसकी उत्पत्ति की बात है तो इसकी शुरुवात  मध्य पूर्व के देशों से हुई एवं  फारसी आक्रमणकारियों द्वारा यह भारत में लायी गयी. फारस में इसे मूल रूप से इसे “जलीबिया” या “जुलाबिया” और अरबी में इसको “जलाबिया ” के नाम से जाना जाता था.





3. चाय (Tea) - 

दोस्तों चाय की  शुरूआत सबसे पहले चीन में  हुई जहाँ पर इसका उपयोग वहां के लोग  औषधीय पेय के रूप में करते थे.  आज भी चाइना में चाय को बहुत पसंद किया जाता है. समय के साथ जल्द ही अंग्रेजों ने इसकी खोज कर ली  और इसे चीन से भारतीय बाजारों में लेकर आये जिसे भारत में हाथों हाथ लिया गया एवं जल्द ही पुरे भारत में इसे बहोत प्यार दिया गया एवं भारत भर के घरो में आने वाले मेहमानों को सबसे पहले दिया जाने वाला पेय बन गया. 




जहाँ तक इसकी खेती का सवाल है तो अंग्रेजों के द्वारा भारत के उत्तरी-पूर्वी भाग के आदिवासियों को चाय की खेती करने का तरीका सिखाया गया. इसके बाद से ही चाय भारत के लोगों के दिलो में अपना स्थान बना लिया एवं भारतीयों की दैनिक जीवन का एक अहम हिस्सा है और यह 1950 के बाद भारत में बहुत लोकप्रिय हो गया.


4 . दाल - भात ( Daal Bhaat) -

भात के सम्बन्ध में आश्चर्यजनक बात यह है कि इसे पूरी तरह से भारतीय व्यंजन माना  जाता है पर ऐसा वास्तव में सच नही है.  अगर भारत में इसकी सबसे अधिक लोकप्रियता की बात करे तो दाल भात असम , पश्चिम बंगाल के साथ पुरे उत्तर भारत में बहुत प्रसिद्द है . इन राज्यों में इसकी प्रसिद्धि का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है की इन प्रदेशो में रहने वाले लोगों के दोपहर का भोजन बिना दाल भात के पूरा नहीं होता.





5 . समोसा (Samosa) -

दोस्तों जब बात समोसे की आती है तो हमारे जुबान पर पानी आना लाजमी है. आखिर हम कर भी क्या सकते हैं समोसा है ही इतनी लजीज की इसके क्या बच्चे, क्या बूढ़े सभी को यह खूब भाता है. जहाँ तक इसकी उत्पत्ति की बात है तो आपको बता दें की समोसा की शुरुवात सबसे पहले  मध्य पूर्व से हुई और वहाँ इसे "सम्बोसा" के नाम से जाना जाता हैं . लेकिन समोसे के सम्बन्ध में कुछ जानकारों के द्वारा यह भी कहा जाता है की इसे भारत में मुगलों के द्वारा लाया गया था. वैसे भारत के पश्चिम बंगाल में इसे सिंघाड़ा एवं उत्तर प्रदेश के साथ भारत के ज्यादातर हिस्सों में इसे बड़े ही आदर के साथ समोसा नाम से जाना जाता है.

दोस्तों वैसे समोसा खाना तो मै भी बड़ा पसंद करता हू लेकिन मैंने भारत के कई राज्यों का समोसे का स्वाद लिया
है  लेकिन पश्चिम बंगाल का सिंघाड़ा मुझे सबसे ज्यादा पसंद है. अब बताने की बारी आपकी है की आपको भारत 
के किस शहर या राज्य का समोसा सबसे अच्छा लगता है.






 6 . राजमा ( Rajma) -

राजमा मैक्सिकन जायके  का प्रमुख  भोज्य पदार्थ में से एक है. आपको पुरे मक्सिको के छोटे - बड़े होटलों , रेस्टोरेंटो , ढाबो में यह हेल्दी खाद्य बड़े ही आसानी से देखने को मिल जायेगा. इसके साथ ही पुरे मक्सिको में इसकी खेती बड़े ही लगन के साथ होती है.  यह मध्य मेक्सिको और ग्वाटेमाला से भारत लाया गया है. जहाँ तक भारत में इसकी लोकप्रियता की बात है तो पूरा उत्तर भारत विशेष रूप से दिल्ली, उत्तर प्रदेश इसके अलावा पंजाब और हरियाणा के लोग इसे बड़े ही चाव से खाते हैं. राजमा के बारे में एक और बात यह है की यह बहोत हेल्दी एवं विभिन्न प्रकार के विटामिन एवं पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य है.




ऐसा कहा जाता है कि राजमा पुर्तगाल से भारत लाया गया था और इसको भिगोने और उबालने की तकनीक मैक्सिकन पाक कला से प्रभावित थी.


7. चिकन टिक्का मसाला ( Chicken Tikka Masala) -

दोस्तों चिकन टिक्का मसाला का आविष्कार ग्लासगो में हुआ था. इसके आविष्कार के पीछे एक बहुत ही दिलचस्प कहानी है और वह इस प्रकार है , हुआ यूँ था कि सन  1971 में ग्लासगो में अली अहमद नामक एक रसोइया था जिसके रेस्तरां (restaurant) का नाम शीश महल था. एक बार एक ग्राहक ने उस रेस्तरा में “चिकन करी” का आर्डर दिया लेकिन इसे खाते समय उसने इसे पसंद नहीं किया इसका कारण यह था की  “चिकन करी” सूखी थी. ठीक उसी  समय अली अहमद अपने रसोई में टमाटर सूप का मजे से आनंद ले रहा था और अचानक उसने सोचा कि क्यों न इस चिकन करी में सूप मिलाया  जाय. बस इसके बाद उसने करी में सूप, मसाले, क्रीम और दही के मिश्रण को मिलाया जिसे ग्राहकों ने बहुत पसंद किया. धीरे - धीरे उसका यह प्रयोग लोगों के जुबान पर अपने स्वाद का जादू दिखाना शुरू कर दिया और देखते ही देखते पुरे ग्लासगो भर से लोग इसके स्वाद को लेने के लिए शीश महल नाम के इस रेस्तरा में आने लगे और कुछ ही समय के बाद इस शहर के बाहर भी यह लजीज पकवान लोगों को अपना दीवाना बना लिया.




जहाँ तक भारत की बात है तो यहाँ के लोग भी इस चिकन टिक्का मसाला को बड़े ही चाव से खाते हैं . विशेष रूप से यह पंजाब, दिल्ली , उत्तर प्रदेश, गुजरात और हरियाणा में यह छोटे ,बड़े रेस्टोरेंटो पर आसानी से देखने को आपको मिल जायेंगे. जो इसकी प्रसिद्धि को खुद ही बयां कर देते हैं.

दोस्तों जहाँ तक मेरी बात है तो आपको बता दूँ कि मुझे खुद cहिचकें टिक्का मसाला बहोत पसंद है और जब भी मौका मिलता है , इसका स्वाद लेने से अपने आप को दूर नहीं रख पाता हूँ. वैसे आप लोगों को चिकन टिक्का कैसा  लगता है , हमें कमेंट बॉक्स में जरुर बताएं.


8. बिरयानी ( Biriyani) - 

दोस्तों जैसे बात बिरयानी की आती है , हमारे और आपके मुह में पानी आना लाजमी है क्योकि ये होतो ही है इतनी लजीज की हर नॉनवेज  लवर इसकी तरफ तेज़ी से आकर्षित हो जाता है. जहाँ तक इसकी शुरूआत की बात है तो यह 16वीं सदी में फारस से  हुई. क्योकि वहां सब्जी का उत्पादन पर्याप्त नहीं हो पाता था इसलिए काफी हद तक वहां के लोग नॉनवेज जैसे चिकन, मटन, बीफ पर निर्भर होते हैं.  इस व्यंजन का नाम फारसी शब्द "बिरियन" से लिया गया है जिसका अर्थ "खाना पकाने से पहले तलना या फ्राई करना है"

बिरयानी बनाने के लिए बासमती चावल , दही, केशर, वनस्पति तेल या मक्खन, कस्तूरी मेथी, अंडा, चिकन या मटन एवं विभिन्न प्रकार के गरम मसालों को मिलकर तैयार किया जाता है. 




जहाँ तक भारत में बिरयानी की लोकप्रियता की बात है तो पुरे भारत में यह लजीज नॉन वेज बहोत प्यार से खाया एवं खिलाया जाता है. भारत में इसे शादी- विवाह  एवं हर छोटे-बड़े पार्टियों में अक्सर आप देख सकते हैं. यह रेहड़ी से लेकर हर छोटे-बड़े रेस्टोरेंटो में आसानी से मिल जायेगा जिससे इसकी लोकप्रियता का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है.

अगर बात प्रसिद्धि की की जाये तो निजाम का शहर हैदराबाद की बिरयानी का कोई जवाब नहीं है. वैसे भारत में  बिरयानी को कई तरीके से बनाया जाता है विभिन्न प्रकार के मसालों के साथ अलग - अलग फ्लेवर की बिरयानी आपको मिल जाएगी.

जहाँ तक पसंद की बात है तो दोस्तों मै आपको बता दूँ की बिरयानी मुझे बहोत पसंद है और मैंने कई शहरों का बिरयानी टेस्ट किया है. लेकिन लखनऊ एवं हैदराबाद की बिरयानी मुझे सबसे अच्छी लगती है. अब बताने की बारी आपकी है की आपको भारत के किस शहर की बिरयानी सबसे अधिक पसंद है.  



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9. नान (Non) - 

इसकी शुरूआत फारस में हुई और खमीर के रूप में इसका इस्तेमाल ईरान में किया गया था. यह मुगल काल के दौरान मुगलों द्वारा भारत लाया गया था. यह देखने में काफी कुछ ब्रेड जैसा दिखता है एवं उतना ही सॉफ्ट होता है. इसका प्रयोग ज्यादातर लोग नॉनवेज जैसे चिकन, मटन एवं वेज में पनीर के साथ खूब किया जाता है.इसका कारण है की नॉन इन बताये गए व्यंजनों के साथ बहोत ही स्वादिस्ट लगता है. वैसे नान मुझे भी खूब भाता है और आपको , हमें जरुर बताएं . 




10. फिल्टर कॉफी ( Filter Coffee) -

 दोस्तों फ़िल्टर काफी की शुरुवात  यमन से  हुई थी. इसे दूध और चीनी के बिना मदिरा के विकल्प के रूप में सेवन किया जाता था. आपको बता दें की फ़िल्टर काफी 16 वीं सदी तक यह भारत में नहीं पाया जाता था. इसे मक्का की तीर्थयात्रा पर गए सूफी संत बाबा बुदन द्वारा भारत में लाया गया था.  वे वेयमन के मोचा शहर से सात कॉफी के दाने भारत में लाये थे. भारत में सबसे पहले  फिल्टर कॉफी "कॉफी उपकर समिति" द्वारा लोकप्रिय हुआ था जब उन्होंने 1936 में बंबई में अपने पहले कॉफी हाउस की स्थापना की थी.




दोस्तों हमारा आज का यह आर्टिकल आपको कैसा लगा हमें जरुर बताइए. अगर यह पोस्ट आपको पसंद आया हो तो इस पोस्ट को अपने दोस्तों, रिश्तेदारों एवं सोशल मीडिया पर शेयर जरुर करें ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को इस पोस्ट की सारी जानकारी प्राप्त  हो सकें.

धन्यवाद.



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